Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

देर रात स्नैक्स खाना पड़ सकता है भारी, बढ़ता है इन 5 बीमारियों का खतरा

क्‍या आप भी आधी रात को स्नैक्स खाते हैं? अगर हां, तो सावधान हो जाएं। ऐसा करने से मन को तो संतोष म‍िलता है, लेक‍िन कई बीमार‍ियों का खतरा बढ़ सकता है। जानें ऐसी 5 बीमार‍ियों के बारे में।

कई लोग रात को देर तक जगते हैं और स्नैक्स जैसे प‍िज्‍जा, बर्गर, च‍िप्‍स, कोल्‍ड ड्र‍िंक जैसी चीजों का सेवन करते हैं। यह आदत कभी-कभार फॉलो करना या क‍िसी मजबूती के कारण देर रात खाने से नुकसान नहीं होता, लेक‍िन अगर आप बार-बार देर से स्नैक्स खाते हैं, तो इससे सेहत खराब हो सकती है और व्‍यक्‍त‍ि बीमार‍ियों का श‍िकार हो सकता है। जानें ऐसी 5 बीमार‍ियों के बारे में जो देर रात स्नैक्स खाने के कारण हो सकती हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. मोटापा बढ़ सकता है

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देर रात खाने से वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है और व्‍यक्‍त‍ि मोटापे का श‍िकार हो सकता है। पेट भर जाने का संकेत देने वाला हार्मोन लेप्‍ट‍िन रात को ज्‍यादा एक्‍ट‍िव नहींं होता है और इस कारण जब आप देर रात को खाते हैं, तो द‍िमाग को पेट भर जाने का संकेत नहीं म‍िलता और व्‍यक्‍त‍ि ज्‍यादा खा लेता है और मोटापा का खतरा बढ़ सकता है। साल 2022 में Cell Metabolism नामक जर्नल में प्रकाशि‍त एक स्‍टडी के मुताब‍िक, देर रात स्नैक्स खाने से शरीर की जैव‍िक घड़ी ब‍िगड़ जाती है ज‍िससे व्‍यक्‍त‍ि मोटापे का श‍िकार हो सकता है। स्‍टडी में बताया गया क‍ि खाने के समय से 4 घंंटे लेट खाने से भी सेहत पर बुरा असर होता है इसल‍िए इस लेट नाइट स्नैकि‍ंग की आदत से बचना चाह‍िए।

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2. हार्ट अटैक का खतरा

देर रात स्नैक्स खाने की आदत से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ सकता है और हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ जाता है। देर रात खाने से व्‍यक्‍त‍ि हाई बीपी का श‍िकार भी हो सकता है और भव‍िष्‍य में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।

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3. एस‍िड रिफ्लक्स की समस्‍या हो सकती है

देर रात स्नैक्स खाकर व्‍यक्‍त‍ि तुरंत लेट जाता है या आराम करता है। इस आदत से गट हेल्‍थ खराब हो सकती है। हमारे शरीर को खाना पचाने के ल‍िए खाने और सोने के बीच कुछ घंंटों का गैप चाह‍िए होता है और जब यह गैप नहीं हो पाता है, तो पाचन समस्‍याएं जैसे एस‍िड रिफ्लक्स या हार्टबर्न जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

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4. देर रात स्नैक्स खाने से डायब‍ि‍टीज का खतरा बढ़ सकता है

अगर आप देर रात खाते हैं, तो इससे टाइप 2 डायब‍िटीज का खतरा बढ़ सकता है। शरीर की जैव‍िक घड़ी ब‍िगड़ने से इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी बढ़ सकती है और लंंबे समय तक शुगर स्‍पाइक्‍स से व्‍यक्‍त‍ि डायब‍िटीज का श‍िकार हो सकता है।

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5. हार्मोनल समस्‍याओंं का खतरा

देर रात स्नैक्स खाने से हार्मोनल समस्‍याओं का खतरा बढ़ सकता है। रात में शरीर मेलाटोन‍िन हार्मोन र‍िलीज करता है, जो क‍ि लेप्‍ट‍िन और घ्रेल‍िन हार्मोन को प्रभाव‍ित करता है। घ्रेल‍िन हार्मोन द‍िमाग को भूख का संकेत देता है और ल‍ेप्‍ट‍िन द‍िमाग को पेट भर जाने का संंकेत देता है, लेक‍िन देर रात खाने से ये हार्मोन्‍स उल्‍टी द‍िशा में काम करते हैं यानी भूख बढ़ाने वाला हार्मोन बढ़ सकता है और पेट भरने का संकेत देने वाले हार्मोन का स्‍तर घट सकता है ज‍िससे हार्मोनल समस्‍याएं जैसे थायराइड और पीएमओएस का खतरा रहता है।

न‍िष्‍कर्ष:

देर रात स्नैक्स खाने की आदत मोटापा, हार्ट अटैक, एस‍िड रिफ्लक्स, डायब‍ि‍टीज और हार्मोनल समस्‍याओं का कारण बन सकती है। इसल‍िए बेहतर सेहत के ल‍िए इस आदत से बचना चाह‍िए।

FAQ

  • ड‍िनर और सोने के बीच क‍ितनी देर का गैप होना चाह‍िए?

    ड‍िनर करने और सोने के बीच कम से कम 3 से 4 घंटे का गैप होना चाह‍िए। इतनी देर में पेट में खाना पचने की प्रक्र‍िया को समय म‍िल जाता है और पाचन समस्‍याओं का खतरा कम होता है। 
  • दो मील्‍स के बीच क‍ितना गैप होना चाह‍िए?

    दो मील्‍स के बीच 4 से 6 घंटे का गैप होना चाह‍िए। इससे एस‍िड‍िटी से बचने और एनर्जी लेवल को बनाए रखने में मदद म‍ि‍लती है। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 23:16 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 30, 2026 23:16 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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