परिवार में दादा-दादी या पापा-मम्मी को डायबिटीज होने पर लोग इसकी रोकथाम के लिए पहले से ही काफी उपाय करने लगते हैं। ऐसे में अगर किसी को प्री-डायबिटीज हो जाए तो डायबिटीज होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida का कहना है कि प्री-डायबिटीज कोई बीमारी नहीं है, बल्कि आपके शरीर द्वारा दी गई आखिरी वेक-अप-कॉल है। प्री-डायबिटीज का मतलब है कि आपके खून में शुगर का लेवल सामान्य से ज्यादा है, लेकिन अभी यह इतना ज्यादा नहीं हुआ है कि इसे टाइप-2 डायबिटीज कहा जाए। अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके आप प्री-डायबिटीज को डायबिटीज बनने से रोका जा सकता है।
प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने के लिए लाइफस्टाइल में करें ये 7 बदलाव
साल 2025 में Pharmacological Research में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार प्रीडायबिटीज को रिवर्स करने और शरीर की मेटाबॉलिक सेहत को सुधारने के लिए सही खान-पान, वजन कंट्रोल करना और विटामिन डी या प्रीबायोटिक्स जैसे सप्लीमेंट्स काफी मददगार हो सकते हैं।
Dr. Akshay Chugh के अनुसार, प्री-डायबिटीज इस बात का संकेत होता है कि आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ अच्छे बदलाव कर सकते हैं। इससे आपको प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने में मदद मिल सकती है।
1. डाइट से रिफाइंड कार्ब्स और शुगर को हटाएं
प्री-डायबिटीत होने पर आपके शरीर के सेल्स इंसुलिन को लेकर सही प्रतिक्रिया नहीं देती है। ऐसे में जब आप नॉर्मल चीनी या मैदा खाते हैं तो ब्लड शुगर लेवल तेजी से स्पाइक करता है। इसलिए आप सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड, पास्ता और नूडल्स की जगह साबुत अनाज जैसे रागी, बाजरा, ज्वार, ओट्स और ब्राउन राइस को अपनी डाइट में शामिल करें। इसके साथ ही, प्रोसेस्ड शुगर और लिक्विड कैलोरीज भी लेना बंद करें। इसमें पैक्ड जूस, सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा मीठी चाय या कॉफी पूरी तरह बंद कर दें।
2. प्लेट मेथड अपनाएं और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं
खाना खाने का तरीका आपके शुगर लेवल को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है। इसलिए, हमेशा अपनी खाने की थाली को 3 हिस्से में बांटें।
- थाली का 50% हिस्सा नॉन-स्टार्ची सब्जियों और सलाद से भरें, जिसमें जैसे खीरा, टमाटर, पालक, ब्रोकली, लौकी और गाजर शामिल हों।
- थाली का 25% हिस्सा लीन प्रोटीन से भरा होना चाहिए, जिसमें अंकुरित अनाज या स्प्राउट्स, दालें, पनीर, टोफू, अंडा या ग्रिल्ड फिश और चिकन शामिल करें।
- अपनी थाली का 25% हिस्सा कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाला रखें, जिसमें 1-2 मल्टीग्रेन रोटी या थोड़ा ब्राउन राइस रखें।
फाइबर आपके पेट में जाकर कार्बोहाइड्रेट के पचने की गति को धीमा कर देता है, जिससे भोजन के बाद अचानक ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ता है।
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3. थोड़ा वजन कम करें
अगर आपका वजन आपकी लंबाई के हिसाब से ज्यादा है, तो पेट के आसपास जमा वसा आपके इंसुलिन हार्मोन को सही से काम नहीं करने देती है। अगर आपका वजन 80 किलो है, तो आपको डायबिटीज से बचने के लिए 20 किलो वजन घटाने की जरूरत नहीं है।
साल 2024 में Diabetologia जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार अगर आप लाइफस्टाइल में बदलाव करके अपने शरीर का 5% से ज्यादा वजन कम करते हैं, तो लगभग 43% लोगों का ब्लड शुगर लेवल वापस बिल्कुल नॉर्मल हो जाता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा 73% तक कम हो जाता है
4. शारीरिक रूप से एक्टिव रहें
जब आप एक्सरसाइज करते हैं तो मांसपेशियां बिना इंसुलिन की मदद के भी खून से ग्लूकोज सोखने लगती हैं। इसलिए, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करना प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हफ्ते में कम से कम हफ्ते में कम से कम 5 दिन 30-30 मिनट तेज वॉक करें, साइकिल चलाएं, स्विमिंग करें या योग करें। इसके अलावा, हफ्ते में 2 दिन हल्के वजन उठाना या बॉडीवेट एक्सरसाइज जैसे पुश-अप्स और स्क्वैट्स करना बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही, भोजन करने के बाद 10 मिनट टहलना अच्छा होता है।
How-to-Reverse-Pre-Diabetes-inside
5. नींद पूरी करें और तनाव को मैनेज करें
प्री-डायबिटीज होने के बारे में पता चलते ही लोगों में तनाव का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। भले ही वे अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देते हैं, लेकिन नींद को नजरअंदाज कर देते हैं। जब आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है। इससे बिना मीठा खाए भी शरीर में शुगर लेवल बढ़ सकता है। इसलिए, तनाव कम करने के लिए प्राणायाम और मेडिटेशन करें। इसके साथ ही रोजाना रात में 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
6. स्मोकिंग और शराब छोड़ें
सिगरेट में मौजूद निकोटिन इंसुलिन पर बुरा असर डालता है। वहीं, शराब का ज्यादा सेवन अग्न्याशय को नुकसान पहुंचाता है और वजन बढ़ाता है। इसलिए, अगर आप प्री-डायबिटीक हैं तो इन आदतों से दूरी बना लें।
7. नियमित जांच करें
प्री-डायबिटीज में अक्सर कोई बाहरी लक्षण नजर नहीं आता है, इसलिए इसे साइलेंट माना जाता है। हर 3 से 6 महीने में अपना फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट जरूर करवाएं। इससे आपको यह ट्रैक करने में मदद मिलेगी कि आपके लाइफस्टाइल में किए हुए बदलाव काम कर रहे हैं या नहीं।
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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
प्री-डायबिटीज की स्थिति में तुरंत या समय पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आपकी उम्र 35 साल से ज्यादा है या परिवार में किसी को डायबिटीज का इतिहास है तो साल में कम से कम 1 बार HbA1c या फास्टिंग ब्लड शुगर की जांच करवाएं और डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा, अगर आपको बार-बार प्यास लगे, बहुत ज्यादा पेशाब आए, बिना कारण थकान महसूस हो, धुंधला दिखाई दे या हाथ-पैरों में झुनझुनी महसूस हो तो इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
निष्कर्ष
प्री-डायबिटीज के डायग्नोसिस होने पर आप लाइफस्टाइल में इन बदलावों को करके डायबिटीज होने से बचा सकते हैं। इतना ही नहीं, प्री-डायबिटीज को डाइट, लाइफस्टाइल और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करवा कर मैनेज किया जा सकता है।
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FAQ
प्री-डायबिटीज के क्या लक्षण हैं?
प्री-डायबिटीज की शुरुआत में अक्सर कोई खास या बड़े लक्षण नजर नहीं आते हैं, लेकिन कुछ लोगों में ऐसे संकेत नजर आ सकते हैं, जो शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का संकेत हो सकता है।प्रीडायबिटीज में क्या क्या नहीं खाना चाहिए?
प्री-डायबिटीज में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने और टाइप-2 डायबिटीज से बचने के लिए मीठे, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और प्रोसेस्ड फूड्स से बचना चाहिए।
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Sep 06, 2026 13:21 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
