इंसुलिन का काम होता है ब्लड में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुंचाना ताकि शरीर उसे एनर्जी के फॉर्म में इस्तेमाल कर सके। जब इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति आती है तब कोशिकाएं इंसुलिन के अनुसार नहीं चलतीं और ब्लड में शुगर की मात्रा बनी रहती है। इससे शरीर ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है, जिससे ब्लड में शुगर धीरे-धीरे बढ़ सकती है और आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस से संंबंधित जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. M. Sheetal Kumar, Consultant Physician & Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
इंसुलिन क्या होता है?
इंसुलिन हमारे अग्नाशय या पैंक्रियाज के बीटा सेल्स द्वारा बनाया जाता है। हम जो भी खाते हैं वह ग्लूकोज में बदलता है। ग्लूकोज को सेल्स के जरिए अब्जॉर्ब कराने में जो हार्मोन मदद करता है उसे इंसुलिन कहते हैं। हमारे सेल्स पर इंसुलिन बाइंडर्स होते हैं जो इंसुलिन के जरिए खाने से शुगर को अब्जॉर्ब करने में मदद करते हैं। शरीर में मौजूद फैट सेल्स, मसल्स सेल्स और लिवर सेल्स, शुगर को अब्जॉर्ब करते हैं ताकि वह ग्लूकोज को एनर्जी में बदल पाएं।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस क्या होता है?

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि जब शरीर के सेल्स सही ढंग से इंसुलिन को रिस्पांस नहीं देते हैं, तो पैंक्रियाज पर ज्यादा इंसुलिन बनाने के लिए दबाव बनता जाता है। जब ब्लड में मौजूद सेल्स इंसुलिन को ठीक ढंग से अब्जॉर्ब नहीं कर पाते हैं, तो ब्लड में शुगर लेवल बढ़ता जाता है। एक समय के बाद पैंक्रियाज द्वारा बनाया गया इंसुलिन ब्लड में शुगर लेवल को मैनेज करने के लिए काफी नहीं होता है। इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इसके कारण शुगर लेवल असंतुलित होता है और प्री-डायबिटीज, डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज के बीच क्या संबंध है?
इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप 2 डायबिटीज का मूल कारण है। इसमें पैंक्रियाज जरूरत से ज्यादा काम करते हैं जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसका संबंध प्री-डायबिटीज से भी है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण क्या हैं?
इंसुलिन रेजिस्टेंस के कुछ कॉमन लक्षण इस प्रकार हैं-
- ब्लड शुगर लेवल ज्यादा होना।
- ट्राइग्लिसराइड्स (ब्लड में पाया जाने वाला एक तरह का फैट) का लेवल ज्यादा होना।
- LDL या बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होना।
- HDL या गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होना।
- ज्यादा थकान होना
- ज्यादा भूख लगना
- हाई बीपी
- त्वचा पर काले धब्बे (Acanthosis Nigricans)
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इंसुलिन रेजिस्टेंस क्यों होता है?
- अगर पेट के आस-पास चर्बी ज्यादा होगी, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ सकती है क्योंकि फैट इंसुलिन को ठीक से काम करने नहीं देता। इस वजह से ब्लड में शुगर लेवल बढ़ सकते हैं।
- अगर ब्लड प्रेशर असंतुलित रहता है, तो भी व्यक्ति को इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो सकती है।
- फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 100 के ऊपर रहता है, तो व्यक्ति को इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है।
- महिलाओं में PCOD या PCOS जैसी स्थिति में हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक कारण बन सकता है।
- स्मोकिंग या धूम्रपान जैसी खराब आदतें भी इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकती हैं।
- स्ट्रेस ज्यादा है, तो शरीर कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है।
- नींंद की कमी से भी शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो सकता है।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा किन्हें ज्यादा होता है?
National Institute of Diabetes And Digestive and Kidney Diseases के मुताबिक, कुछ कारक इंसुलिन रेजिस्टेंस या प्री-डायबिटीज होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं जैसे-
- ज्यादा वजन, मोटापा या कमर का साइज बड़ा होना।
- 45 साल या उससे ज्यादा उम्र का होना।
- बच्चों और किशोरों को भी इंसुलिन रेजिस्टेंस और प्री-डायबिटीज हो सकता है।
- परिवार में डायबिटीज का इतिहास होना।
- शारीरिक रूप से एक्टिव न होना।
- धूम्रपान करना (तंबाकू उत्पादों और ई-सिगरेट सहित) या दूसरों के धुएं के संपर्क में आना।
- जेस्टेशनल डायबिटीज का इतिहास होना।
- अन्य बीमारियां या स्थितियां होना, जैसे कि हाई बीपी, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), कुशिंग सिंड्रोम, एक्रोमेगाली, स्लीप एपनिया, या वायरल बीमारियां।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस का शरीर पर क्या असर होता है?
इंसुलिन रेजिस्टेंस के प्रभाव इस प्रकार होते हैं-
- ब्लड शुगर बढ़ने से धीरे-धीरे प्री-डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
- ज्यादा इंसुलिन बनना (हाइपरइंसुलिनेमिया) से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इससे हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है। गर्दन और बगल में काले धब्बे (Acanthosis Nigricans) जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
- पीसीओएस का खतरा हो सकता है जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं।
- थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
- फैटी लिवर जैसी समस्या हो सकती है।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच
- इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच करने के लिए डॉक्टर फैमिली हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं।
- इसका संबंध डायबिटीज है इसलिए परिवार में किसी को डायबिटीज की समस्या है, तो डॉक्टर को बताएं।
- इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर HbA1c टेस्ट, फास्टिंग शुगर टेस्ट, ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट जैसे टेस्ट किए जा सकते हैं।
- HbA1c टेस्ट कभी भी किया जा सकता है, इसमें खाली पेट रहने की जरूरत नहीं होती है।
- अगर HbA1c टेस्ट का लेवल 5.7 से 6.4 के बीच है, तो व्यक्ति को प्री-डायबिटीज हो सकती है।
- अगर HbA1c टेस्ट का लेवल 6.5 से ज्यादा है, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है।
- अगर फास्टिंग शुगर टेस्ट 100 से 125 के बीच आता है, तो यह प्री-डायबिटीज का संकेत हो सकता है।
- अगर पोस्ट मील शुगर लेवल खाने के दो घंटे बाद 140 के अंदर है, तो यह सामान्य है। वहीं अगर शुगर लेवल 140 से ऊपर है, तो डॉक्टर प्री-डायबिटीज का संकेत दे देते हैं।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस का इलाज क्या है?
Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। इन दवाओं की मदद से इंसुलिन रेजिस्टेंस के साथ-साथ शुगर लेवल को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने के लिए केवल दवाएं काफी नहीं हैं, इसके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का भी अहम किरदार होता है।
- 2023 में ऑनलाइन मेडिकल रिसोर्स StatPearls में प्रकाशित किताब Insulin Resistance में बताया गया है कि वजन कम करना, कैलोरी कंट्रोल करना और सही डाइट लेना इंसुलिन रेजिस्टेंस का मुख्य इलाज माना जाता है। स्टडी के मुताबिक, कुछ मेडिकेशन इंसुलिन की कार्यक्षमता सुधारने और शरीर की इंसुलिन जरूरत कम करने में मदद कर सकती हैं।
- American Diabetes Association के मुताबिक, इंसुलिन रेजिस्टेंस के इलाज के लिए अक्सर डायबिटीज कंट्रोल करने की दवाएं दी जाती हैं जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करके ब्लड ग्लूकोज के स्तर को घटाती हैं।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस को मैनेज कैसे करें?
- हाई कार्ब्स डाइट से बचें। इंसुलिन रेजिस्टेंस कंट्रोल करने के लिए कार्ब्स का इंटेक सीमित करें। दिनभर रोटी, चावल या ब्रेड खाने के बजाय ताजे फल और सब्जियों को भी डाइट का हिस्सा बनाएं।
- अगर शरीर में पानी की कमी है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, इससे शुगर लेवल को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
- दिनभर में 30 से 50 मिनट फिजिकल एक्टिविटी को दें।
- स्ट्रेस मैनेज करें, दिन की शुरुआत योग या मेडिटेशन के साथ करें।
- स्लीप पैटर्न पर गौर करें। नींद पूरी नहीं करेंगे, तो शारीरिक समस्याएं दूर करना मुश्किल हो सकता है।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर कैसी डाइट लें?
Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि कम ग्लाइसेमिक इंंडेक्स वाले फूड्स खाएं। ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) एक ऐसा टूल है, जो आपको यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि किन चीजों का आपके ब्लड शुगर लेवल पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। सब्जियां, साबुत अनाज (ओट्स, क्विनोआ), लीन प्रोटीन (मछली, चिकन), हेल्दी फैट्स (एवोकाडो, नट्स) और फाइबर से भरपूर चीजें खाएं। चीनी, रिफाइंड कार्ब्स और प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करें।
इंंसुलिन रेजिस्टेंस में इन चीजों को खाने से बचें
रेगुलर सोडा और जूस जैसे ज्यादा शुगर वाले ड्रिंक्स से बचना सेहतमंद हो सकता है। कुछ चीजों को ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए-
- सफेद ब्रेड
- आलू
- ब्रेकफास्ट सीरियल्स
- केक और कुकीज
- तरबूज और खजूर जैसे फल
इंंसुलिन रेजिस्टेंस में ये चीजें खाएंं
इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों को इन चीजों का सेवन करना चाहिए-
- बीन्स और फलियां
- सेब और बेरी जैसे फल
- बिना स्टार्च वाली सब्जियां, जैसे फूलगोभी और पत्तेदार सब्जियां
- नट्स
- डेयरी, मछली और मीट
- अपनी खाने-पीने की आदतों में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।
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क्या इंसुलिन रेजिस्टेंस रिवर्स हो सकता है?
Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि जीवनशैली में किए गए हेल्दी बदलाव जैसे स्ट्रेस मैनेजमेंट, एक्सरसाइज, वेट लॉस और पर्याप्त नींद लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस को रिवर्स करने में मदद मिलती है। CDC (Centers For Disease Control And Prevention) के मुताबिक, अगर आपको इंसुलिन रेजिस्टेंस है, तो इसे रिवर्स करने के लिए ये टिप्स अपनाएं-
- शारीरिक गतिविधि इंसुलिन के प्रति ज्यादा सेंसिटिव बनाती है, यही एक वजह है कि यह डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए जरूरी है। इसलिए फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें।
- बिना स्टार्च वाली सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन वाला संतुलित आहार लेने से आपके ब्लड शुगर को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस को ठीक करने में मदद मिलेगी।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- बार-बार थकान, ज्यादा भूख या प्यास, वजन तेजी से बढ़ने पर जांच करानी चाहिए।
- ब्लड शुगर बार-बार हाई आना, शुगर लेवल असंंतुलित होना या प्री-डायबिटीज और डायबिटीज का शक होना।
- गर्दन या बगल में काले धब्बे (Acanthosis Nigricans) जैसे लक्षण दिखना।
- पीसीओएस, मोटापा या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं पहले से होना।
- परिवार में डायबिटीज का इतिहास होना।
- अगर शरीर में शुगर कंट्रोल से जुड़े लक्षण दिखें या रिस्क फैक्टर हों, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
निष्कर्ष:
Consultant Physician & Diabetologist, Dr. M. Sheetal Kumar से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस तब विकसित होता है जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सही ढंग से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं। शरीर को ग्लूकोज का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में सक्षम बनाने और ब्लड शुगर के स्तर को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए इंसुलिन जरूरी है। जब इंसुलिन प्रभावी ढंग से काम नहीं करता, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है और डायबिटीज हो सकती है।
FAQ
क्या नींद का इंसुलिन रेजिस्टेंस पर असर पड़ता है?
नींद का इंसुलिन रेजिस्टेंस पर असर पड़ सकता है। कम या खराब नींद से शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी घटती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है। रोज सात से आठ घंटे अच्छी नींद लेना इसे सुधारने में मदद करता है।इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने में कितना समय लग सकता है?
इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने में कितना समय लगेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका वजन, लाइफस्टाइल, डाइट और मेडिकल कंडीशन कैसी है? अगर नियमित डाइट, एक्सरसाइज और वजन कंट्रोल रखें, तो तीन से छह महीनों में अच्छा सुधार दिख सकता है। कुछ लोगों में ज्यादा समय भी लग सकता है।इंसुलिन रेजिस्टेंस में दवाओं की जरूरत होती है?
इंसुलिन रेजिस्टेंस के हर केस में दवाओं की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में डाइट, एक्सरसाइज और वजन कंट्रोल ही सबसे प्रभावी इलाज होता है। अगर ब्लड शुगर ज्यादा हो, प्री-डायबिटीज या डायबिटीज हो या सुधार न हो, तब डॉक्टर दवा दे सकते हैं।
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Apr 24, 2026 17:57 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 24, 2026 17:57 IST
Modified By : Yashaswi MathurApr 24, 2026 17:57 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr M Sheetal Kumar