Fri Sep 11, 2026 | 07:34 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sunil Kumar K , Pulmonology

क्या है सिस्टिक फाइब्रोसिसः जानें लक्षण, कारण और इलाज

सिस्टिक फाइब्रोसिस लंग्स और पाचन संबंधी समस्या से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जो कि आनुवंशिक है। इस लेख में जानिए, सिस्टिक फाइब्रोसिस को कैसे मैनेज किया जा सकता है?

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सिस्टिक फाइब्रोसिस एक गंभीर बीमारी है, जो कि मुख्य रूप से फेफड़े और पाचन तंत्र को प्रभावित करती है, लेकिन इसका असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ सकता है। ज्यादातर लोगों को इस बीमारी से संबंधित कोई विशेष जानकारी नहीं होती है। ध्यान रखें कि यह एक आनुवंशिक बीमारी है इसलिए जिन परिवारों में सिस्टिक फाइब्रोसिस का इतिहास है, उन्हें इसके प्रति सजग रहना चाहिए। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि सिस्टिक फाइब्रोसिस क्या है, इसके क्या कारण हो सकते हैं और क्या इस बीमारी से बचाव संभव है? इस लेख में बताए गए सभी वैज्ञानिक तथ्यों की पुष्टि बेंगलुरु स्थित Aster CMI Hospital में Pulmonologist डॉ. सुनील कुमार ने की है।

क्या है सिस्टिक फाइब्रोसिस?

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Mayoclinic के अनुसार सिस्टिक फाइब्रोसिस आनुवंशिक यानी जन्म से होने वाली बीमारी है। यह लंग्स और पाचन तंत्र को प्रभावित करती है। सिस्टिक फाइब्रोसिस होने पर शरीर के अंदर बहुत गाढ़ा और चिपचिपा बलगम बनने लगता है, जो कई अंगों में जमा होने लगता है, जिससे उन्हें भारी नुकसान पहुंचने लगता है। सिस्टिक फाइब्रोसिस पैंक्रियाज में सिस्ट (गांठें) और फाइब्रोसिस (निशान/घाव) पैदा कर देती है। यह गाढ़ा बलगम पाचन एंजाइमों के प्रवाह को बाधित कर देता है, जिससे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं और लिवर, साइनस तथा आंतों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ने लगता है। डॉक्टर यह भी बताते हैं यह बीमारी जन्म से ही मौजूद होती है। यह पूरी जिंदगी रहने वाली बीमारी है जो समय के साथ बढ़ती जाती है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के प्रकार

डॉ. सुनील कुमार बताते हैं सिस्टिक फाइब्रोसिस दो प्रकार के होते हैं-

  • क्लासिक सिस्टिक फाइब्रोसिसः सिस्टिक फाइब्रोसिस का यह प्रकार शरीर के कई अंगों को एक साथ प्रभावित करता है। आमतौर पर इसका निदान जीवन के पहले कुछ वर्षों में ही हो जाता है।
  • एटिपिकल सिस्टिक फाइब्रोसिसः सिस्टिक फाइब्रोसिस का यह दूसरा प्रकार है। यह तुलनात्मक रूप से माइल्ड है। यह केवल एक अंग को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसके लक्षण अलग-अलग नजर आ सकते हैं। इसके निदान की बात करें, तो अक्सर वयस्क अवस्था में होता है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के लक्षण

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चूंकि सिस्टिक फाइब्रोसिस शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित करती है, इसके लिए इसके लक्षण भी अलग-अलग नजर आ सकते हैं, डॉ. सुनील कुमार इन लक्षणों को विस्तार से समझाते हैं-

रेस्पीरेटरी संबंधी लक्षण

  • सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण लंग्स में गाढ़ा बलगम जमा हो जाता है। बाहर नहीं निकल पाने के कारण इसमें बैक्टीरिया फंस जाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को क्रोनिक इंफेक्शन या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में बलगम बनने के कारण लगातार खांसी की समस्या मरीज को बनी रहती है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में श्वासनली भी प्रभावित होती है। इस स्थिति में मरीज को बेचैनी और सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस के मरीजों की इम्यूनिटी बहुत कमजोर होती है, इसलिए उनमें बार-बार लंग्स इंफेक्शन, साइनस आदि लक्षण भी नजर आते हैं।

पाचन संबंधी लक्षण

  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में गाढ़ा और चिपचिपे बलगम के कारण पैंक्रियाज से निकलने वाले पाचन एंजाइम अवरुद्ध होते हैं, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण मरीज का विकास बाधित होता है और वजन भी लगातार घटता रहता है। हैरानी की बात ये है कि मरीज को सामान्य भूख लगती है, फिर भी वजन नहीं बढ़ता है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस के मरीजों को अक्सर पेट दर्द बना रहता है और आंतों से संबंधित समस्या होती है, जिससे उन्हें कब्ज की परेशानी हो सकती है। ऐसा खासकर बच्चों में देखने को मिलता है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस के मरीजों में गॉलब्लैडर की समस्या, त्वचा का पीला पड़ना और लिवर से जुड़ी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के अन्य लक्षण

  • पसीने में क्लोराइड की मात्रा बढ़ना।
  • महिलाओं में प्रजनन क्षमता में कमी आना।
  • पुरुषों की प्रजनन नलिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं।
  • ऑक्सीजन की कमी के कारण हाथ-पैरों की उंगलियों के पोरों का चौड़ा होना।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण

सिस्टिक फाइब्रोसिस एक आनुवंशिक बीमारी है। इसका मतलब है कि यह बीमारी बच्चों को अपने माता-पिता से मिलती है। इसके कारणों को विस्तार से समझते हैं-

  • CFTR जीन में खराबीः सिस्टिक फाइब्रोसिस CFTR नाम के जीन में खराबी के कारण होती है। यह जीन शरीर में नमक और पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
  • बलगम सूखकर गाढ़ा और चिपचिपा होनाः चूंकि, सिस्टिक फाइब्रोसिस CFTR में खराबी के कारण होती है। वास्तव में, CFTR जीन में खराबी के कारण कोशिकाओं से क्लोराइड (नमक का हिस्सा) बाहर नहीं निकल पाता, जिससे सेल्स के बाहरी हिस्से में पानी की कमी हो जाती है। इसी वजह से बलगम सूखकर गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है।

CFTR म्यूटेशन सिस्टिक फाइब्रोसिस का कारण कैसे बनते हैं?

National Heart, Lung, and Blood Institute (NHLBI) के अनुसार CFTR जीन में 2,000 से अधिक प्रकार के म्यूटेशन सिस्टिक फाइब्रोसिस का कारण बन सकती हैं। अलग-अलग म्यूटेशन इस बात को प्रभावित करते हैं कि सेल्स कितनी मात्रा में CFTR प्रोटीन बनाती हैं और वह प्रोटीन कितनी अच्छी तरह काम करता है। असल में, सबसे आम जीन म्यूटेशन में, CFTR जीन का एक हिस्सा गायब होता है। इस खराबी के कारण जो CFTR प्रोटीन बनता है, वह अपना सही शेप बरकरार नहीं रख पाता। वहीं, कुछ म्यूटेशन ऐसे होते हैं, जिनकी वजह से सेल्स बहुत ही कम मात्रा में CFTR प्रोटीन बना पाती हैं या बिल्कुल भी नहीं बना पातीं।

सिस्टिक फाइब्रोसिस की जांच

American Lung Association में प्रकाशित लेख से पता चलता है सिस्टिक फाइब्रोसिस का निदान न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग के जरिए किया जाता है, जिसमें ब्लड में इम्यूनो-रिएक्टिव ट्रिप्सिनोजेन के उच्च स्तर की जांच की जाती है। इसकी पुष्टि के लिए स्वेट क्लोराइड टेस्ट किया जाता है। इसके लिए बच्चों की त्वचा (आमतौर पर बांह) से पसीने का सैंपल लिया जाता है। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट भी किया जाता है, जिसके जरिए CFTR जीन म्यूटेशन की पहचान की जाती है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस से जुड़े रिस्क

सिस्टिक फाइब्रोसिस से जुड़े रिस्क इस प्रकार हैं-

रेस्पिरेटरी सिस्टम

  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में निमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसे गंभीर संक्रमण का जोखिम बना रहता है
  • अगर लंबे समय तक सिस्टिक फाइब्रोसिस का इलाज न किया जाए, तो इसकी वजह से क्रोनिक रेस्पिरेटरी फेलियर हो सकता है, जो भविष्य में मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में ब्रोंकिइक्टेसिस (वायुमार्ग का चौड़ा होना) और न्यूमोथोरैक्स (फेफड़ों का बैठ जाना) जैसी समस्याओं का जोखिम बना रहता है।

डाइजेशन

  • 2017 में Dtsch Arztebl Int में प्रकाशित स्टडी के अनुसार चूंकि सिस्टिक फाइब्रोसिस केकारण पैंक्रियाटिक इनसफिशिएंसी हो सकती है। इसका मतलब है कि पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में एंजाइम नहीं बना पाते हैं। ऐसे में विकास बाधित हो सकता है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस के कारण पित्त नलिकाओं में अवरोध पैदा हो जाता है, जो कि लिवर फेलियर का कारण बन सकता है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में शरीर में इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस और डिहाइड्रेशन जैसी समस्या हो सकती है।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में मरीज को ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के पतले होने, गठिया और मांसपेशियों में दर्द जैसे जोखिम देखने को मिलते हैं। 

सिस्टिक फाइब्रोसिस का ट्रीटमेंट

2024 में Journal of Biosciences में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है सिस्टिक फाइब्रोसिस का ट्रीटमेंट इसके लक्षणों को कंट्रोल करने और इससे जुड़े जोखिम को कम रोकने पर किया जाता है। सांस संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिए चेस्ट फिजियोथेरेपी और दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। पाचन तंत्र की समस्याओं की बात करें तो इस जर्नल से पता चलता है कि सिस्टिक फाइब्रोसिस के इलाज के लिए पैनक्रिएटिक एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी की जाती है। यह एक बेहतरीन ट्रीटमेंट है, जो गायब हो चुके एंजाइमों की जगह लाइपेज, एमाइलेज (पाचक एंजाइम) और प्रोटीज प्रदान करता है। इससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सकता है। हालांकि, मरीज की स्थिति देखते हुए डॉक्टर इसके डोज को तय करते हैं और कितने लंबे समय तक दवा चलेगी, यह भी बताया जाता है।

सिस्टिक फाइब्रोसिस को कैसे मैनेज करें?

सिस्टिक फाइब्रोसिस को मैनेज करने के लिए यहां बताए गए कुछ टिप्स को अपना सकते हैं, जैसे-

  • दिन भर में हैवी मील लेने के बजाय छोटे-छोटे मील लें।
  • डॉक्टर की सलाह पर हाई कैलोरी, हाई फैट युक्त डाइट लें।
  • पैंक्रियाज को नुकसान से बचाने के लिए स्मोकिंग न करें।
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। इसमें विटामिन ए, डी, ई और के मरीज स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

सिस्टिक फाइब्रोसिस से बचाव कैसे करें?

2007 में Thieme में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चलता है सिस्टिक फाइब्रोसिस से खुद बचाव किया जाना संभव नहीं है। हां, अगर पति-पत्नी को या करीबी रिश्तेदारों को यह समस्या है, तो उन्हें बच्चे प्लान करने से पहले खुद का जेनेटिक टेस्टिंग करवानी चाहिए। इससे आपको यह समझ आएगा कि आने वाली पीढ़ी को सिस्टिक फाइब्रोसिस होने का खतरा कितना ज्यादा है, वहीं, अगर महिला पहले से ही गर्भवती है, तो टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि बच्चे को सिस्टिक फाइब्रोसिस है या नहीं। डॉक्टरों का कहना है कि सिस्टिक फाइब्रोसिस की जांच हर किसी को नहीं करवानी चाहिए। यह टेस्ट करवाना है या नहीं, इस संबंध में पहले जेनेटिक काउंसलर से बात करें। इसके बाद कोई निर्णय लें।

सिस्टिक फाइब्रोसिस के लिए कब जाएं डॉक्टर के पास

कई बार लोगों को पता नहीं चलता है कि सिस्टिक फाइब्रोसिस होने पर कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए। यहां बताए गए संकेतों पर गौर करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं-

  • सांस लेने में तकलीफ हो
  • खांसी में खून आने लगे
  • सीने में तीव्र दर्द हो
  • यदि अचानक सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होने लगे
  • होंठ और नाखून नीले नजर आने लगे
  • तीव्र पेट दर्द महसूस हो
  • अक्सर थकान बनी रहती है
  • पाचन संबंधी समस्या होने लगे

निष्कर्ष

सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी बीमारी को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अगर किसी के परिवार में सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी बीमारी है, तो उन्हें इस संबंध में जरूरी जानकारी होनी चाहिए। साथ ही, नया परिवार शुरू करने से पहले सिस्टिक फाइब्रोसिस का टेस्ट करवाने से भावी पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।

All Image Credit: Freepik

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 24, 2026 17:51 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 24, 2026 17:51 IST

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