Sat Sep 12, 2026 | 08:43 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

हाई इंसुलिन शरीर के किन अंगों को नुकसान पहुंचाता है? जानें डॉक्‍टर से

हाई इंसुलिन केवल एक हार्मोनल समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के कई कई अंगों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है। जानें क‍िन अंगों को प्रभाव‍ित करता है हाई इंसुल‍िन?

आजकल खराब लाइफस्‍टाइल, अनहेल्‍दी खानपान, स्‍ट्रेस और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण कई लोग हाई इंसुलिन की समस्या से जूझ रहे हैं। शरीर में इंसुलिन का लेवल बढ़ना केवल डायबिटीज का संकेत नहीं होता, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत भी हो सकता है। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने का काम करता है, लेकिन जब शरीर में इंसुलिन जरूरत से ज्यादा बनने लगता है, तो इसे हाई इंसुलिन कहा जाता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। हाई इंसुलिन धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है और हार्ट डिजीज, फैटी लिवर, किडनी की परेशानी और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। हाई इंसुलिन शरीर के किन अंगों को नुकसान पहुंंचाता है यह जानने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

शरीर के कई अंगों को प्रभाव‍ित करता है हाई इंसुल‍िन

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Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि हाई इंसुलिन (Hyperinsulinemia) का असर शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है। यह शरीर में फैट जमा होने को बढ़ाता है, ब्लड वेसल्स के काम को प्रभावित करता है और मेटाबॉलिज्म बिगाड़ सकता है। इससे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। हाई इंसुलिन को कंट्रोल करने के लिए वजन कम करना, रिफाइंड कार्ब्स कम खाना, नियमित एक्सरसाइज करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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1. पैंक्रियाज पर पड़ता है असर

पैंक्रियाज वह अंग है, जो इंसुलिन बनाता है। जब शरीर में लगातार इंसुलिन की जरूरत बढ़ती है, तो पैंक्रियाज को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ज्‍यादा लोड होने के कारण इसकी कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है और आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है।

2. लिवर को हो सकता है नुकसान

हाई इंसुलिन का सबसे बड़ा असर लिवर पर देखा जाता है। शरीर में इंसुलिन ज्‍यादा होने पर लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। अगर समय रहते इस स्थिति को कंट्रोल न किया जाए, तो लिवर में सूजन और लिवर डैमेज का खतरा भी बढ़ सकता है।

3. हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है

हाई इंसुलिन ब्लड वेसल्स को भी प्रभावित कर सकता है। इससे शरीर में सूजन बढ़ती है और हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल लेवल बिगड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। ये सभी कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों की संभावना को बढ़ा सकते हैं।

4. किडनी पर पड़ सकता है दबाव

किडनी शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। हाई इंसुलिन के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर किडनी की फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डायबिटीज और हाई इंसुलिन दोनों ही किडनी डिजीज के बड़े कारण माने जाते हैं।

5. महिलाओं में हार्मोन्‍स प्रभाव‍ित हो सकते हैं

महिलाओं में हाई इंसुलिन का असर हार्मोनल हेल्थ पर भी दिखाई देता है। यह PMOS (PCOS) जैसी समस्या को बढ़ा सकता है। हाई इंसुलिन के कारण शरीर में एंड्रोजन हार्मोन बढ़ सकते हैं, जिससे अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल आना और एक्ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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हाई इंसुलिन को कंट्रोल करने के उपाय

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें।
  • डाइट में फाइबर और प्रोटीन शामिल करें।
  • मीठी चीजें और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने की कोशिश करें।
  • नियमित रूप से ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल की जांच कराएं।

न‍िष्‍कर्ष:

हाई इंसुलिन हार्मोन्‍स, क‍िडनी, हार्ट, ल‍िवर और पैंक्र‍ियाज जैसे अंंगोंं को प्रभाव‍ित कर सकता है। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करना जरूरी है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 25, 2026 18:59 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 25, 2026 18:59 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vidya Tickoo

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