रात को बिस्तर पर लेटकर देर तक मोबाइल फोन चलाना लोगों में होने वाली एक आम आदत है। सोशल मीडिया, वीडियो, चैटिंग या ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कई लोग कमरे की लाइट बंद रखते हैं और सिर्फ फोन की तेज रोशनी में स्क्रीन देखते हैं। हालांकि, कभी-कभार ऐसा करने से आंखों पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन अगर आप लंबे समय तक कमरे की लाइट बंद करके मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं तो इससे आंखों से जुड़ी कुछ समस्याएं हो सकती हैं। Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Ratan Jyoti Netralaya Ophthalmic Institute & Research Centre, Gwalior से जानते हैं कि अंधेरे कमरे में फोन का इस्तेमाल करने से आंखों पर क्या असर पड़ता है?
अंधेरे में फोन देखने पर आंखों में परेशानी क्यों होती है?
Dr. Purendra Bhasin बताते हैं कि जब कमरे में रोशनी बहुत कम होती है, तब आंखों की पुतलियां ज्यादा खुल जाती हैं। दूसरी ओर, फोन की स्क्रीन ज्यादा चमकदार होती है। ऐसे में आंखों को आस-पास के अंधेरे और स्क्रीन की चमक के बीच लगातार बदलाव के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है। समस्या सिर्फ स्क्रीन की रोशनी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए स्क्रीन देखते रहना भी है।
Dr. Purendra Bhasin आगे बताते हैं कि कम रोशनी वाले कमरे में लंबे समय तक तेज स्क्रीन देखने से आंखों पर प्रेशर बढ़ता है और असुविधा बढ़ सकती है। इसलिए, स्क्रीन की ब्राइटनेस को आसपास की रोशनी के हिसाब से रखना ज्यादा आरामदायक होता है। इस तरह की परेशानी को आमतौर पर डिजिटल आई स्ट्रेन के नाम से जाना जाता है।
साल 2018 में Applied Ergonomics में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, अंधेरे कमरे में स्मार्टफोन का लंबे समय तक इस्तेमाल सामान्य रोशनी की तुलना में आंखों पर ज्यादा दबाव डालता है, जिससे आंखों में जलन या चुभन, ड्राइनेस, धुंधलापन, फोकस करने में मुश्किल, थकान और तेज रोशनी से दिक्कत होने जैसी समस्याएं बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।
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अंधेरे में फोन इस्तेमाल करने से क्या समस्या होती है?
Dr. Purendra Bhasin बताते हैं कि लंबे समय तक फोन देखने पर व्यक्ति नॉर्मल से कम पलकें झपकाता है। इससे आंखों की नमी जल्दी कम हो सकती है और ड्राइनेस महसूस हो सकती है। इसके कारण कुछ लोगों को आंखों में जलन, चुभन, पानी आना या भारीपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
इसके अलावा, लगातार स्क्रीन देखने के बाद कुछ लोगों को अस्थायी रूप से धुंधला दिखाई देना या फोकस करने में परेशानी हो सकती है। सिरदर्द और आंखों के आस-पास भारीपन भी डिजिटल आई स्ट्रेन का संकेत हो सकते हैं। इसलिए, अगर स्क्रीन देखने के बाद आंखों में बार-बार जलन, सूखापन या धुंधलापन महसूस होता है तो इसे सिर्फ मोबाइल की ब्राइटनेस की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या अंधेरे में फोन देखने से नजर कमजोर हो जाती है?
Dr. Purendra ने बताया कि यह एक आम धारणा है कि अंधेरे कमरे में फोन देखने से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से कमजोर हो जाती है, लेकिन यह सही नहीं है। अंधेरे में मोबाइल देखने से आंखें तुरंत खराब नहीं होती हैं और न ही इससे अपने-आप आंखों का नंबर बढ़ता है।
हालांकि, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली आंखों की थकान सच में एक समस्या है। अगर किसी व्यक्ति को पहले से चश्मे का नंबर, ड्राई आई या आंखों से जुड़ी कोई दूसरी समस्या है तो लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं।

रात में फोन इस्तेमाल करते समय क्या करें?
Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, फोन को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं हो सकता है, लेकिन कुछ छोटी आदतों से आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम किया जा सकता है, जैसे:
- कमरे में पूरी तरह अंधेरा रखने के बजाय हल्की और आरामदायक लाइट रखें।
- फोन के स्क्रीन की ब्राइटनेस को कमरे की रोशनी के अनुसार कम या ज्यादा रखें।
- फोन को आंखों के बहुत पास रखकर देखने से बचें।
- लगातार लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बजाय बीच-बीच में आंखों को आराम दें।
- छोटे अक्षरों को पढ़ने के लिए स्क्रीन को आंखों के बहुत करीब लाने के बजाय टेक्स्ट साइज को बढ़ाएं।
- आंखों में ड्राइनेस महसूस हो तो स्क्रीन से ब्रेक लेना और बार-बार पलकें झपकाना फायदेमंद हो सकता है।
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कब आंखों की जांच जरूरी है?
अगर मोबाइल या कंप्यूटर इस्तेमाल करने के बाद कभी-कभार हल्की थकान होती है तो आमतौर पर आराम और स्क्रीन ब्रेक से राहत मिल सकती है। हालांकि, अगर आंखों में लगातार दर्द, रेडनेस, जलन, बार-बार धुंधला दिखाई देना, रोशनी से परेशानी या सिरदर्द जैसी समस्या बनी रहती है, तो आंखों की जांच करवानी चाहिए। दरअसल, लगातार रहने वाले लक्षणों का कारण सिर्फ स्क्रीन है यह जरूरी नहीं है। ड्राई आई या आंखों की दूसरी समस्या की जांच जरूरी हो सकती है।
निष्कर्ष
अंधेरे कमरे में कभी-कभार फोन देखने से आंखें स्थायी रूप से खराब नहीं होती हैं। हालांकि, लंबे समय तक तेज स्क्रीन को अंधेरे में देखते रहना आंखों में थकान, ड्राइनेस और असुविधा को बढ़ा सकता है। इसलिए, रात में कमरे में हल्की रोशनी रखना, स्क्रीन की ब्राइटनेस को सही रखना, फोन से थोड़ी दूरी रखना और नियमित रूप से स्क्रीन से ब्रेक लेना आंखों के लिए बेहतर हो सकते हैं।
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FAQ
रात को ज्यादा फोन चलाने से क्या होता है?
रात के समय ज्यादा फोन का इस्तेमाल करने से आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है, नींद खराब हो सकती है और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है।रात में मोबाइल कब तक चलाना चाहिए?
रात को सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल चलाना बंद कर देना चाहिए। अगर आप रात 10 बजे सोना चाहते हैं तो आपको 9 बजे तक अपना फोन खुद से दूर रख देना चाहिए।
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Sep 13, 2026 14:31 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin