तेज धूप में बाहर निकलते ही कई लोगों की आंखें अपने आप सिकुड़ जाती हैं। अचानक तेज रोशनी में जाने पर आंखों में चुभन या असहजता महसूस हो सकती है। इस दौरान अक्सर लोग अपनी आंखों को थोड़ा बंद कर लेते हैं। कई लोगों में यह एक आम प्रक्रिया है, जिसपर लोग ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में ये सवाल भी रहता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? इस बारे में ग्वालियर के रतन ज्योति नेत्रालय, नेत्रालय संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि तेज रोशनी में आंखों का अपने आप सिकुड़ना शरीर की एक नेचुरल प्रोटेक्टिव प्रतिक्रिया है। यह शरीर का तरीका है, जिससे वह ज्यादा रोशनी को नियंत्रित करता है और आंखों को आराम देने की कोशिश करता है।
तेज रोशनी में आंखें छोटी क्यों होती है?
डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, तेज रोशनी में आंखों का सिकुड़ना शरीर की एक नेचुरल प्रक्रिया है। जब बहुत ज्यादा रोशनी आंखों में जाती है, तो आंखों की पुतली यानी pupil छोटी हो जाती है, ताकि रेटिना तक पहुंचने वाली रोशनी की मात्रा कम की जा सके। इसके साथ ही हम अक्सर अनजाने में पलकें थोड़ी बंद कर लेते हैं या आंखें सिकोड़ लेते हैं। यह प्रतिक्रिया आंखों को ज्यादा रोशनी से होने वाली असहजता से बचाने में मदद करती है।
डॉ. पुरेंद्र आगे बताते हैं, आंख की पुतली का आकार शरीर का ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम नियंत्रित करता है। तेज रोशनी पड़ने पर आंख से मिलने वाला संकेत ब्रेन तक पहुंचता है और वहां से ऐसी प्रतिक्रिया होती है, जिससे पुतली सिकुड़ जाती है। कम रोशनी में इसके उल्ट पुतली फैलती है, ताकि ज्यादा से ज्यादा रोशनी आंख के अंदर पहुंच सके। यह बदलाव नॉर्मल परिस्थितियों में बहुत तेजी से होता है और हमें इसका एहसास भी नहीं होता है।
इसे भी पढ़ें: सुबह आंख खुलने के बाद कुछ सेकंड तक धुंधला क्यों दिखाई देता है? डॉक्टर से जानें
why do eyes squint on their own in bright light 1
साल 2003 में Journal of Optometry and Vision Science में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, आंखें सिकोड़कर देखने से (यानी पलकें थोड़ी बंद करके देखने से) आंखों से जुड़ी समस्या से पीड़ित लोगों को चीजें साफ दिखने में मदद मिलती है और ऊपर की दिशा से आने वाली तेज चमक (ग्लेयर) भी कम होती है, इस बात के वै
रिसर्च के अनुसार, पलकें सिकोड़ने से आंख में जाने वाली रोशनी का दायरा कम हो जाता है, जिससे एक 'पिनहोल प्रभाव' बनता है। इससे रेटिना पर बनने वाला फोकस बेहतर हो जाता है और धुंधलापन कम हो जाता है।
आंखें सिकोड़ने से क्या होता है?
डॉ. पुरेंद्र के अनुसार, आंखें सिकोड़ना सिर्फ रोशनी कम करने के लिए नहीं, बल्कि देखने को आरामदायक बनाने का भी एक तरीका है। जब हम तेज धूप या अचानक बहुत तेज रोशनी में आते हैं, तो आंखों में असहजता या चुभन महसूस हो सकती है। पलकें थोड़ी बंद करने से आंख में जाने करने वाली रोशनी कम होती है और आंखों को कुछ राहत मिलती है। इसी कारण तेज धूप में लोग नेचुरली आंखें छोटी करने लगते हैं।
कब तेज रोशनी से परेशानी नॉर्मल नहीं है?
डॉ. पुरेंद्र बताते हैं, अगर किसी व्यक्ति को पहले तेज रोशनी से कोई खास परेशानी नहीं होती थी, लेकिन अचानक रोशनी सहन करना मुश्किल होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर तब, जब इसके साथ आंखों में दर्द, रेडनेस, लगातार पानी आने या देखने में परेशानी जैसी शिकायतें भी हों।
कुछ लोगों की आंखें रोशनी के प्रति नॉर्मल से ज्यादा सेंसिटिव हो सकती हैं। इस स्थिति को फोटोफोबिया कहा जाता है। इसमें नॉर्मल रोशनी भी आंखों में चुभन, दर्द या काफी असहजता पैदा कर सकती है। तेज रोशनी के प्रति सेंसिटिविटी कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है। माइग्रेन, आंखों में ड्राईनेस या जलन, कुछ तरह के इंफेक्शन और आंखों से जुड़ी अन्य समस्याओं में रोशनी के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ सकती है।
इसे भी पढ़ें: आंखों की रोशनी बचानी है तो आज ही छोड़ दें ये 7 आदतें, डॉक्टर से समझें नुकसान
तेज धूप में आंखों की देखभाल कैसे करें?
डॉ. पुरेंद्र बताते हैं, तेज धूप में आंखों से जुड़ी समस्याओं से बचाव करने और आंखों को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। तेज धूप में अच्छी गुणवत्ता वाले UV-protection वाले सनग्लासेज आंखों को तेज यूवी किरणों से बचाने में फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, हर समय बहुत गहरे रंग के चश्मे पहनना जरूरी नहीं है। नॉर्मल परिस्थितियों में आंखें खुद भी अलग-अलग रोशनी के अनुसार ढलती रहती हैं।
डॉ. पुरेंद्र आगे कहते हैं, अगर धूप में आंखों को बार-बार परेशानी होती है, तो सिर्फ चश्मे पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारण पर भी ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक रहने वाली या बढ़ती हुई परेशानी में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
किन लक्षणों में डॉक्टर से जांच करानी चाहिए?
डॉ. पुरेंद्र बताते हैं, अगर तेज रोशनी में आंखें सिकोड़ने के साथ कोई अन्य परेशानी भी लगातार बनी रहे, तो आंखों की जांच कराना जरूरी हो सकता है। खासकर आंखों को सिकोड़ने के साथ दर्द, लगातार रेडनेस, ज्यादा पानी आने, धुंधला दिखाई देने, सिरदर्द या अचानक रोशनी के प्रति बहुत ज्यादा सेंसिटिव होने जैसे लक्षण अचानक शुरू हुए हों या तेजी से बढ़ रहे हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
तेज रोशनी में आंखों का सिकुड़ना आमतौर पर शरीर की एक नेचुरल प्रतिक्रिया है। पुतली का छोटा होना आंख में पहुंचने वाली रोशनी को नियंत्रित करता है, जबकि पलकें थोड़ी बंद होने से तेज रोशनी की असहजता कम हो सकती है। कम रोशनी में इसके उल्ट पुतली फैल जाती है ताकि ज्यादा रोशनी आंख के अंदर पहुंच सके। ऐसे में नॉर्मल परिस्थितियों में तेज रोशनी में आंखें सिकुड़ना चिंता की बात नहीं है। हालांकि, अगर इसके साथ दर्द, रेडनेस, धुंधला दिखना या अचानक बढ़ी हुई रोशनी से आंखों में सेंसिटिविटी हो, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। कराना जरूरी है।
All Images Credit- Freepik
FAQ
आंखों की रोशनी किन कारणों से कमजोर होती है?
आंखों की रोशनी गलत लाइफस्टाइल, स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल करने, पोषक तत्वों की कमी होने, नींद की कमी होने, उम्र बढ़ने और जेनेटिक्स के कारण हो सकती है।आंखें लाइट के प्रति सेंसिटिव क्यों होती है?
आंखों की नसों के कमजोर होने, इंफेक्शन, सूजन, ज्यादा स्क्रीन देखने, आंखों में थकान होने, सिरदर्द और माइग्रेन के कारण आंखें लाइट के प्रति सेंसिटिव होती हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 27, 2026 19:11 IST
Modified By : Priyanka Sharma Aug 27, 2026 19:11 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin
