मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को नींद न आने, रात के समय ज्यादा पसीना आने, हॉट फ्लैशेज, मूड में बदलाव होने, हड्डियों के कमजोर होने की समस्या हो सकती है, लेकिन कई बार महिलाओं में सवाल आता है कि मेनोपॉज से पहले ही नींद बिगड़ने की समस्या क्यों होने लगती है? ऐसे में इससे राहत के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है। आइए इस बारे में Dr. Lavanya Kiran, Director & Lead Consultant – Obstetrics, Gynecology, Robotics, Regenerative Medicine, Cosmetic Gynaecology & Fertility, KIMS Hospitals, Electronic City, Bengaluru से जानें।
मेनोपॉज से पहले नींद की गुणवत्ता क्यों खराब होने लगती है?
Dr. Lavanya Kiran के अनुसार, मेनोपॉज शुरू होने से कई साल पहले ही नींद से जुड़ी समस्याएं शुरू हो सकती हैं, जिसे पेरिमेनोपॉज (perimenopause) कहा जाता है। इसके कारण, महिलाओं की नींद अक्सर रात में खुल जाती है, उन्हें सोने में परेशानी होती है या फिर पर्याप्त समय तक सोने के बाद भी वे थका हुआ महसूस करती हैं। इन बदलावों का कारण महिलाओं के शरीर में हार्मोन का उतार-चढ़ाव हो सकता है। हालांकि, स्ट्रेस, लाइफस्टाइल और कोई अन्य बीमारी भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
हार्मोनल बदलाव नींद को कैसे प्रभावित करते हैं?
Dr. Lavanya का कहना है, पेरिमेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बदलाव आते हैं और ये धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। जहां प्रोजेस्टेरोन शरीर को शांत रखता है, वहीं एस्ट्रोजन शरीर के तापमान और मूड को नियंत्रित करने का काम करता है। इसलिए, इन हार्मोनल बदलावों के कारण व्यक्ति के सोने-जागने की साइकिल (sleep-wake cycle) पर असर पड़ता है, जिससे नींद से जुड़ी समस्याएं पैदा होती हैं।
नींद में खलल पड़ने का सबसे आम कारण हॉट फ्लैशेस (अचानक गर्मी महसूस होना) और पसीना आना है। शरीर में अचानक गर्मी महसूस होने के कारण, महिलाओं की नींद रात में कई बार खुल सकती है।
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महिलाओं की नींद बार-बार क्यों खुलती है?
Dr. Lavanya का कहना है, इसके लिए सिर्फ हार्मोनल बदलाव ही जिम्मेदार नहीं हैं। पेरिमेनोपॉज के दौरान होने वाली घबराहट (anxiety), चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव भी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ महिलाओं की नींद इसलिए भी खुल सकती है, क्योंकि उन्हें बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है, जोड़ों में दर्द होता है या सिरदर्द की समस्या होती है।
इसके अलावा, मध्यम आयु (middle age) के करीब पहुंचने पर महिलाओं में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (obstructive sleep apnea) जैसे स्लीप डिसऑर्डर होने की संभावना भी बढ़ सकती है। लगातार खर्राटे आना, सोते समय अचानक सांस अटकना या हमेशा सुस्ती महसूस होना, इन सबको तुरंत मेनोपॉज के लक्षण नहीं मान लेना चाहिए।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2019 में Sleep Medicine Clinics में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मेनोपॉज के करीब आने पर महिलाओं को नींद न आने या टूटने की समस्या बहुत होने लगती है, जिससे उनके रोजमर्रा के काम और सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसके मुख्य कारणों में हॉट फ्लैश (अचानक गर्मी लगना) और हार्मोनल बदलाव (जैसे एस्ट्रोजन का घटना और FSH का बढ़ना) शामिल हैं, साथ ही स्लीप एपनिया, तनाव, मूड बदलना या अन्य बीमारियां भी नींद खराब कर सकती हैं। चूंकि हर महिला की परेशानी के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए उनकी स्थिति के अनुसार सही और व्यक्तिगत इलाज चुनना बहुत जरूरी है।
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नींद को बेहतर कैसे बनाया जा सकता है?
Dr. Lavanya आगे कहती हैं, नींद को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है।
- अच्छी नींद के लिए सोने और जागने का समय निश्चित रखना जरूरी है।
- बेडरूम का तापमान ठंडा रखें।
- सोते समय आरामदायक कपड़े पहनें।
- कॉफी का सेवन सीमित रखें (खासकर सोने से पहले)।
- सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाने से बचें।
- सोने से पहले अल्कोहल पीने से भी बचें।
- नियमित एक्सरसाइज करने से लोगों को बेहतर नींद लेने में भी मदद मिलती है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
Dr. Lavanya का कहना है, अगर नींद से जुड़ी समस्याएं हफ्तों तक बनी रहती हैं, रोजमर्रा के कामों में रुकावट डालती हैं या दिन के समय बहुत ज्यादा थकान पैदा करती हैं, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर यह पता लगाएंगे कि क्या ये लक्षण पेरिमेनोपॉज (मेनोपॉज़ से पहले के समय) से जुड़े हार्मोनल बदलावों, थायरॉइड की बीमारियों, एंग्जायटी (चिंता) या स्लीप एप्निया जैसी किसी समस्या के कारण हैं।
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या की जड़ क्या है। कुछ मामलों में, अगर नींद की समस्या रात में होने वाले हॉट फ्लैशेस (अचानक गर्मी महसूस होना) और पसीने से जुड़ी है, तो हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी मददगार हो सकती है, बशर्ते इसके फायदे इसके खतरों से ज़्यादा हों। इसके अलावा, नॉन-हार्मोनल इलाज या मेनोपॉज से जुड़ी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (व्यवहार में बदलाव लाने वाली थेरेपी) भी फायदेमंद हो सकती है।
नींद न आना या खराब नींद को बढ़ती उम्र का एक सामान्य हिस्सा नहीं मानना चाहिए। अगर महिलाएं हार्मोन के स्तर और लाइफस्टाइल में होने वाले बदलावों को समझ लें, तो वे इन समस्याओं का असरदार समाधान ढूंढ सकती हैं और मेनोपॉज के दौरान अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती हैं।
निष्कर्ष
मेनोपॉज से पहले यानी पेरिमेनोपॉज के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का घटना), हॉट फ्लैशेस, एंग्जायटी और स्लीप एपनिया जैसी समस्याएं महिलाओं की नींद में रुकावट बनती हैं। इसे सिर्फ बढ़ती उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सोने-जागने का फिक्स समय रखकर, बेडरूम का तापमान ठंडा रखकर, कैफीन और अल्कोहल से दूरी बनाकर तथा नियमित एक्सरसाइज करके नींद की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे और रोज के कामकाज को प्रभावित करे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
मेनोपॉज के क्या लक्षण है?
मेनोपॉज की समस्या होने पर महिलाओं को पीरियड्स में बदलाव आने, हॉट फ्लैशेज, रात को पसीना आने, नींद की समस्या, मूड में बदलाव, वेजाइना में ड्राइनेस, याददाश्त या एकाग्रता में कमी, वजन बढ़ने, मेटाबॉलिज्म के स्लो होने, हड्डियों और जोड़ों में दर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।मेनोपॉज में क्या खाना चाहिए?
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को डाइट में कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन, फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड से युक्त दूध, दही, पनीर, दालें, चने, राजमा, अंडे, साबुत अनाज, ड्राई फ्रूट्स और सीड्स को डाइट में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, शरीर को हाइड्रेट रखने की कोशिश करनी चाहिए।
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Oct 29, 2026 22:06 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Lavanya Kiran
