Thu Oct 29, 2026 | 06:05 PM IST

Medically Reviewed by Dr Pankila Mittal , Obstetrician and Gynaecologist, Fertility & IVF Specialist, Laparoscopic Surgeon - Cloudnine, New Delhi

बच्चेदानी कमजोर होने के क्या लक्षण होते हैं? खुद डॉक्टर से जानें

महिलाओं में कई बार कंसीव करने से जुड़ी कई समस्याएं देखने को मिलती हैं, जिसमें से एक है बच्चेदानी का कमजोर होना। ऐसे में डॉक्टर से समझने हैं कि बच्चेदानी कमजोर होने से इसका संबंध और हम इसके लक्षणों की पहचान कैसे कर सकते हैं? 
बच्चेदानी कमजोर होने के क्या लक्षण होते हैं? खुद डॉक्टर से जानेंबच्चेदानी कमजोर होने के क्या लक्षण होते हैं? खुद डॉक्टर से जानें

महिलाओं में अक्सर बच्चेदानी कमजोर होने की समस्या देखी जाती है। इसकी वजह उनकी फर्टिलिटि और प्रेग्नेंसी काफी हद तक प्रभावित होती है। ज्यादातर महिलाओं को यह मालूम नहीं होता कि यह समस्या होती क्यों है, इसका कारण क्या और क्या हम इससे बच सकते हैं? ऐसे में विस्तार से जानकारी के लिए हमने Dr. Pankila Mittal, Senior Gynaecologist at Cloudnine Group of Hospitals, Punjabi Bagh, New Delhi से बात की। साथ ही जाना कि कमजोर बच्चेदानी का इलाज क्या है और बच्चेदानी मजबूत करने के लिए हमें क्या करना चाहिए।

बच्चेदानी कमजोर होने का मतलब क्या है?

Dr. Pankila Mittal कहती हैं कि बच्चेदानी कमजोर होने का मतलब है बच्चेदानी को मजबूती देने वाली मांसपेशियों की कमजोरी, मुख्य रूप से गर्भाशय (Uterus) की कमजोरी या गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) का कमजोर होना, जिसकी वजह से महिलाओं को कंसीव करने में बार-बार दिक्कत हो सकती है और अक्सर देखा जाता है कि कंसीव करने के बाद गर्भपात (Miscarriage) हो जाता है। इसके अलावा कुछ महिलाओं में यह गर्भाशय के नीचे खिसकने (Uterine Prolapse) का कारण बन सकती है।

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बच्चेदानी कमजोर होने से क्या होता है?

Dr. Pankila Mittal कहती हैं कि बच्चेदानी कमजोर होने से कई समस्याएं हो सकती हैं जैसे

  • पीरियड्स में अनियमितता
  • बार-बार मिसकैरेज होना
  • बच्चेदानी का खिसकर वजाइना (Vagina) की तरफ नीचे झुक जाना जिससे प्रेग्नेंसी में दिक्कत होती है
  • असामान्य डिस्चार्ज के साथ निचले पेट और कमर के हिस्से का प्रभावित रहना।

बच्चेदानी कमजोर होने के क्या कारण हैं?

बच्चेदानी कमजोर एक दिन में नहीं होता बल्कि, कई कारण हैं जो इस समस्या को पैदा करते हैं जैसे

  • सबसे पहला कारण है पेल्विक मांसपेशियों का ढीला होना जो कि बार-बार होने वाली प्रेग्नेंसी या वजाइनल डिलीवरी के कारण या बार-बार अबॉर्शन कराने की वजह से हो सकता है।
  • आजकल मोटापा भी इसकी वजह बन रही है। दरअसल, शरीर का अतिरिक्त वजन लगातार पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर दबाव डालता है जिससे ये कमजोर होने लगती हैं।
  • भारी वजन उठाने की वजह से जिससे अंदरूनी दबाव बढ़ता है जो बच्चेदानी को नीचे की ओर खींचता है।
  • हार्मोनल बदलाव की वजह से खासकर कि मेनोपॉज के आस-पास जाकर जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा घट जाती है, जिससे गर्भाशय को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
  • लगातार कब्ज की समस्या रहने से भी बच्चेदानी कमजोर हो जाती है क्योंकि हर बार शौच के समय ज्यादा जोर लगाने से गर्भाशय की पकड़ ढीली हो जाती है और बच्चेदानी कमजोर हो जाती है।

बच्चेदानी कमजोर होने के लक्षण क्या हैं?

Dr. Pankila Mittal कहती हैं कि बच्चेदानी कमजोर होने पर शरीर के निचले हिस्से में काफी दवाब महसूस हो सकता है और पीरियड्स से लेकर प्रेग्नेंसी तक तमाम चीजें मुश्किलों से भरा हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करें जैसे-

1. पीरियड्स के दौरान कमर और पेल्विस में लगातार दर्द

महिलाएं अक्सर इस चीज को नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन अगर आपको पीरिड्स के दौरान कमर दर्द हो रहा है या पेल्विस में लगातार दर्द रहता है तो आपकी बच्चेदानी कमजोर हो सकती है। दरअसल, जब बच्चेदानी कमजोर होती हैं तो पीरियड्स के दौरान इनकी मांसपेशियां ज्यादा प्रभावित होती हैं और इसका दर्द शरीर के निचने हिस्से को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा कुछ महिलाओं में इसकी वजह से पीरियड्स का समय पर न आना या बहुत ज्यादा या कम ब्लीडिंग होना जैसी समस्याएं देखी जाती हैं।

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2. पेल्विक एरिया में भारीपन महसूस करना

डॉ. मित्तल कहती हैं कि पेल्विक एरिया में लगातार भारीपन महसूस करना, खिंचाव रहना और भारी गैस जैसा महसूस करना बच्चेदानी कमजोर होने के लक्षण हो सकते हैं। इतना ही नहीं, बार-बार पेशाब आना, पेशाब लीक होना या कब्ज व शौच करने में परेशानी होना भी बच्चेदानी कमजोर होने के लक्षण हो सकते हैं।

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3. बार-बार मिसकैरेज होना

बार-बार मिसकैरेज होना बच्चेदानी कमजोर होने के लक्षण हो सकते हैं। दरअसल, जब बच्चेदानी की मांसपेशियां कमजोर होती हैं तो कमजोर यूट्रस में गर्भ ठहरने में परेशानी होती है जिससे बार-बार मिसकैरेज की दिक्कत हो सकती है। कई बार इसमें बच्चेदानी अपनी जगह से खिसककर योनि (Vagina) की तरफ नीचे झुक सकती है और कई बार बच्चेदानी का मुंह जल्दी खुल जाता है, जिससे प्रेग्ननेंसी के शुरुआत में ही बच्चा होने या बीच में ही मिसकैरेज की समस्या हो सकती है।

International Journal of Health Sciences and Research के अनुसार गर्भाशय का आगे खिसकना सबसे आम स्त्री रोग संबंधी बीमारियों में से एक है, लेकिन अक्सर यह छिपी रहती है और इसका इलाज नहीं किया जाता है। साथ ही भारत जैसे विकसित देशों में यह समस्या बहुत ज्यादा है।

4. संबंध के दौरान दर्द असुविधा महसूस करना

डॉ. मित्तल कहती हैं कि बच्चेदानी कमजोर होने से यौन संबंध बनाते समय असुविधा या दर्द महसूस हो सकती है। इसके अलावा व्हाइट डिस्चार्ज या बदबूदार डिस्चार्ज आने की समस्या भी बनी रह सकती है। साथ ही कुछ महिलाएं इश दौरान पीठ में तेज दर्द या लगातार हल्का दर्द महसूस कर सकती हैं।

कमजोर बच्चेदानी का इलाज क्या है?

डॉ. मित्तल कहती हैं कि बच्चेदानी की कमजोर चेक करने के लिए सबसे पहले तो डॉक्टर कुछ टेस्ट कर सकते हैं जैसे ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS) जिसमें योनि के रास्ते एक प्रोब डालकर बच्चेदानी, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब की तस्वीर ली जाती है। इससे बच्चेदानी की दीवार की मोटाई जांची जाती है। इसके अलावा एचएसजी टेस्ट (Hysterosalpingogram) जिसमें बच्चेदानी के अंदर एक खास तरह की डाई डालकर यह देखा जाता है कि बच्चेदानी की बनावट कैसी है और फैलोपियन ट्यूब खुली है या बंद। यह अक्सर बांझपन या बार-बार गर्भपात के कारणों का पता लगाने के लिए होती है।

कई जगहों पर हिस्टेरोस्कॉपी (Hysteroscopy) टेस्ट भी की जाती है जिसमें पतली दूरबीन को बच्चेदानी के अंदर डालकर सीधे देखा जाता है कि अंदर की परत कैसी है और कमजोर तो नहीं। इसके बाद डॉक्टर इलाज कर सकते हैं और इसके अनुसार कुछ दवा दे सकते हैं खाकर उन हार्मोन्स से जुड़ी जो बच्चेदानी को मजबूती देते हैं।

बच्चेदानी को मजबूत बनाने के लिए क्या करना चाहिए?

डॉ. मित्तल कहती हैं कि बच्चेदानी को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले तो डॉक्टर महिलाओं को कीगल एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। इसके अलावा शरीर में आयरन, कैल्शियम, विटामिन-डी और प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए कुछ सप्लीमेंट्स दे सकते हैं।

साथ ही आपको डाइट में बाहरी और प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से रोका जा सकता है और डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, फाइबर से भरपूर फल और काले चने, खजूर और गुड़ जैसी आयरन से भरपूर चीजों को खाने की सलाह दी जा सकती है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और फाइबर युक्त भोजन करें ताकि कब्ज न हो।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. मित्तल कहती हैं कि इस समस्या से बचने के लिए सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। जैसे ही आपके शरीर में इससे जुड़े कोई भी लक्षण नजर आए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि थोड़ी सी देरी भी आपकी समस्या को और बढ़ा सकती है, जिससे गंभीर दिक्कतें परेशान कर सकती हैं।

FAQ

  • बच्चेदानी का दर्द कहां होता है?

    बच्चेदानी का दर्द पेट के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया के पास होता है और कई बार आपको यह नाभि की जगह आस-पास भी महसूस हो सकता है।
  • क्या खाने से बच्चेदानी मजबूत होती है?

    हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और ड्राई फ्रूट्स लेने से बच्चेदानी को मजबूती मिलती है। साथ ही कोशिश करें कि डाइट में ज्यादा से ज्यादा फाइबर शामिल करें।

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 29, 2026 15:10 IST

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