बच्चेदानी में गांठ यानी रसौली की समस्या कई महिलाओं में देखी जाती है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों में बनने वाली गांठ होती है, जो सामान्यतः गैर-कैंसरकारी (Non-Cancerous) होती है। कुछ महिलाओं में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जबकि कुछ महिलाओं को अधिक रक्तस्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द, भारीपन, बार-बार पेशाब आने या गर्भधारण में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बच्चेदानी में गांठ का पता चलने पर महिलाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इसका ऑपरेशन कराना जरूरी है और आखिर किस साइज की गांठ या रसौली चिंता का कारण बन सकती है?
वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "बच्चेदानी में गांठ के इलाज का निर्णय केवल उसकी लंबाई-चौड़ाई देखकर नहीं लिया जाता, बल्कि उसकी लोकेशन, लक्षणों, बढ़ने की स्थिति और महिला की गर्भधारण संबंधी प्लानिंग को भी ध्यान में रखा जाता है।”
बच्चेदानी में गांठ का आकार कितना हो जाए तो ऑपरेशन जरूरी होता है?
Which Size Of Uterine Fibroid Needs Surgery
American Journal of Obstetrics & Gynecology के अनुसार, बच्चेदानी में गांठ के ऑपरेशन के लिए कोई एक निश्चित आकार तय नहीं है, जिसके बाद हर महिला को ऑपरेशन कराना ही पड़े। बच्चेदानी में छोटे आकार की गांठ भी यदि गर्भाशय की अंदरूनी परत के पास हो, तो अधिक मासिक रक्तस्राव या गर्भधारण में परेशानी पैदा कर सकती है। वहीं, बच्चेदानी में बड़े आकार की गांठ होने के बावजूद कुछ महिलाओं को लंबे समय तक किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ती।
डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "यदि बच्चेदानी में गांठ के कारण मासिक धर्म में हैवी ब्लीडिंग हो रही है, खून की कमी हो रही है, पेट या पेल्विक एरिया में लगातार दर्द रहता है अथवा आसपास के अंगों पर दबाव पड़ रहा है, तो उपचार पर विचार करना जरूरी हो जाता है। इसी तरह, अगर बच्चेदानी में गांठ गर्भाशय की बनावट को प्रभावित कर रही है और महिला गर्भधारण करना चाहती है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ इसके उपचार की सलाह दे सकते हैं।"
उदाहरण के लिए, लगभग 5 सेंटीमीटर या उससे बड़ी रसौली का मूल्यांकन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस आकार की गांठ का ऑपरेशन जरूरी है। निर्णय अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट, लक्षणों और महिला की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर लिया जाता है।
उपचार में नियमित निगरानी, दवाइयां या आवश्यकता के अनुसार शल्य चिकित्सा शामिल हो सकती है। यदि महिला भविष्य में गर्भधारण करना चाहती है, तो गर्भाशय को सुरक्षित रखने वाले विकल्पों पर भी चर्चा की जाती है।
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बच्चेदानी में गांठ होने पर सर्जरी कब जरूरी हो जाती है?
जैसा कि हमने पहले ही जिक्र किया है कि फाइब्रॉएड के आकार के आधार पर सर्जरी का फैसला नहीं लिया जाता है। कभी-कभी छोटे फाइब्रॉएड को भी निकालना पड़ सकता है, जबकि बड़े फाइब्रॉएड को सिर्फ देख-रेख की जरूरत होती है। आमतौर पर सर्जरी की सलाह तब दी जाती है, जब महिला को निम्न समस्याएं हों-
- हैवी ब्लीडिंग होना: फाइब्रॉएड होने पर पीरियड्स के दौरान भारी रक्तस्राव होने लगे तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। ब्लीडिंग इतनी ज्यादा होती है कि महिला को कई बार खून की कमी यानी एनीमिया तक हो जाता है।
- पेट में दबाव या दर्द होना: पेल्विक (पेट के निचले हिस्से) में लगातार दर्द, कमर दर्द, या ब्लैडर और आंतों पर लगातार दबाव महसूस होना भी सर्जरी की जरूरत की ओर इशारा करता है।
- प्रेग्नेंसी में परेशानी: अगर आपके बच्चेदानी की गांठ कंसीव करने में समस्या खड़ी कर रही है, तो इस ओर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। दरअसल, ऐसे फाइब्रॉएड, जो गर्भाशय के अंदरूनी हिस्से का आकार बिगाड़ देते हैं (सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड) या फैलोपियन ट्यूब को बंद कर देते हैं, जो गर्भधारण करने या प्रेग्नेंसी को आगे बनाए रखने में रुकावट पैदा कर सकता है।
- बच्चेदानी में गांठ का आकार लगातार बढ़ना: ऐसा फाइब्रॉएड जिसका आकार दो स्कैन (जांचों) के बीच बहुत तेजी से बढ़ रहा हो, तो इस स्थिति को भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।
क्या हमेशा बच्चेदानी में गांठ से गर्भधारण में भी परेशानी हो सकती है?
फाइब्रॉएड का गर्भधारण पर असर इस बात पर निर्भर करता है कि गांठ गर्भाशय में कहां स्थित है और उसकी वजह से गर्भाशय की अंदरूनी बनावट प्रभावित हो रही है या नहीं। गर्भाशय की अंदरूनी गुहा में उभरने वाली रसौली भ्रूण के प्रत्यारोपण (Implantation) में बाधा डाल सकती है। हालांकि, बच्चेदानी की सभी गांठें बांझपन का कारण नहीं होती और कई महिलाएं इनके मौजूद होने के बावजूद सफलतापूर्वक गर्भधारण करती हैं।
यदि महिला गर्भधारण की योजना बना रही है, बार-बार गर्भपात हो रहा है या गर्भधारण में कठिनाई आ रही है, तो फाइब्रॉएड की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन उपयोगी होता है। उपचार का निर्णय महिला की उम्र, प्रजनन संबंधी इतिहास और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
बच्चेदानी में गांठ होने पर कब जाएं डॉक्टर के पास?
American College of Obstetricians & Gynecologists के अनुसार फाइब्रॉएड होने पर निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं, जो कि चिंता का विषय हो सकते हैं-
- मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव
- लगातार पेट दर्द
- पेट के निचले हिस्से में भारीपन
- बार-बार पेशाब आना
- खून की कमी
डॉ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं, उपरोक्त बताए गए लक्षण नजर आने पर महिला को स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, अचानक तेज दर्द, पेशाब करने में असमर्थता या अत्यधिक रक्तस्राव होने पर भी तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
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निष्कर्ष
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "फाइब्रॉएड का पता चलने पर घबराने या तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लेने के बजाय उसकी सही स्थिति और शरीर पर उसके प्रभाव को समझना जरूरी है। समय पर जांच, नियमित निगरानी और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार उपचार से अनावश्यक सर्जरी से बचा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर सही समय पर उपचार भी सुनिश्चित किया जा सकता है।"
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FAQ
क्या मेनोपॉज के बाद रसौली का आकार अपने आप छोटा हो सकता है?
हां, मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से घटने के कारण फाइब्रॉएड स्वाभाविक रूप से सिकुड़ने लगते हैं।रसौली निकालने की सर्जरी को मेडिकल भाषा में क्या कहते हैं?
गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए केवल गांठ निकालने की प्रक्रिया को मायोमेक्टॉमी (Myomectomy) कहा जाता है।क्या कैफीन का अत्यधिक सेवन करने से फाइब्रॉएड बढ़ने का रिस्क रहता है?
अत्यधिक कैफीन का सेवन करने से हार्मोनल संतुलन और एस्ट्रोजन का स्तर प्रभावित होता है, जिससे गांठ के लक्षणों की तीव्रता बढ़ सकती है।
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Oct 26, 2026 16:58 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
