गर्भाशय में बनने वाली गांठ, जिसे फाइब्रॉएड कहा जाता है, महिलाओं में पाई जाने वाली आम समस्याओं में से एक है। यह आमतौर पर गैर-कैंसरकारी गांठ होती है और कई महिलाओं में बिना किसी विशेष परेशानी के भी मौजूद रह सकती है। लेकिन जब फाइब्रॉएड के कारण बहुत अधिक वजाइनल ब्लीडिंग, पेट या कमर में दर्द, दबाव, बार-बार पेशाब आना या गर्भधारण में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं, तो इसके उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल होता है कि अगर फाइब्रॉएड को सर्जरी के जरिए निकाल दिया जाए, तो क्या वह फिर से बन सकता है?
इस संबंध में वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "फाइब्रॉएड को हटाने के बाद उसी गांठ का दोबारा उसी जगह बनना जरूरी नहीं है, लेकिन भविष्य में नए फाइब्रॉएड बनने का जोखिम बना रहता है। इसलिए अगर कोई महिला सर्जरी के जरिए फाइब्रॉएड रिमूव करवा ले, इसके बाद भी यह समस्या जीवनभर के लिए खत्म हो गई, ऐसा नहीं कहा जा सकता है।"
क्या सर्जरी के बाद भी दोबारा हो सकता है फाइब्रॉएड?
can uterine fibroids come back after surgery
फाइब्रॉएड केवल एक गांठ नहीं, बल्कि गर्भाशय की मांसपेशियों से बनने वाली हार्मोन-संवेदनशील वृद्धि है। इसका विकास मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन से प्रभावित होता है। यदि किसी महिला में फाइब्रॉएड बनने की प्रवृत्ति बनी रहती है, तो पहले मौजूद गांठ को निकालने के बाद भी भविष्य में दूसरी गांठ विकसित हो सकती है।
साल 2023 में Reproductive Sciences पत्रिका में प्रकाशित एक नेरेटिव रिव्यू से पता चलता है, गर्भाशय को बचाते हुए की जाने वाली सर्जरी (जैसे लैप्रोस्कोपी, हिस्टेरोस्कोपी, लैपरोटॉमी) या रेडियोलॉजिकल तकनीकों (जैसे Uterine Artery Embolization, HIFU) के बावजूद, आनुवंशिक कारण से महिलाओं में फाइब्रॉएड दोबारा बनने का जोखिम बना रहता है। यही कारण है कि अगर सर्जरी के जरिए मौजूदा फाइब्रॉएड को हटाने के बाद भी उस कारण का अंत नहीं होता, जिसके कारण महिला में फाइब्रॉएड बनने की संभावना रहती है।
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क्या पुराना फाइब्रॉएड ही वापस आता है?
यह समझना महत्वपूर्ण है कि सर्जरी के बाद दिखाई देने वाली हर नई गांठ को पुराने फाइब्रॉएड का दोबारा बनना नहीं कहा जा सकता। कई बार उपचार के समय बहुत छोटे फाइब्रॉएड दिखाई नहीं देते और बाद में उनका आकार बढ़ने पर वे जांच में नजर आ सकते हैं। दूसरी स्थिति में उपचार के बाद वास्तव में नए फाइब्रॉएड विकसित हो सकते हैं। Current Radiology Reports पत्रिका में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल के अनुसार,फाइब्रॉएड के बढ़ने की दर हर महिला में बहुत अलग होती है। यह प्रति वर्ष 18 से 120% तक बढ़ सकती है। यही नहीं, महिलाओं में फाइब्रॉएड का आकार न केवल बढ़ सकते हैं, बल्कि समय के साथ अपने आप सिकुड़ भी सकते हैं।
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "महिला को यह समझना चाहिए कि फाइब्रॉएड निकालने के बाद दोबारा गांठ दिखाई देने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि पिछली सर्जरी सफल नहीं हुई थी। कई मामलों में यह एक नई गांठ हो सकती है।"
किन महिलाओं में दोबारा फाइब्रॉएड बनने की संभावना हो सकती है?
फाइब्रॉएड दोबारा बनने की संभावना हर महिला में समान नहीं होती। कम उम्र में फाइब्रॉएड का उपचार करवाने वाली महिलाओं में आगे कई वर्षों तक हार्मोनल प्रभाव बने रहते हैं। यदि पहले कई फाइब्रॉएड मौजूद रहे हों, तो भविष्य में नए फाइब्रॉएड बनने की संभावना भी अधिक हो सकती है।
हालांकि केवल उम्र या किसी एक कारण के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी महिला में फाइब्रॉएड दोबारा बनेगा या नहीं।
International Journal of Women's Health में प्रकाशित एक शोध पत्र से जानकारी मिलती है, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा फाइब्रॉएड हटाने के बाद उनके दोबारा होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे-
- गर्भाशय में 2 या उससे अधिक फाइब्रॉएड का होना
- फाइब्रॉएड का इंट्राम्यूरल (Intramural Fibroid) होना (गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार के अंदर स्थित होना)।
- सर्जरी से पहले रक्त में CRP (C-Reactive Protein) का स्तर 4.67 mg/L से बड़ा या बराबर होना।
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क्या फाइब्रॉएड हटाने के बाद नियमित जांच जरूरी है?
- यदि सर्जरी के बाद महिला को कोई परेशानी नहीं है, तब भी अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित स्त्री रोग संबंधी जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
- खासकर, यदि पहले फाइब्रॉएड कई थे या आकार में काफी बड़े थे।
- अगर दोबारा बहुत अधिक मासिक रक्तस्राव, लंबे समय तक चलने वाला मासिक धर्म, पेट के निचले हिस्से में भारीपन, दर्द, बार-बार पेशाब आना या पेट का आकार बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
- डॉ. शोभा गुप्ता के मुताबिक, "लक्षणों को केवल यह सोचकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि फाइब्रॉएड तो पहले ही निकल चुका है। नए लक्षण होने पर जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि उनका कारण क्या है।"
क्या हर दोबारा बने फाइब्रॉएड का इलाज जरूरी है?
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "यदि नया फाइब्रॉएड छोटा है और किसी तरह की परेशानी नहीं पैदा कर रहा, तो तुरंत उपचार की जरूरत नहीं हो सकती। चिकित्सक उसके आकार, स्थान, बढ़ने की गति और महिला के लक्षणों के आधार पर निगरानी की सलाह दे सकते हैं।"
डॉ. शोभा गुप्ता आगे कहती हैं, "यदि गांठ बड़ी हो, लगातार बढ़ रही हो या अत्यधिक रक्तस्राव, दर्द अथवा प्रजनन संबंधी समस्या पैदा कर रही हो, तो उपचार की आवश्यकता हो सकती है। उपचार का तरीका महिला की उम्र, स्वास्थ्य, भविष्य में गर्भधारण की इच्छा और फाइब्रॉएड की स्थिति पर निर्भर करता है।"
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निष्कर्ष
फाइब्रॉएड हटाने के बाद समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। नए फाइब्रॉएड भविष्य में विकसित हो सकते हैं, खासकर तब जब महिला में फाइब्रॉएड बनने की प्रवृत्ति बनी हुई हो। हालांकि, हर नई गांठ का उपचार जरूरी नहीं होता। लक्षण, गांठ का आकार और स्थान तथा महिला की प्रजनन संबंधी योजनाओं को ध्यान में रखकर आगे की रणनीति तय की जाती है। डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "फाइब्रॉएड का उपचार होने के बाद भी महिला को अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। दोबारा गांठ बनना संभव है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला को फिर से उपचार की जरूरत पड़ेगी। सही समय पर जांच और व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह सबसे महत्वपूर्ण है।"
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FAQ
क्या मेनोपॉज के बाद खतरा खत्म हो जाता है?
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम होने के कारण फाइब्रॉएड आमतौर पर छोटा होने लगता है। लेकिन मेनोपॉज के बाद यदि पहले से मौजूद गांठ तेजी से बढ़ती दिखाई दे या नया रक्तस्राव शुरू हो, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। ऐसे लक्षणों को केवल फाइब्रॉएड मान लेना उचित नहीं है।क्या लाइफस्टाइल, डाइट और वजन में बदलाव करके फाइब्रॉएड के दोबारा होने के जोखिम को कम किया जा सकता है?
फाइब्रॉएड एस्ट्रोजन हार्मोन से प्रभावित होते हैं। वजन संतुलित रखने, रेड मीट व प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करने और फाइबर युक्त डाइट लेने से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे नई गांठें बनने की जोखिम कम होता है।
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Sep 23, 2026 09:30 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
