Tue Sep 15, 2026 | 06:08 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या गर्भाशय में गांठ होने के बावजूद महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं? डॉक्टर से जानें कब बरतें सावधानी

गर्भाशय में गांठ होने के बावजूद महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं या नहीं, यह गांठ की लोकेशन, आकर और प्रकार पर निर्भर करता है। हालांकि, गर्भाशय में गांठ होने पर महिलाओं को निराश नहीं होना चाहिए। उन्हसे सही ट्रीटमेंट करवाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए। इससे कंसीव करने की संभावना बढ़ती है।

गर्भाशय में गांठ यानी फाइब्रॉएड का पता चलने पर कई महिलाओं के मन में सबसे पहला सवाल आता है कि क्या कभी वे मां बन पाएंगी? फाइब्रॉएड गर्भाशय में बनने वाली आमतौर पर गैर-कैंसरकारी गांठें होती हैं, जिसे अक्सर इंफर्टिलिटी यानी बांझपन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, फाइब्रॉएड होने का मतलब यह नहीं है कि महिला गर्भधारण नहीं कर सकती। कई महिलाएं फाइब्रॉएड होने के बावजूद स्वाभाविक रूप से गर्भवती होती हैं और स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि हर फाइब्रॉएड एक जैसा नहीं होता। उसका आकार, संख्या और गर्भाशय में उसकी स्थिति, गर्भधारण और गर्भावस्था को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकती है।

वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "फाइब्रॉएड का पता चलने पर घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि गांठ गर्भाशय में कहां स्थित है, उसका आकार कितना बड़ा है और क्या वह गर्भाशय की अंदरूनी जगह को प्रभावित कर रही है? इन्हीं बातों के आधार पर यह तय किया जाता है कि गर्भधारण पर उसका कितना असर पड़ सकता है।"

हर फाइब्रॉएड गर्भधारण में बाधा नहीं बनता

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UChicago Medicine के अनुसार, अधिकांश महिलाओं में गर्भाशय की गांठ होने के बावजूद वे बिना किसी समस्या के स्वाभाविक रूप से गर्भवती हो सकती हैं। असल में, ज्यादातर फाइब्रॉएड बांझपन (Infertility) का कारण नहीं बनते। दरअसल, कुछ फाइब्रॉएड गर्भाशय की बाहरी सतह की ओर होते हैं और उनका गर्भधारण पर बहुत कम या कोई सीधा असर नहीं पड़ता। वहीं, कुछ गांठें गर्भाशय की अंदरूनी परत की ओर बढ़ सकती हैं और गर्भाशय की उस जगह के आकार को बदल सकती हैं, जहां भ्रूण का विकास होता है।

डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "विशेष रूप से वे फाइब्रॉएड, जो गर्भाशय की अंदरूनी जगह (Uterine Cavity) को क्षतिग्रस्त करते हैं, गर्भधारण में परेशानी पैदा कर सकते हैं। इसलिए केवल गांठ मौजूद है या नहीं, यह जानना काफी नहीं है। उसकी स्थिति को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।"

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गर्भधारण से पहले कब जांच जरूरी है?

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अगर किसी महिला को फाइब्रॉएड के साथ लंबे समय से गर्भधारण में परेशानी हो रही है, बार-बार गर्भपात हुआ है या पहले से मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और तेज दर्द जैसी समस्याएं हों, तो गर्भधारण की योजना बनाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

आमतौर पर अल्ट्रासाउंड के माध्यम से फाइब्रॉएड के आकार और स्थिति का पता लगाया जाता है। कुछ मामलों में गर्भाशय की अंदरूनी संरचना को बेहतर ढंग से समझने के लिए अतिरिक्त जांच की सलाह भी दी जा सकती है।

क्या फाइब्रॉएड होने पर गर्भावस्था में परेशानी हो सकती है?

  • ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के BMJ Case Reports में प्रकाशित शोध के अनुसार, गर्भाशय में बड़ा सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड (Submucosal Fibroid) होने के बावजूद सही मेडिकल ट्रीटमेंट और सहायक उपचार के जरिए बिना सर्जरी के गर्भावस्था को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सकता है।
  • फाइब्रॉएड के साथ कई गर्भावस्थाएं सामान्य रहती हैं। फिर भी कुछ मामलों में गर्भावस्था के दौरान दर्द या अन्य समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है। फाइब्रॉएड का आकार और स्थान इस बात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि गर्भावस्था पर उसका कितना प्रभाव पड़ेगा।
  • डॉ. गुप्ता कहती हैं, "गर्भावस्था के दौरान हर फाइब्रॉएड का आकार बढ़ेगा या वह हर महिला में समस्या पैदा करेगा, यह जरूरी नहीं है, लेकिन जिन महिलाओं में फाइब्रॉएड बड़ा हो, संख्या अधिक हो या गांठ गर्भाशय के महत्वपूर्ण हिस्से को प्रभावित कर रही हो, उनमें गर्भावस्था की निगरानी अधिक सावधानी से किए जाने की जरूरत है।"
  • कुछ स्थितियों में गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द, समय से पहले प्रसव, भ्रूण की स्थिति में बदलाव या प्रसव से जुड़ी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि फाइब्रॉएड वाली हर महिला को ऐसी समस्याएं हों।

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फाइब्रॉएड के प्रकार और प्रेग्नेंसी पर असर

साल 2026 में International Journal of Gynecology & Obstetrics - IJGO में प्रकाशित वैज्ञानिक शोध और समीक्षा पत्र के अनुसार-

क्रम फाइब्रॉएड के प्रकार फाइब्रॉएड का असर
1. सबसेरोसल फाइब्रॉएड (Subserosal Fibroids) गर्भाशय के बाहरी हिस्से में होने वाले छोटे फाइब्रॉएड का फर्टिलिटी पर बहुत कम या कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
2. इंट्राम्यूरल फाइब्रॉएड (Intramural Fibroids) गर्भाशय की दीवार के भीतर मौजूद फाइब्रॉएड कंसीव करने और प्रेग्नेंसी के परिणामों को प्रभावित करते हैं।
3. सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड (Submucosal Fibroids) गर्भाशय के अंदरूनी हिस्से में बढ़ने वाले फाइब्रॉएड कंसीव करने की संभावना को काफी हद तक कम कर देते हैं और यह गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं को भी बढ़ा देते हैं।

क्या गर्भधारण से पहले फाइब्रॉएड का इलाज जरूरी है?

हर महिला को गर्भधारण से पहले फाइब्रॉएड निकलवाने की जरूरत नहीं होती। उपचार का फैसला गांठ के आकार, स्थान, संख्या, महिला की उम्र, गर्भधारण की योजना और उसके प्रजनन इतिहास को ध्यान में रखकर किया जाता है।

यदि फाइब्रॉएड गर्भाशय की अंदरूनी जगह को प्रभावित कर रहा है, बहुत बड़ा है या बार-बार गर्भधारण में बाधा बनने की आशंका है, तो डॉक्टर उसके उपचार या सर्जरी के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। वहीं, छोटे और ऐसे फाइब्रॉएड, जो कोई लक्षण या गर्भधारण में समस्या पैदा नहीं कर रहे हैं, उनमें केवल निगरानी पर्याप्त हो सकती है।

कब बरतें सावधानी?

यदि फाइब्रॉएड के साथ गर्भावस्था की पुष्टि हो चुकी है और तेज पेट दर्द, असामान्य रक्तस्राव, चक्कर या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और अल्ट्रासाउंड के माध्यम से मां और भ्रूण की स्थिति पर नजर रखी जा सकती है।

डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "फाइब्रॉएड होने का मतलब मातृत्व का सपना खत्म होना नहीं है। सही जांच और डॉक्टर की सलाह के साथ अधिकांश महिलाओं के लिए गर्भधारण संभव हो सकता है। जरूरी यह है कि हर महिला की स्थिति को अलग-अलग समझा जाए और केवल गांठ के नाम के आधार पर इलाज या गर्भधारण को लेकर फैसला न किया जाए।"

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निष्कर्ष

गर्भाशय में गांठ होने के बावजूद महिला गर्भवती हो सकती है। लेकिन फाइब्रॉएड का स्थान, आकार और संख्या गर्भधारण की संभावना और गर्भावस्था की देखभाल को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए गर्भधारण की योजना बना रही महिला को स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपनी स्थिति के अनुसार सही योजना बनानी चाहिए।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या फाइब्रॉएड की वजह से प्लेसेंटल एब्रप्शन का खतरा बढ़ सकता है?

    हां, अगर भ्रूण का इम्प्लांटेशन किसी फाइब्रॉएड गांठ के ठीक ऊपर या उसके बहुत पास होता है, तो इसकी वजह से प्लेसेंटा का विकास प्रभावित हो सकता है। इससे गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा के समय से पहले अलग होने का जोखिम बढ़ता है।
  • क्या गर्भावस्था के दौरान फाइब्रॉएड का आकार बढ़ सकता है?

    हां, प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने के कारण फाइब्रॉएड का आकार बड़ा हो सकता है।

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Disclaimer

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 15, 2026 16:47 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Sep 15, 2026 16:47 IST

    Published By : Meera Tagore
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