Tue Sep 15, 2026 | 03:47 PM IST

Medically Reviewed by Dr Priya Agarwal , Obstetrician and Gynaecologist - Cloudnine Hospital, New Delhi

लगातार 3 महीने तक पीरियड्स नहीं आए? प्रेग्नेंसी के अलावा हो सकती हैं ये 5 वजहें

अगर किसी महिला को 3 महीने तक पीरियड्स नहीं आते, तो इसे इग्नोर न करें। इसका कारण प्रेग्नेंसी के अलावा, थायराइड, PMOS या मोटापा हो सकता है। इसके सभी कारणों को डॉक्टर ने विस्तार से बताया है।

कई महिलाओं को पीरियड्स सामान्य आने के बाद कई बार तीन-तीन महीने तक पीरियड्स नहीं आते। आमतौर पर जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई कर रही होती है, उन्हें लगता है कि वे प्रेग्नेंट है और कुछ महिलाएं इसे सामान्य समझकर इग्नोर कर देती है। कुछ महिलाएं इसे PMOS मानकर नजरअंदाज कर देती है, लेकिन तीन महीने तक पीरियड्स न आने की समस्या को सामान्य समझना गलत है। इस बारे में Dr. Priya Agarwal, Senior Consultant Obstetrician, Gynecologist, and Laparoscopic Surgeon, Cloudnine Group of Hospitals, Delhi का कहना है कि तीन महीने तक पीरियड्स न होने को सेकेंडरी एमेनोरिया कहा जाता है।

तीन महीने तक पीरियड्स न होने के 5 कारण

Dr. Priya Agarwal कहती हैं, “महिलाओं को अगर लगातार तीन महीने तक पीरियड्स नहीं आ रहे और वह सेक्शुअली एक्टिव है, तो सबसे पहले उन्हे प्रेग्नेंसी चेक करनी चाहिए। कई बार प्रेग्नेंसी के लक्षण जैसे मतली, उल्टी या कमजोरी स्पष्ट नहीं होते, इसलिए महिलाएं घर पर ही प्रेग्नेंसी टेस्ट किट के जरिए चेक कर सकती हैं। अगर प्रेग्नेंसी नहीं है, तो इसकी दूसरी वजहों की जांच जरूरी हो सकती है।

1. स्ट्रेस या वजन में बदलाव

Dr. Priya Agarwal ने बताया कि अगर महिला को पिछले कुछ महीनों से बहुत ज्यादा स्ट्रेस हुआ है या अचानक वजन कम या बढ़ा है, तो भी पीरियड्स के साइकिल पर असर पड़ सकता है। कई बार महिलाएं वजन कम करने के लिए कैलोरी बहुत कम लेती हैं या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करती हैं, तो इसका प्रभाव रिप्रोडक्टिव हार्मोन पर पड़ सकता है। इससे ओव्यूलेशन में बदलाव आने की वजह से पीरियड्स कुछ समय के लिए बंद हो सकते हैं। अगर किसी महिला ने डाइट या एक्सरसाइज के अलावा स्ट्रेस में रही है, तो उसे डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।

2. PMOS होना

Dr. Priya Agarwal का कहना है, “कुछ मामलों में महिलाओं को PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) हो सकता है। इस कंडीशन में महिलाओं का ओव्यूलेशन रेगुलर नहीं हो पाता। इस वजह से पीरियड्स में काफी लंबा गैप आ जाता है। PMOS के कारण महिलाओं के चेहरे पर बाल आना, वजन बढ़ना या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके साथ यह भी ध्यान रखें कि PMOS को डायग्नोज करना बहुत जरूरी है, इसलिए खुद ही लक्षणों के आधार पर पीरियड्स न आने को PMOS कारण न मानें।”

3. थायराइड

Dr. Priya Agarwal के अनुसार, जिन महिलाओं को थायराइड की समस्या है, उनके पीरियड्स में देरी हो सकती है। कई महिलाओं को पीरियड्स लंबे समय तक नहीं आ सकते, इसलिए अगर किसी महिला को वजन में बदलाव, ज्यादा थकान, ठंड या गर्मी ज्यादा लगना, बाल झड़ना या मूड में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से थायराइड का चेकअप कराएं। इसके लिए TSH टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।

causes of three month periods not happening

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4. प्रोलैक्टिन बढ़ना

Dr. Priya Agarwal कहती हैं, “प्रोलैक्टिन हार्मोन जो ब्रेस्टफीडिंग के दौरान दूध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग में यह हार्मोन बढ़ा रहता है, लेकिन अगर इसके अलावा भी प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ा है, तो ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है और इससे पीरियड्स रुक सकते हैं। अगर कोई महिला दवा ले रही है या कोई मेडिकल कंडीशन हो, तो प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ सकता है। अगर किसी महिला को पीरियड्स न आने के साथ ब्रेस्ट से दूध जैसा डिस्चार्ज हो रहा है, सिरदर्द या देखने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।”

5. पेरिमेनोपॉज होना

Dr. Priya Agarwal के मुताबिक, अगर महिला की उम्र 45 या उससे ज्यादा है, तो पेरिमेनोपॉज हो सकता है। इस दौरान पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव देखा जा सकता है। पेरिमेनोपॉज में पीरियड्स कभी जल्दी तो कभी देर से आ सकते हैं। कई बार पीरियड्स के बीच काफी लंबा गैप भी हो सकता है। हालांकि, इस कंडीशन में भी महिला को डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि सही कारणों का पता चल सके।

जर्नल्स क्या कहते हैं?

Cleveland Clinic के मुताबिक, एमेनोरिया होने के सबसे आम कारण प्रेग्नेंसी, ब्रेस्टफीडिंग, मेनोपॉज या यूटरस की सर्जरी हो सकते हैं।

  • जो महिलाएं गर्भनिरोधक दवाएं ले रही हैं, उन्हें पीरियड्स में देरी हो सकती हैं।
  • कई महिलाओं को स्ट्रेस, डाइट सही तरीके से न लेने, अचानक वजन कम या ज्यादा होने और मुश्किल वर्कआउट करने से भी पीरियड्स में देरी हो सकती है।
  • कुछ महिलाओं में 40 साल की उम्र से पहले ओवरीज एग बनाना बंद कर देती हैं।
  • PMOS और थायराइड भी पीरियड्स में देरी के कारण बन सकते हैं।

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3 महीने तक पीरियड्स न आने पर कौन से चेकअप हो सकते हैं?

Dr. Priya Agarwal ने कहा कि अगर किसी महिला को लगातार तीन महीने तक पीरियड्स नहीं होते, तो डॉक्टर पीरियड्स की हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेती हैं और जरूरत के अनुसार ये टेस्ट कराने की सलाह दे सकती हैं।

  • प्रेग्नेंसी टेस्ट या बीटा- hCG
  • टीएसएच (TSH) और थायराइड टेस्ट
  • प्रोक्लेक्टिन टेस्ट
  • FSH और रिप्रोडेक्टिव हार्मोन टेस्ट
  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड

डॉक्टर की सलाह

Dr. Priya Agarwal सलाह देती हैं कि अगर किसी महिला को लंबे समय तक पीरियड्स नहीं आ रहे, तो खुद से हार्मोनल दवाई न लें। ऐसा करने पर कई बार महिलाओं को हैवी ब्लीडिंग या ब्लीडिंग न रुकने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर किसी बीमारी की संभावना है, तो उसकी सही तरीके से जांच होना जरूरी है, ताकि बीमारी का इलाज किया जा सके। बार-बार पीरियड्स की दवा लेने से बीमारी गंभीर रूप से शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

निष्कर्ष
अगर किसी महिला को पहले रेगुलर पीरियड्स थे, लेकिन अचानक तीन महीने तक पीरियड्स न आने की परेशानी हो रही है, तो जबरदस्ती पीरियड्स लाने की दवा खुद से न लें। पीरियड्स न आने के अलावा, अगर महिला को चेहरे पर बाल आने, चक्कर, बेहोशी, सिरदर्द, ब्रेस्ट में बदलाव या निप्पल्स से डिस्चार्ज हो रहा हो, तो डॉक्टर की सलाह लें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या बर्थ कंट्रोल पिल्स बंद करने से भी लंबे समय तक पीरियड्स रुक सकते हैं?

    इसे पोस्ट-पिल एमेनोरिया कहते हैं। गर्भनिरोधक गोलियां बंद करने के बाद शरीर को अपना प्राकृतिक हार्मोनल चक्र वापस पाने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है।
  • क्या ईटिंग डिसऑर्डर की वजह से पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं?

    भोजन कम करने या बहुत तेजी से वजन घटाने पर शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है और प्रोडेक्टिव सिस्टम कुछ समय के लिए बंद कर देता है। हालांकि, सही पोषण और स्वस्थ वजन के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू हो जाते हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 15, 2026 14:07 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Priya Agarwal

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