महिलाओं ने यह नोटिस किया होगा कि पीरियड्स से ठीक पहले (PMS) उन्हें कई तरह की शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। इनमें से एक ब्रेस्ट पेन भी है। अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर PMS में ब्रेस्ट पेन की समस्या क्यों होती है? असल में इसके पीछे पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोन जिम्मेदार होते हैं। आइए, वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं इससे संबंधित बड़ी वजहों के बारे में।
PMS में ब्रेस्ट पेन के कारण
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हार्मोनल बदलाव
इसका जिक्र हमने लेख के शुरुआत में भी किया है कि PMS में ब्रेस्ट पेन होने का सबसे आम कारण है, हार्मोनल बदलाव। American Academy of Family Physicians से भी इस बात की पुष्टि होती है कि पीरियड्स के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से स्तन में दर्द, भारीपन और चुभन का एहसास हो सकता है। इसके पीछे मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में बदलाव को जिम्मेदार माना जाता है।
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ल्यूटियल फेज में दर्द का बढ़ना
मेंस्ट्रुअल साइकिल में ल्यूटियल फेज ओव्यूलेशन (अंडा निकलने) के बाद और अगले पीरियड्स शुरू होने से पहले के समय को कहा जाता है। इस चरण में भी महिलाओं को ब्रेस्ट में दर्द का एहसास होता है। सवाल है, ऐसा क्यों होता है? इस बारे में डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं कि मेंस्ट्रुअल साइकिल के ल्यूटियल फेज में प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ता है तथा एस्ट्रोजन का स्तर घटता-बढ़ता है, तो स्तनों का दर्द बढ़ सकता है। यही नहीं, इस वजह से लिम्फ नोड्स में सूजन भी आ सकती है।
प्रोलैक्टिन हार्मोन का असर
डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "कई स्तनपान करा रही महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट में दर्द होता है। ऐसा प्रोलैक्टिन हार्मोन के स्तर में बढ़ोतरी के कारण होता है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि प्रोलैक्टिन हार्मोन ब्रेस्ट टिश्यूज की सेंसिटिविटी और सूजन को बढ़ा देता है। वैसे तो यह हार्मोन प्रसव के बाद दूध बनाने का काम करता है, लेकिन इसकी वजह से स्तन में भारीपन, दर्द और सूजन जैसी समस्या हो जाती है। यही कारण है कि स्तनपान करा रही महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट पेन की दिक्कत हो सकती है।"
ओव्यूलेशन के दौरान
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "पीरियड्स शुरू होने से लगभग 12 से 14 दिन पहले जब ओवरी से अंडा रिलीज होता है, उस समय भी स्तनों में दर्द हो सकता है। डाॅ. शोभा गुप्ता की मानें, तो ओव्यूलेशन से पहले और उस दौरान जैसे-जैसे एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, यह स्तनों मिल्क डक्ट्स को फैलाने और खींचने का काम करता है। वहीं, ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे मिल्क ग्लैंड्स (दूध ग्रंथियों) में सूजन पैदा हो जाती है। इन दोनों सक्रिय हार्मोनों के कारण स्तन में दर्द, संवेदनशील, भारीपन महसूस होने लगता है।"
वाॅटर रिटेंशन की समस्या
पीरियड्स के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के मिले-जुले प्रभाव के कारण ब्रेस्ट टिश्यूज में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे स्तन संवेदनशील, भारी और दर्दभरे महसूस होने लगते हैं। इस संबंध में डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "पीरियड्स से ठीक पहले का समय शरीर को कंसीव करने के लिए तैयार करता है। इसी वजह से इस दौरान बढ़े हुए हार्मोन स्तनों में ब्लड वेसल्स को चौड़ा कर देते हैं, जिससे वाॅटर रिटेंशन भी बढ़ जाता है। नतीजतन, स्तन में दर्द का एहसास होने लगता है।"
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पीरियड्स में ब्रेस्ट पेन हो तो क्या करें?
| क्रम | क्या करें? | फायदे |
| 1. | सपोर्टिव ब्रा पहनें |
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| 2. | सिकाई करें |
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| 3. | नमक का सेवन कम करें |
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| 4. | पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं |
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| 5. | हल्की एक्सरसाइज करें |
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कब जाएं डॉक्टर के पास?
अगर आप उन महिलाओं में से हैं, जिन्हें पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट पेन होता है, तो आपको यह पता होना चाहिए कि इस संबंध में डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए? एक्सपर्ट बताते हैं-
- पीरियड्स में ब्रेस्ट पेन हो और गांठ भी महसूस हो।
- निप्पल से तरल पदार्थ निकलने पर।
- पीरियड्स के दौरान ब्रेस्ट पेन शुरू हो और कई सप्ताह तक बना रहे।
- ब्रेस्ट पेन के कारण रोजमर्रा के कामकाज करने में दिक्कतें महसूस होने पर।
- ब्रेस्ट पेन के साथ-साथ बुखार और अन्य शारीरिक समस्या होने पर।
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निष्कर्ष
पीरियड्स के दौरान शुरू हुआ दर्द कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। हां, कुछ महिलाओं का दर्द कम या ज्यादा हो सकता है। सामान्यतः इस तरह के दर्द को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। हां, अगर दर्द तीव्र है, रोजमर्रा के कामकाज को बाधित कर रहा है, तो इसे हल्के में न लें। आप शरीर में नजर आ रहे अन्य लक्षणों पर गौर करें, जैसे बुखार आना, निप्पल से डिस्चार्ज निकलना आदि। ये संकेत बताते हैं कि आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।
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FAQ
PMS के दौरान स्तनों में होने वाले दर्द (Cyclic) और गैर-पीएमएस (Non-cyclic) स्तन दर्द में क्या अंतर है?
PMS का दर्द हमेशा दोनों स्तनों में पीरियड्स से 7-10 दिन पहले होता है और पीरियड्स आते ही अपने आप ठीक हो जाता है। इसके उलट, नॉन-साइक्लिक दर्द स्तन के किसी खास हिस्से में लगातार बना रह सकता है और इसका हार्मोन से नहीं होता है।क्या कैफीन का अधिक सेवन करने से PMS के ब्रेस्ट पेन को बढ़ा सकता है?
कैफीन में मिथाइलजैथिन (Methylxanthines) नाम का तत्व होता है, जो स्तनों की रक्त वाहिकाओं को फैला सकता है और ब्रेस्ट टिश्यू की संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है। संभव हो, तो पीरियड्स से एक सप्ताह पहले चाय, कॉफी का सेवन कम कर देना चाहिए।
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Sep 07, 2026 14:16 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
