PCOS हार्मोन से जुड़ी समस्या है। PCOS के साथ-साथ महिला को इनफर्टिलिटी यानी बांझपन का भी सामना करना पड़ता है। यहां यह सवाल जरूर मन में उठता है कि आखिर PCOS फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करता है और PCOS से पीड़ित महिलाएं कंसीव करने के लिए क्या कर सकती हैं? इस लेख में दिए गए सभी वैज्ञानिक तथ्यों को खुद डॉ. शोभा गुप्ता ने रिव्यू किया है। इसके साथ-साथ PCOS से पीड़ित महिलाएं यहां दी गई उनकी गाइडेंस को भी कंसीव करने के लिए फॉलो कर सकती हैं।
PCOS फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करता है?

PCOS सीधे तौर पर ओव्यूलेशन (अंडे का रिलीज होना) की प्रक्रिया को बाधित करता है। इसका मतलब है कि PCOS का महिला की प्रजनन दर और फर्टिलिटी पर गहरा असर पड़ता है-
- एनोव्यूलेशन: 2020 में Current Opinion in Endocrine and Metabolic Research में प्रकाशित एक रिव्यूके अनुसार PCOS वाली महिलाओं में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जो अंडों के विकास और उनके समय पर रिलीज होने में बाधा डालता है। जब अंडा रिलीज नहीं होता, तो गर्भधारण संभव नहीं होता।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस: Journal of Medicine and Life के अनुसार PCOS वाली ज्यादातर महिलाओं में शरीर इंसुलिन का उपयोग सही तरह से नहीं कर पाता है। नतीजतन, ब्लड में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है, जो ओवरी को अधिक टेस्टोस्टेरोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है। यही नहीं, इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से एग्स की क्वालिटी भी प्रभावित होती है।
- हार्मोनल असंतुलन: PCOS हार्मोन से जुड़ी गंभीर समस्या है। PCOS होने की वजह से महिला में LH का स्तर बढ़ जाता है और FSH का कम स्तर फॉलिकल्स को पूरी तरह परिपक्व नहीं होने देता यानी LH और FSH का अनुपात (Ratio) बिगड़ जाता है। डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "FSH वह हार्मोन है, जो अंडे को बड़ा करता है, जबकि एलएच वह हार्मोन है, जो अंडे को ओव्यूलेट करता है। आमतौर पर स्वस्थ महिला में इन दोनों हार्मोन का स्तर संतुलित होता है, लेकिन PCOS में इनके बीच असंतुलन हो जाता है, जिससे फॉलिकल्स कभी पूरी तरह मैच्योर नहीं हो पाते हैं और ओवरी में छोटे-छोटे दाने (सिस्ट) बनने लगते हैं।"
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PCOS में फर्टिलिटी को कैसे सुधारें?
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PCOS में फर्टिलिटी सुधारने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हार्मोन को संतुलित रखना और ओव्यूलेशन को नियमित करना है। इन्हें मैनेज करने के लिए यहां बताए गए कुछ टिप्स को आप अपना सकते हैं, जैसे-
इंसुलिन को नियंत्रित करें
PCOS में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है, जो कि ओवरी को ज्यादा पुरुष हार्मोन बनाने के लिए मजबूर करता है। इसे आप सही डाइट से कंट्रोल कर सकते हैं। डाइट में सफेद चावल और चीनी की जगह ओट्स, दलिया और दालों को शामिल करें। इसके अलावा, सिर्फ कार्ब्स न खाएं। इसके साथ-साथ प्रोटीन के लिए पनीर, अंडा, दाल लें और हेल्दी फैट भी खाएं।
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कम से कम 5 प्रतिशत वजन कम करें
The BMJ (British Medical Journal) के अनुसार, अगर किसी महिला का वजन अधिक है, तो उन्हें कुल वजन का केवल 5 प्रतिशत कम करना भी उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे हार्मोन संतुलन में आने लगते हैं और ओव्यूलेशन की संभावना बढ़ जाती है, जिससे फर्टिलिटी में सुधार होता है। लेकिन अगर किसी महिला को Lean PCOS, यानी पतले होने के बावजूद PCOS की समस्या है, तो उसे वजन घटाने की जरूरत नहीं है।
एक्सरसाइज जरूर करें
2023 में BMC Public Health में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है कि PCOS में फर्टिलिटी को सुधारने के लिए महिलाओं को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करनी चाहिए। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसके अलावा, वॉकिंग या योग करना भी PCOS के लक्षणों में सुधार करने के लिए जाना जाता है।
सप्लीमेंट्स लें
PCOS की महिलाएं कुछ सप्लीमेंट्स की मदद से भी अपने हार्मोन को संतुलित कर सकती हैं और फर्टिलिटी की समस्या से राहत पा सकती हैं। जैसे फोलिक एसिड कंसीव करने की योजना बनाने से 3 महीने पहले शुरू कर देनी चाहिए। इससे अंडे की क्वालिटी में भी सुधार होता है। 2022 में Current Opinion In Endocrinology Diabetes And Obesity में प्रकाशित स्टडी के अनुसार विटामिन बी और फोलिक एसिड महिलाओं की फर्टिलिटी में सुधार कर सकते हैं। लेकिन कोई भी सप्लीमेंट बिना डॉक्टर के सलाह के खुद से न लें। डॉक्टर आपको सही सप्लीमेंट और उसकी सही डोज बताएंगे।
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PCOS में गर्भधारण की कितनी संभावना है?
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PCOS में प्रजनन क्षमता में सुधार के बाद गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, विभिन्न तरीकों पर गर्भधारण की संभावना दर तय होती है, जैसे-
केवल जीवनशैली में बदलाव पर
अगर कोई महिला PCOS का ट्रीटमेंट करवा रही है, लेकिन गर्भधारण के लिए कोई ट्रीटमेंट नहीं ले रही हैं। ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर ऐसी महिलाओं में कंसीव करने की संभावना कितनी होती है? The Lancet Diabetes & Endocrinology के अनुसार सामान्य सा वजन कम करने से भी महिलाओं में नेचुरल तरीके से ओव्यूलेशन वापस आ जाता है। ओव्यूलेशन नॉर्मल होने पर गर्भधारण की संभावना लगभग सामान्य महिलाओं के बराबर हो जाती है।
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ओव्यूलेशन की दवाओं के साथ
कई बार ऐसा होता है कि PCOS में सिर्फ जीवनशैली में बदलाव करने से कंसीव करने की संभावना नहीं बढ़ पाती है। ऐसे में डॉक्टर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट करते हैं। इसके लिए मरीज को ओव्यूलेशन इंडक्शन की दवाएं दी जाती हैं। इससे 60 से 80 प्रतिशत महिलाओं में ओव्यूलेशन शुरू हो जाता है। The New England Journal of Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार ओव्यूलेट करने वाली महिलाओं में से लगभग 20 से 25 प्रतिशत पहले कुछ महीनों में ही गर्भवती हो जाती हैं। 6 महीनों के भीतर यह दर 40 से 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
आईवीएफ के साथ
जब लगभग सभी तरीके असफल हो जाते हैं, तो ऐसे में महिलाएं आईवीएफ का विकल्प चुनती हैं। यह न सिर्फ एक बेहतरीन विकल्प है, बल्कि इसकी मदद से महिलाओं में गर्भधारण करने की संभावना भी बढ़ जाती है। PCOS से ग्रस्त महिलाओं के लिए यह संभावना और अधिक होती है, क्योंकि उनके पास अंडों की संख्या एग रिजर्व ज्यादा होती है, जिससे डॉक्टर को अच्छे भ्रूण बनाने के ज्यादा मौके मिलते हैं। हालांकि इस बात को इंकार नहीं किया जा सकता है कि PCOS में OHSS (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) का खतरा भी ज्यादा होता है। डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "OHSS IVF जैसे प्रजनन उपचार के दौरान उपयोग की जाने वाली इंजेक्टेबल हार्मोनल दवाओं के प्रति शरीर की एक अति-प्रतिक्रिया को कहा जाता है। इसमें अंडाशय में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द होने लगता है। कुछ गंभीर मामलों में, रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ रिसकर पेट या छाती के क्षेत्र में जमा हो सकता है, जिससे वेट गेन, सांस लेने में कठिनाई या पेट में तेज सूजन जैसे लक्षण पैदा होते हैं।" बहरहाल, महिला की जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आईवीएफ सफलता के दर में कमी आती रहती है। जैसे 35 से 37 साल की उम्र में यह 38-40 प्रतिशत रह जाती है, और 38 से 40 साल की उम्र में घटकर 24-26 फीसदी तक हो जाती है।
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PCOS में गर्भपात का रिस्क कितना होता है?
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पकस में मिसकैरिज का रिस्क काफी ज्यादा होता है। Frontiers in Endocrinology में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार PCOS से पीड़ित महिलाओं में गर्भपात का खतरा स्वास्थ्य महिलाओं की तुलना में 20 से 50 प्रतिशत अधिक होता है। इसके मुख्य कारणों की बात करें, तो इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस, हार्मोनल असंतुलन जैसे एंड्रोजन का बढ़ना और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी होना शामिल हैं। हालांकि, डॉक्टर की सही सलाह, हेल्दी जीवनशैली और हार्मोनल संतुलन की मदद से PCOS में गर्भपात का रिस्क कम किया जा सकता है। इसके अलावा, PCOS होने पर High-risk pregnancy के चलते डॉक्टर या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट के संपर्क में रहना चाहिए ताकि समय-समय पर हार्मोन लेवल की जांच हो सके और प्रेग्नेंसी सही हो।
PCOS में प्रेग्नेंट होने के लिए क्या करें?
PCOS में प्रेग्नेंट होने के लिए महिलाएं डॉ शोभा गुप्ता द्वारा बताए गए टिप्स को फॉलो कर सकती हैं-
- लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करें, जैसे अपने कुल वजन का 5 से 10 फीसदी कम करें।
- लो-ग्लाइसेमिक डाइट फॉलो करें। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस में मदद मिलती है।
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी, ओमेगा 3 सप्लीमेंट्स लें।
- अपने ओव्यूलेशन को नियमित रूप से ट्रैक करें। इसके लिए, ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट लें।
PCOS में गर्भधारण करने के लिए डॉक्टर के पास कब जाएं?
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PCOS में गर्भधारण करने के लिए डॉक्टर की सलाह बहुत जरूरी होती है। गर्भधारण करने के लिए PCOS से ग्रस्त महिलाओं को निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए-
- गर्भधारण की कोशिश शुरू करने से 3-6 महीने पहले ही डॉक्टर से मिलें। इस दौरान वे इंसुलिन रेजिस्टेंस, थायराइड और विटामिन स्तर की जांच कर सकते हैं। जरूरी हुआ, तो वे महिला के मेटाबॉलिक हेल्थ को सुधारने पर जोर देंगे, ताकि गर्भपात का जोखिम कम हो।
- अगर पीरियड्स बहुत अनियमित हैं यानी साल में 8 बार से कम आते हैं या चक्र 35 दिनों से अधिक लंबा है। अनियमित पीरियड्स का मतलब है कि ओव्यूलेशन नहीं होना। ऐसे में गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है।
- 6 महीने की असफल कोशिश के बावजूद कंसीव करने में दिक्कत आए, तो डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। विशेषकर, जिस महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा है, उन्हें इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। अगर आपकी उम्र 35 से कम है, तो आपको कम से कम 12 महीने तक ट्राई करने और असफल रहने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
- अगर किसी भी तरह की शारीरिक समस्याएं हों, जैसे वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल उगना। इससे पता चलता है कि शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बहुत अधिक है, जो ओव्यूलेशन को रोक रहा है।
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निष्कर्ष
PCOS जैसी समस्या होने पर फर्टिलिटी पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, जो PCOS से ग्रस्त जो महिलाएं कंसीव करना चाहती हैं, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर डॉक्टर की मदद लेने से आप मानसिक तनाव से बच सकती हैं और सफलता की संभावना को बढ़ा सकती हैं।
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FAQ
क्या केवल 2-3 किलो वजन कम करने से वाकई PCOS के मरीजों में फर्टिलिटी में फर्क पड़ता है?
हां, ऐसा है। अलग-अलग शोध बताते हैं कि अपने कुल वजन का मात्र 5 प्रतिशत कम करने से पॉजिटिव हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं और ओवरी एग रिलीज करने लगती हैं।PCOS में ओव्यूलेशन सुधारने के लिए बेस्ट एक्सरसाइज कौन सी है?
PCOS में ओव्यूलेशन सुधारने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और योग करना बेहतर माना जाता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों को इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद करती है, जिससे हार्मोन संतुलित होते हैं। योग करने से रिप्रोडक्टिव ऑर्गन में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।क्या नींद की कमी भी PCOS में प्रेग्नेंट होने की संभावना को कम कर रही है?
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए अच्छी और गहरी नींद लेना बहुत जरूरी है। नींद का सीधा संबंध मेलाटोनिन हार्मोन से है, जो अंडों की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार है। रात में 7-8 घंटे की गहरी नींद न लेने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जो ओव्यूलेशन को रोक सकता है।क्या PCOS में तनाव सच में ओव्यूलेशन को रोक सकता है?
हां, PCOS में तनाव लेना सही नहीं है, इससे ओव्यूलेशन बाधित होता है। इस स्थिति को स्ट्रेस-इंड्यूस्ड एनोव्यूलेशन कहते हैं। जब कोई महिला बहुत ज्यादा तनाव में होती हैं, तो शरीर ओव्यूलेशन जैसी प्रक्रिया को रोक देता है। तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन आदि करें।
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Current Version
Apr 17, 2026 16:57 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 17, 2026 16:57 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta