Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

PCOS के इलाज के बाद प्रेग्नेंसी की कितनी संभावना होती है? जानें डॉक्टर से

PCOS ट्रीटमेंट के बाद गर्भधारण की संभावना स्वस्थ महिलाओं की तुलना में थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन सही इलाज से इसे काफी हद तक सुधारा जा सकता है। आइए, इस लेख में जानते हैं कि PCOS के बाद गर्भधारण की संभावना कितनी होती है।

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PCOS हार्मोनल समस्या है। इसकी वजह से महिलाओं की प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाती है और वे कंसीव नहीं कर पाती हैं। यही कारण है कि PCOS का नाम सुनते ही अक्सर महिलाएं अपनी प्रजनन क्षमता को लेकर चिंतित हो जाती हैं कि अब वे कभी मां नहीं बन पाएंगी। हालांकि, मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि PCOS का सही तरह से ट्रीटमेंट करवाने के बाद भी कंसीव किया जा सकता है। यहां यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर PCOS ट्रीटमेंट के बाद कंसीव करने की संभावना दर कितनी होती है? अगर आप उन महिलाओं में से हैं, जो इस बारे में जानना चाहती हैं, तो इस लेख को नजरअंदाज न करें। यहां बताए गए सभी तथ्य और जानकारी की पुष्टि खुद डॉ. शोभा गुप्ता ने की है।

PCOS के इलाज के बाद प्रेग्नेंसी के उपाय

Chances of Pregnancy After PCOS Treatment 01 (14)

PCOS ट्रीटमेंट के बाद स्वस्थ गर्भधारण की संभावना सही दवा और अच्छी जीवनशैली अपनाकर बढ़ जाती है। Cureus Journal Of Medical Science के अनुसार सही ट्रीटमेंट और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करके गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। शोध से पता चलता है कि लेट्रोजोल या गोनाडोट्रोपिन जैसी मेडिसिन की मदद से सफलता दर को बढ़ाया जा सकता है। वहीं, अगर आईवीएफ और आईयूआई जैसे ट्रीटमेंट को भी शामिल किया जाए, तो कंसीव करने की संभावना और भी बढ़ जाती है। हालांकि, PCOS से ग्रस्त महिलाओं को सही ट्रीटमेंट के साथ-साथ अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव भी करने चाहिए, जैसे वजन संतुलित रखना, सही डाइट लेना और अच्छी नींद लेना।

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PCOS के कारण गर्भधारण की संभावना कम क्यों होती है?

Chances of Pregnancy After PCOS Treatment 02 (4)

NHS के अनुसार PCOS में गर्भधारण की संभावना कम होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि PCOS एक हार्मोनल समस्या है। इसकी वजह से महिलाओं के शरीर में मेल हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर बढ़ जाता है और फीमेल हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जो उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर गर्भधारण में समस्या पैदा कर सकता है। ध्यान रखें कि हर मेंस्ट्रुअल साइकिल में ओवरी से एग रिलीज होते हैं, जो कि फैलोपियन ट्यूब से होते हुए यूट्रस में जाते हैं। वहीं PCOS के कारण यह प्रक्रिया नहीं हो पाती है, जिससे महिलाओं के लिए कंसीव करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। PCOS से पीड़ित महिलाओं में ओव्यूलेशन (अंडा निकलना) नहीं होता या बहुत कम होता है। इसका मतलब है कि उन्हें नियमित रूप से पीरियड्स नहीं होते हैं। ऐसे में उनके लिए गर्भधारण करना कठिन हो जाता है।

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PCOS में कंसीव करने से क्या परेशानियां हो सकती हैं?

ऐसा नहीं है कि PCOS में कंसीव नहीं किया जा सकता है। जैसा कि हमने शुरू में भी इस बात की पुष्टि की है कि सही ट्रीटमेंट की मदद से करीब 48 प्रतिशत तक गर्भधारण की संभावना दर को बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, PCOS में कंसीव करने पर कुछ जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे-

  • गर्भपातः Sage Journals के अनुसार PCOS की वजह से गर्भपात का रिस्क बढ़ जाता है। विशेषकर, पहली तिमाही में ऐसा होने का जोखिम अधिक होता है।
  • जेस्टेशनल डायबिटीजः इसी जर्नल में यह भी बताया गया है कि PCOS की वजह से गर्भावस्था के दौरान शुगर लेवल बढ़ने का खतरा 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि PCOS से ग्रस्त महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज का रिस्क स्वस्थ महिलाओं की तुलना में अधिक होता है।
  • हाइपरटेंशन और प्री-एक्लेम्पसिया: 2019 में Journal Of Pregnancy में प्रकाशित स्टडी के अनुसार प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और प्री-एक्लेम्पसिया का जोखिम अधिक होता है। असल में PCOS की वजह से मोटापा हो सकता है। मोटापा हाइपरटेंशन और प्री-एक्लेम्पसिया का मुख्य कारण बन सकता है।
  • समय से पहले प्रसवः सही ट्रीटमेंट और हेल्दी जीवनशैली की मदद से महिलाएं हेल्दी प्रेग्नेंसी कंसीव कर सकती हैं। इसके बावजूद, बच्चे का जन्म समय से पहले होने का रिस्क अधिक होता है। 2022 में Int J Environ Res Public Health में प्रकाशित स्टडी के अनुसार अगर महिलाओं को किसी न किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, हाई बीपी है, तो समय पूर्व प्रसव का जोखिम अपने आप बढ़ जाता है। ऐसे में महिलाओं का सिजेरियन का खतरा भी बढ़ सकता है।

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PCOS में ओव्यूलेशन कैसे ट्रैक करें?

सेहतमंद महिला के लिए ओव्यूलेशन पीरियड को ट्रैक करना आसान होता है, PCOS में ऐसा किया जाना मुश्किल होता है। PCOS के साथ गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए ओव्यूलेशन के समय को समझना बेहद जरूरी है। चूंकि इस स्थिति में पीरियड्स अनियमित होते हैं, इसलिए ओव्यूलेशन प्रेडिक्टर किट के जरिए यह जाना जा सकता है कि गर्भधारण के लिए कौन सा समय सही है।

IUI vs IVF: PCOS में कब-कौन सा चुनें?

How to prepare for your first IUI cycle 01 (7)

PCOS के मामलों में IUI और IVF के बीच क्या चुनना है, ये कई तरह के फैक्टर्स पर निर्भर करता है। जैसे, उम्र , ट्यूब्स की पोजीशन और महिला विशेष की मेडिकल हिस्ट्री पर तय करता है। इसके अलावा, IUI एक सरल और कम खर्चीली प्रक्रिया है, जिसे अक्सर उन महिलाओं के लिए पहले विकल्प के रूप में चुना जाता है जिनकी उम्र 30-32 साल से कम होती है और जिनकी कम से कम एक फैलोपियन ट्यूब खुली होती है और ओव्यूलेशन दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। इससे अलग, IVF की बात करें तो यह अधिक जटिल प्रक्रिया है। हालांकि इसमें सफलता दर ज्यादा है। आमतौर पर 35 से अधिक उम्र की महिलाओं, जिनमे ट्यूबल ब्लॉकेज है या जिन कपल्स के करीब 3 से 6 IUI प्रोसेस फेल हो चुके हैं, वे IVF करवा सकती हैं।

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PCOS में IVF vs IUI: क्या है बेहतर?

फीचर IUI IVF
प्रक्रिया सरल और ओपीडी (OPD) आधारित जटिल और सर्जरी (Egg retrieval) शामिल
सफलता दर 10% - 15% प्रति साइकिल 50% - 70% (उम्र के अनुसार)
खर्च काफी सस्ता महंगा
समय कम समय लगता है पूरा प्रोसेस 4-6 हफ्ते ले सकता है

गर्भपात के बाद PCOS में दोबारा कंसीव करने के लिए क्या करें?

PCOS के साथ मिसकैरेज का जोखिम बना रहता है। हालांकि, यह शारीरिक और भावनात्मक दोनों रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही मैनेजमेंट के साथ PCOS होने पर भी महिलाएं दोबारा कंसीव कर सकती हैं। इसके लिए यहां बताए गए टिप्स अपना सकती हैं-

  • गर्भपात के तुरंत बाद कंसीव करने पर जोर न दें। शरीर को रिकवरी का समय दें। दोबारा कोशिश करने से पहले 1 से 3 रेगुलर पीरियड्स का इंतजार करें। इससे गर्भाशय (Uterus) की परत को ठीक होने और हार्मोनल लेवल को वापस ट्रैक पर आने का समय मिलता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने की कोशिश करें। PCOS में मिसकैरेज का एक बड़ा कारण इंसुलिन लेवल का बढ़ना होता है।
  • डाइट का पूरा ध्यान रखें, जैसे चीनी, मैदा और सफेद चावल से बचें। लौ ग्लाइसेमिक डाइट जैसे साबुत अनाज, दालें और हरी सब्जियां खाएं।
  • ओव्यूलेशन ट्रैक करें। सामान्यतः PCOS में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है।
  • वजन और लाइफस्टाइल को संतुलित रखें। शरीर के वजन का केवल 5 फीसदी कम करना भी ओव्यूलेशन को रेगुलर कर सकता है।
  • ज्यादा तनाव लेने से बचें। तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो प्रेगनेंसी में बाधा डाल सकता है।
  • नियमनित रूप से मेडिकल चेकअप करवाएं। इसमें Progesterone Level, Thyroid (TSH), Uterine Scan करवाएं। इससे गर्भाशय में कोई गांठ (fibroids) या अन्य समस्या का पता चलता है।

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कब जाएं डॉक्टर के पास

Chances of Pregnancy After PCOS Treatment 03

CDC के अनुसार, अगर कोई महिला PCOS ट्रीटमेंट करवाने के बावजूद कंसीव नहीं कर पा रही है, तो उन्हें इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। हालांकि, उन्हें 6-12 महीनों तक नेचुरली कंसीव करने की कोशिश करनी चाहिए। हां, अगर किसी महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा है और PCOS ट्रीटमेंट के बावजूद कंसीव नहीं कर पा रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर अपना ट्रीटमेंट करवाना चाहिए। जितनी जल्दी आप डॉक्टर के पास जाएंगे, उतनी जल्दी ओव्यूलेशन मैनेजमेंट और हार्मोनल लेवल को संतुलित करने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

इसमें कोई दो राय नहीं है कि PCOS एक गंभीर समस्या है और इसकी वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो जाते हैं। इसकी वजह से महिलाओं का ओव्यूलेशन पीरियड प्रभावित होता है, जिससे कंसीव करने में मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए महिलाओं को अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाना चाहिए और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने होंगे। साथ ही वजन को संतुलित बनाए रखना भी अहम होता है। विशेषकर, अगर किसी महिला को पहले से ही डायबिटीज या कोई अन्य गंभीर बीमारी है, तो उन्हें इस संबंध में जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या पीसीओडी होने पर गर्भवती होना संभव है?

    पीसीओडी होने के बावजूद गर्भधारण करना पूरी तरह संभव है। हालांकि, इसमें समय लग सकता है और कई बार ट्रीटमेंट भी काफी लंबा चलता है। इसके साथ-साथ महिला को अपनी जीवनशैली में बदलाव, सही खानपान और रेगुलर एक्सरसाइज करना पड़ता है ताकि कंसीव करने में मदद मिल सके।
  • जल्दी गर्भ ठहरने के लिए क्या करना चाहिए?

    Mayo Clinic की मानें तो अगर कोई स्वस्थ महिला कंसीव करना चाहती है, तो उन्हें अपने ओव्यूलेशन पीरियड को ट्रैक करना चाहिए। जानकारी के लिए बता दें कि पीरियड्स के 11वें-17वें दिन के दौरान यौन संबंध बनाने से जल्दी कंसीव किया जा सकता है।
  • पीसीओडी को जड़ से खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए?

    डॉक्टर शोभा गुप्ता बताती हैं, “पीसीओडी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे रिवर्स या मैनेज करके स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। इसके लिए जीवनशैली में सुधार करना, स्वस्थ और संतुलित आहार लेना और रोजाना 30-45 मिनट व्यायाम या योग करना और 5-10 फीसदी वजन कम करने पर जोर देना चाहिए।”
  • प्रेग्नेंट होने का सबसे ज्यादा चांस कब होता है?

    प्रेग्नेंट होने की सबसे ज्यादा संभावना ओव्यूलेशन के दौरान होती है। इसका मतलब है कि पीरियड्स के 10वें से 18वें दिन के बीच यानी 28-दिन के चक्र में।
  • क्या PCOS में गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का खतरा रहता है?

    PCOS से पीड़ित महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि PCOS शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। यही कारण है कि कंसीव करने के बाद डॉक्टर समय-समय पर ब्लड शुगर लेवल की जांच करते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 15, 2026 18:56 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 15, 2026 18:56 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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