इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रेग्नेंसी में महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में आयरन लेना चाहिए। आयरन एक बहुत जरूरी पोषक तत्व है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में खून की मात्रा में 50 फीसदी की वृद्धि को पूरा करने, भ्रूण और प्लेसेंटा को ऑक्सीजन सप्लाई करने और एनीमिया यानी खून की कमी को रोकने के लिए आयरन बहुत जरूरी तत्व है। यही नहीं, पर्याप्त आयरन की मदद से गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क का विकास बेहतर होता है। वहीं, अगर किसी गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो प्री-टर्म बर्थ, जन्म के समय शिशु का वजन कम होने और प्रसवोत्तर थकान का खतरा बढ़ जाता है। बहरहाल, यहां यह एक सवाल उठता है कि प्रेग्नेंसी के किस चरण में महिलाओं को सबसे ज्यादा आयरन की जरूरत होती है? इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता से बात की है। अगर आप भी इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें।
किस तिमाही में महिलाओं को सबसे ज्यादा आयरन लेना चाहिए?
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जैसा कि इसका जिक्र लेख के शुरू में ही किया गया है कि गर्भावस्था के हर चरण में महिलाओं को आयरन की जरूरत होती है। यह शिशु के विकास के लिए भी आवश्यक पोषक तत्व है। जहां तक सवाल इस बात का है कि किस तिमाही में महिलाओं को सबसे ज्यादा आयरन लेना चाहिए? इस बारे में डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "महिलाओं को तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा आयरन लेने की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाओं को सामान्य महिलाओं की तुलना में लगभग 50% अधिक आयरन की आवश्यकता होती है (सामान्यतः 18 mg से बढ़कर 27 mg प्रति दिन)। इससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर होता है और प्लेसेंट को भी पूरा सपोर्ट मिलता है। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमही में अधिक ब्लड वॉल्यूम की जरूरत होती है, जो आयरन की मदद से पूरा हो सकता है।" एनसीबीआई की भी एक रिपोर्ट यह कहती है कि पहली और दूसरी तिमाही की तुलना में महिलाओं को आखिरी तिमाही में सबसे ज्यादा आयरन की जरूरत होती है। विशेषकर, आखिरी 6-8 सप्ताहों में सामान्य आहार के अतिरिक्त 10 मिलीग्राम (mg) प्रतिदिन आयरन की खुराक लेने की आवश्यकता होती है।
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आखिरी तिमाही में आयरन लेने के फायदे
- एनीमिया के जोखिम में कमीः आखिरी तिमाही का मतलब होता है कि डिलीवरी कभी भी हो सकती है। अगर डिलीवरी के दौरान महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिग हो जाती है या गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में आयरन की कमी होती है, तो महिला को एनीमिया हो सकता है। इससे महिला अक्सर थकान और कमजोरी से घिर जाती है। गर्भ में पल रहे शिशु के लिए यह सही नहीं है।
- डिलीवरी की तैयारीः प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में पर्याप्त मात्रा में आयरन लेने से शरीर डिलीवरी के लिए तैयार होता है। वैसे भी नॉर्मल डिलीवरी हो या सिजेरियन डिलीवरी। दोनों ही स्थिति में महिला के शरीर से काफी ब्लड बहता है। ऐसे में आयरन लेने से शरीर में ब्लड वॉल्यूम बढ़ता है, जो बाद में रिकवरी में भी मदद करता है।
- शिशु के वजन पर असरः प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में पर्याप्त मात्रा में आयरन लेने से न सिर्फ शिशु का मानसिक विकास बेहतर होता है, बल्कि जन्म के समय उसका वजन भी सही रहता है। यहां तक कि प्री-टर्म डिलीवरी का जोखिम भी कम हो जाता है।
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निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में आयरन लेना चाहिए। आयरन के लिए मछली, अंडा, हरी सब्जियां, दालें और सूखे मेवों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। ध्यान रखें कि पर्याप्त आयरन न सिर्फ महिला को स्वस्थ रखता है, शरीर में ब्लड फ्लो कम नही होने देता है, बल्कि इसका बहुत अच्छा असर शिशु के विकास पर भी पड़ता है। उसकी मेंटल हेल्थ सही रहती है और इम्यूनिटी पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलता है।
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FAQ
पहली तिमाही में आयरन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है?
आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को तीसरी तिमाही में सबसे ज्यादा आयरन की जरूरत होती है। पहली तिमाही में तब तक आयरन सप्लीमेंट्स नहीं दिए जाते हैं, जब तक कि डॉक्टर द्वारा ब्लड टेस्ट में आयरन का स्तर कम न पाया गया हो।कैसे पता चलेगा कि आयरन की कमी है?
आयरन की कमी होने पर अत्यधिक थकान, कमजोरी, त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना, चक्कर आना, सिरदर्द, हाथ-पैर ठंडे पड़ना जैसे कई लक्षण नजर आ सकते हैं।प्रेग्नेंट महिला का हीमोग्लोबिन कितना होना चाहिए?
गर्भावस्था की हर तिमाही में हीमोग्लोबिन का स्तर अलग-अलग होता है। पहली और तीसरी तिमाही में 11 g/dL या उससे अधिक और दूसरी तिमाही में 10.5 g/dL या उससे अधिक होना चाहिए। आमतौर पर यह 10.5 से 13 g/dL के बीच होना चाहिए। अगर इससे कम है तो महिला को एनीमिया हो सकता है।
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Mar 16, 2026 10:46 IST
Modified By : Anurag Gupta Mar 16, 2026 10:46 IST
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Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta