Wed Sep 30, 2026 | 09:39 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

फाइब्रॉएड का साइज छोटा होने पर भी क्यों होता है तेज दर्द? जानें डॉक्टर से इसके कारण

फाइब्रॉएड का साइज छोटा हो या बड़ा, दोनों ही स्थिति में महिला को तीव्र दर्द हो सकता है। इसके पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हैं, जैसे उसकी लोकेशन। इस संबंध में विस्तार से जानने के लिए लेख को पूरा जरूर पढ़ें।
फाइब्रॉएड का साइज छोटा होने पर भी क्यों होता है तेज दर्द? जानें डॉक्टर से इसके कारणफाइब्रॉएड का साइज छोटा होने पर भी क्यों होता है तेज दर्द? जानें डॉक्टर से इसके कारण

फाइब्रॉएड मांसपेशियों और कनेक्टिव टिश्यू से बनी ऐसी गांठे होती हैं जो गैर-कैंसरी होती हैं। अक्सर महिलाओं को लगता है कि फाइब्रॉएड के आकार के आधार पर उन्हें दर्द कम या ज्यादा हो सकता है। असल बात यह है कि फाइब्रॉएड का आकार अकेले दर्द का कारण नहीं होता है। फाइब्रॉएड कहां है, इसकी लोकेशन क्या है और यह शरीर में किस तरह की प्रतिक्रिया कर रहा है? इस तरह के तमाम कारकों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि फाइब्रॉएड में दर्द होगा या नहीं?

छोटे आकार के फाइब्रॉएड में दर्द होता है या नहीं?

Why Does Small Fibroid Causes Severe PainWhy Does Small Fibroid Causes Severe Pain

Institute for Quality and Efficiency in Health Care द्वारा अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के NCBI Bookshelf प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित शोध पत्र से पता चलता है, गर्भाशय के फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids) बहुत आम और गैर-कैंसरी (Non-cancerous) ट्यूमर होते हैं, जो अधिकतर महिलाओं को जीवन में कभी न कभी प्रभावित करते हैं। फाइब्रॉएड का आकार, संख्या और उसकी लोकेशन यह तय करती है कि वे कितने गंभीर लक्षण पैदा करेंगे। छोटे फाइब्रॉएड भी यदि गर्भाशय की अंदरूनी परत के पास हों, तो न सिर्फ हैवी ब्लीडिंग हो सकती है, बल्कि तीव्र दर्द भी हो सकता है।

वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "फाइब्रॉएड का आकार छोटा होने के बावजूद तीव्र दर्द हो सकता है। इसके आकार के आधार पर दर्द कम या ज्यादा नहीं होता है। इसलिए, महिलाओं को यह पता होना चाहिए कि फाइब्रॉएड की असली लोकेशन क्या है और वह कितना बड़ा है। इसके अलावा, फाइब्रॉएड होने की स्थिति में इसे इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए। इसका प्रॉपर ट्रीटमेंट जरूरी होता है।"

छोटे आकार के फाइब्रॉएड में तीव्र दर्द क्यों होता है?

लोकेशन है महत्वपूर्ण

डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "अगर फाइब्रॉएड गर्भाशय के अंदरूनी परत के ठीक नीचे पनपते हैं (सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड), वे गर्भाशय को पीरियड्स के दौरान खुद को बाहर निकालने के लिए जोर-जोर से सिकुड़ने पर मजबूर करते हैं। यही कारण है कि आकार में छोटे होने के बावजूद इस तरह के फाइब्रॉएड तेज दर्द और ऐंठ का कारण बनते हैं। यहां तक कि इस लोकेशन में फाइब्रॉएड  होने के कारण ब्लीडिंग भी हैवी होती है।"

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ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होना (Fibroid Degeneration)

जब फाइब्रॉएड तेजी से बढ़ता है, तो ऐसी स्थिति में ब्लड सप्लाई सही से नहीं हो पाती है। नतीजतन, वह अंदर ही अंदर टूटने या सड़ने लगता है। इसे टिश्यू डेथ कहा जाता है। इस स्थिति के कारण प्रभावित हिस्से में सूजन आ जाती है, जिससे महिला को लगातार या चुभने वाला दर्द महसूस होता है।

नसों या अंगों पर दबाव

छोटे आकार का फाइब्रॉएड होने के बावजूद अगर दर्द हो रहा है, तो यह देखना चाहिए कि वह नसों और अंगों पर किस तरह दबाव बना रहा है? डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "अगर कोई छोटा फाइब्रॉएड भी पेल्विक की सेंसिटिव नसों के बिल्कुल पास या बच्चेदानी के मुंह (सर्विक्स) के करीब हो, तो यह आसपास फैलने वाले दर्द, यौन संबंध के दौरान दर्द या पेट के निचले हिस्से में भारी दबाव का कारण बन सकता है। इस स्थिति की भी अनदेखी करना सही नहीं है।"

फाइब्रॉएड के लक्षण क्या हैं?

कई बार फाइब्रॉएड होने के बावजूद, उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती है। इसलिए, जरूरी है कि शरीर में नजर आ रहे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। यहां बताए गए लक्षणों पर गौर करें और जरूरी हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें-

  1. हैवी ब्लीडिंगः BMC Women's Health के अनुसार, फाइब्रॉएड होने की स्थिति में महिला को हैवी ब्लीडिंग हो सकती है। इसके साथ-साथ पीरियड्स के दौरान तीव्र दर्द का एहसास होता है।
  2. पेल्विक एरिया में दर्दः आमतौर पर पीरियड्स के दिनों में कमर या कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है। फाइब्रॉएड होने पर पेल्विक एरिया में तीव्र दर्द का एहसास होता है।
  3. बार-बार पेशाब आनाः हम अक्सर बार-बार पेशाब आने की स्थिति को यूटीआई से जोड़कर देखते हैं। जबकि, यह कंडीशन फाइब्रॉएड से भी संबंधित है। विशेषज्ञ बताते हैं कि फाइब्रॉएड का आकार बढ़ने से ब्लैडर पर भारी दबाव बनता है, जिससे बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है।
  4. पीठ में दर्दः फाइब्रॉएड होने पर पेल्विक एरिया के साथ-साथ पीठ और पैरों में भी दर्द हो सकता है।
  5. कब्ज की समस्याः आपको हैरानी होगी, लेकिन यह सच है कि फाइब्रॉएड होने पर कब्ज भी हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि फाइब्रॉएड मलाशय पर दबाव बनाता है, जिससे मल त्याग करने के बावजूद पेट साफ नहीं होता है।

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कब जाएं डॉक्टर के पास?

इस लेख में ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण दिखे, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवानी चाहिए। हालांकि, इससे संबंधित कुछ गंभीर लक्षण भी हैं, जिनकी अनदेखी करना भारी पड़ सकता है, जैसे-

  1. दवा लेने के बावजूद पेल्विक एरिया में हो रहे दर्द में कमी न आना।
  2. पेट के निचले हिस्से, पेट और यौन संबंध बनाने के दौरान तीव्र दर्द होना।
  3. दो पीरियड्स के बीच 7 दिनों से अधिक ब्लीडिंग होना।
  4. पीरियड्स में ब्लीडिंग के साथ-साथ सिर का भारी होना, चक्कर आना और बेहोशी छाना।
  5. पेल्विक एरिया में दर्द होने के साथ उल्टी और बुखार आना।

निष्कर्ष

फाइब्रॉएड कोई छोटी समस्या नहीं है। इसके छोटे आकार से यह तय नहीं होता है कि महिला को कम दर्द होगा या ज्यादा। इसकी लोकेशन और प्रकार से यह तय होता है कि महिला को दर्द कितना तीव्र होगा। यही कारण है कि डॉक्टर यह विशेष सलाह देते हैं कि फाइब्रॉएड होने की स्थिति में जरा भी लापरवाही न करें। तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अगर ट्रीटमेंट के बावजूद फाइब्रॉएड में सुधार न हो या लक्षणों में बद से बदतर होते जाएं, तो उनकी अनदेखी न करें और तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड का आकार अपने आप छोटा हो जाता है?

    मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है, इसलिए मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड स्वाभाविक रूप से सिकुड़ने लगते हैं और दर्द में कमी महसूस होती है।
  • क्या फाइब्रॉएड की वजह से इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है?

    अगर फाइब्रॉएड गर्भाशय की अंदरूनी परत में हैं, तो भ्रूण का इम्प्लांटेशन मुश्किल हो जाता है। इससे गर्भधारण में समस्या आ सकती है। यहां तक कि मिसकेरेज का जोखिम बढ़ सकता है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 30, 2026 20:35 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta