Sat Sep 19, 2026 | 04:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द क्यों होता है और राहत के लिए क्या करना चाहिए? डॉक्टर से जानें

प्रेग्नेंसी के दौरान पीठ में दर्द होना बहुत ही आम समस्या है, जो शरीर के संतुलन के बिगड़ने और पेट के साइज के कारण होता है। हालांकि, बहुत ज्यादा पीठ दर्द की समस्या होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द क्यों होता है और राहत के लिए क्या करना चाहिए? डॉक्टर से जानेंप्रेग्नेंसी में पीठ दर्द क्यों होता है और राहत के लिए क्या करना चाहिए? डॉक्टर से जानें

प्रेग्नेंसी के दौरान जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है, महिला के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं। ऐसे में महिलाओं के शरीर में कुछ समस्याएं होना काफी आम है, जिसमें पीठ का दर्द भी शामिल है। Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida बताती हैं कि उनके पास आने वाली लगभग 70% से 80% प्रेग्नेंट महिलाएं कमर और पीठ दर्द की समस्या से परेशान रहती हैं। इसके कारण रात में सोने में भी उन्हें तकलीफ होती है। भले ही यह आम समस्या है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि कमर दर्द क्यों होता है और इससे राहत के लिए क्या करना चाहिए?

प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द के कारण

साल 2025 में BMC Pregnancy and Childbirth में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान पीठ दर्द होना एक आम समस्या है, जो पिछली प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द की समस्या रहने, मोटापे, ज्यादा मुलायम गद्दे पर सोने, शारीरिक गतिविधियां न करने, बार-बार झुकने, भारी सामान उठाने जैसी चीजों के कारण हो सकती है।

Dr. Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जो पीठ दर्द का कारण बन सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-

1. शरीर का संतुलन बदलना

प्रेग्नेंसी में जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, आपके शरीर का सेंटर ऑफ ग्रेविटी आगे की ओर खिसक जाता है। इस बदलाव से तालमेल बिठाने के लिए महिलाएं अनजाने में पीछे की तरफ झुककर चलने लगती हैं। पोश्चर में आए इस बदलाव के कारण रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

2. हार्मोनल बदलाव

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में रिलैक्सिन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। ये हार्मोन डिलीवरी की तैयारी के लिए पेल्विक एरिया के लिगामेंट्स और जोड़ों को ढीला और मुलायम बनाते हैं। जोड़ों के ढीले पड़ने से रीढ़ की हड्डी को मिलने वाला सपोर्ट कम हो जाता है, जिससे पीठ में दर्द शुरू होता है।

3. वजन का बढ़ना

स्वास्थ्य के लिए प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना आम और जरूरी होता है, लेकिन बढ़ा हुआ ज्यादा वजन रीढ़ की हड्डी और पेल्विक बोन पर सीधा प्रेशर डालता है, जिससे पीठ में दर्द की समस्या बढ़ जाती है।

इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में कौन सी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए? जानें डॉक्टर से

4. मांसपेशियों में खिंचाव

प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय के फैलने के कारण पेट के सामने की मांसपेशियां बीच में से खिंचकर अलग होने लगती हैं। पेट की मांसपेशियां कमजोर होने पर पीठ की मांसपेशियों को शरीर के ऊपरी हिस्से का सारा भार संभालना पड़ता है, जिससे पीठ में दर्द और अकड़न बढ़ जाती है।

5. मानसिक तनाव और स्ट्रेस

प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं में होने वाले मानसिक तनाव और स्ट्रेस का असर भी शरीर की मांसपेशियों पर पड़ता है। स्ट्रेस के कारण पीठ और कंधे की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जिससे पीठ का दर्द और बढ़ जाता है।

Causes-of-Back-Pain-in-Pregnancy-InsideCauses-of-Back-Pain-in-Pregnancy-Inside

पीठ दर्द से राहत पाने तरीके

Dr. Anju Suryapani के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले पीठ दर्द से राहत पाने के लिए महिलाओं को सही पोश्चर और हल्की स्ट्रेचिंग या एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।

  • चलते और खड़े होते समय अपने पोश्चर का ध्यान रखें। सीधी खड़ी रहें, अपने कंधों को पीछे और नीचे की तरफ रखें। छाती को सीधा रखें और घुटनों को बिल्कुल टाइट न करें।
  • जब भी बैठें, पीठ के पीछे छोटा तकिया या लंबर रोल जरूर लगाएं। पैरों को जमीन पर सीधा रखें और लंबे समय तक एक ही जगह पर न बैठें।
  • पीठ के बल सीधे सोने के बजाय बाईं करवट लेकर सोएं। यह आपके और बच्चे दोनों में ब्लड फ्लो को बेहतर बनाता है।
  • सोने के समय अपने दोनों घुटनों के बीच में एक तकिया रखें और एक तकिया अपने पेट के नीचे लगाएं। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट मिलता है।
  • जमीन से कोई भी सामान उठाते समय कमर से सीधे झुकने की गलती कभी नहीं करनी चाहिए।
  • हमेशा अपने घुटनों को मोड़कर नीचे बैठें और सामान उठाएं। ऐसा करने से सामान का सारा भार आपकी पीठ के बजाय पैरों की मांसपेशियों पर पड़ता है।
  • रोजाना 20 से 30 मिनट की हल्की वॉक करें, जिससे पीठ की मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।
  • डॉक्टर की सलाह और किसी एक्सपर्ट की निगरानी में पेल्विक टिल्ट, प्री-नेटल योग आदि करें। इससे पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करने और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मदद मिलती है।
  • पीठ में दर्द वाले हिस्से पर 10 से 15 मिनट के लिए आइस पैक या हल्के गर्म पानी की थैली से सिकाई करें। ध्यान रखें कि सिकाई पीठ पर करें, पेट पर कभी नहीं।

इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में रोज कितना चलना चाहिए? डॉक्टर से जानें इसके फायदे

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द एक आम समस्या है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। अगर पीठ दर्द के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें तो बिना देर किए अपनी डॉक्टर से कंसल्ट करें।

  • पीठ दर्द के साथ पेट के निचले हिस्से में तेज ऐंठन या मरोड़ होना।
  • योनि से स्पॉटिंग, ब्लीडिंग या फ्लूइड लीकेज होना।
  • पेशाब करते समय जलन, दर्द या बुखार महसूस होना।
  • पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना।

निष्कर्ष
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान पीठ दर्द कई कारणों से हो सकती है, जिसमें शरीर का संतुलन बदलना, हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ना, गलत पोश्चर और मांसपेशियों में खिंचाव होना शामिल हैं। पीठ दर्द से राहत के लिए आप ऊपर बताए टिप्स को फॉलो कर सकते हैं। हालांकि, कोई भी नया एक्सरसाइज शुरू करने से पहले या दर्द बहुत ज्यादा होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेनकिलर लेने से बचना चाहिए और स्ट्रेस फ्री रहना जरूरी है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • प्रेग्नेंसी में पीठ दर्द किस ट्राइमेस्टर में सबसे ज्यादा होता है?

    पीठ दर्द आमतौर पर दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में सबसे आम होता है, क्योंकि इस दौरान पेट का आकार तेजी से बढ़ता है और वजन में भी बढ़ोतरी होती है।
  • पीठ दर्द से बचने के लिए सोते समय कौन सा तरीका अपनाना चाहिए?

    पीठ दर्द से बचने के लिए बाईं करवट सोना सबसे अच्छा माना जाता है। अपने पैरों के बीच और घुटनों के नीचे एक-एक तकिया रख सकती हैं। इससे रीढ़ की हड्डी पर प्रेशर कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर रहता है। 

Read Next

नॉर्मल डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग बढ़ना कब सामान्य और कब खतरे का संकेत? जानें डॉक्टर से

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 19, 2026 14:15 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content