Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द के क्या कारण हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें

Lower Back Pain In Women: महिलाओं के मुंह से पीठ के निचले हिस्से में दर्द के बारे में आपने कई बार सुना होगा। इसका कारण क्या है, क्या इससे बचा जा सकता है और कब डॉक्टर के पास जाएं? जानते हैं, इस बारे में डॉक्टर की राय।

Lower Back Pain In Women: महिलाओं में 25 की उम्र के बाद शरीर में कुछ बड़े बदलाव आते हैं। ये हार्मोनल हो सकते हैं, प्रेग्नेंसी की वजह से हो सकते हैं या घर और ऑफिस के स्ट्रेस की वजह से भी दिक्कत हो सकती है। आज हम महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द की करेंगे जो कि बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को ज्यादा परेशान करती है। दरअसल, 30 के बाद से ही इसकी शुरुआत हो जाती है और धीमे-धीमे दिक्कत बढ़ती जाती है। अगर लंबे समय तक इस पर ध्यान न दिया जाए तो ये गंभीर रूप धारण कर सकती है। महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द के क्या कारण हो सकते हैं इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bangaluru से बात की।

महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द के क्या कारण हो सकते हैं?

ये सवाल पूछने पर महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द क्यों होता है, डॉ. पूजा पिल्लई बताती हैं कि महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

1. मांसपेशियों में खिंचाव

होता ये है कि कई बार अचानक हमारी मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है जिसका कारण कुछ भी हो सकता है जैसे कोई चोट, एक्सरसाइज या कमजोर मांसपेशियां। कई बार कुछ विटामिन्स की कमियां जैसे विटामिन डी और विटामिन B6 और B12। इसके अलावा, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की कमी भी मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बन सकती है जिससे पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है।

2. गलत पोश्चर

लंबे समय तक बैठे रहना या गलत पोस्चर में बैठे रहना जैसे कि ऑफिस में काम के दौरान सही चेयर पर न बैठना। इसके अलावा बेड या मोबाइल पर स्क्रॉल करते समय लगातार बैठे रहना जिसमें कि पीठ के बीच के हिस्से पर प्रेशर पड़ रहा हो तो ये भी पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण बन सकता है।

3. कोर की मांसपेशियां कमजोर होना

कोर की मांसपेशियों का कमजोर होना भी इस समस्या का कारण बन सकता है। ये पहले से लगी चोट की वजह से भी हो सकता है जिससे कोर की मांसपेशियों पर प्रेशर पड़ रहा हो। इसके अलावा कुछ लोगों के शरीर का असंतुलित वजन भी कोर की मांसपेशियों के कमजोर होने की वजह बनती है जिससे पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है।

इसे भी पढ़ें: लगाकर पीठ में दर्द कहीं स्‍पाइनल अर्थराइट‍िस तो नहीं? डॉक्‍टर से जानें लक्षण और कारण

4. डिस्क की समस्याएं और आर्थराइटिस

अगर किसी भी कारण से आपको डिस्क से जुड़ी दिक्कत है तो ये पीठ के निचले हिस्से में दर्द की वजह बन सकती है। इसके अलावा जिन महिलाओं में आर्थराइटिस की शिकायत रहती है उनमें भी ये दिक्कत देखी जा सकती है। आर्थराइटिस में शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही हड्डियों और जोड़ों पर हमला कर देता है जिससे ये कमजोर हो जाती हैं और पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है।

महिलाओं में पीठ के निचले हिस्से में दर्द के अन्य कारण

डॉ. पूजा पिल्लई बताती हैं कि इसके अलावा, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी, पीरियड्स से जुड़ा दर्द और रिप्रोडक्टिव अंगों से जुड़ी समस्याएं भी कभी-कभी पीठ के निचले हिस्से में दर्द का कारण बन सकती हैं। हालांकि, ये एक समय के लिए होती हैं।

lower_back_pain_inside

उम्र बढ़ने के साथ क्यों बढ़ जाता है दर्द?

इस पर डॉ. पूजा बताती हैं कि उम्र बढ़ने के साथ, मांसपेशियों की ताकत कम होने, शारीरिक गतिविधि कम होने, रीढ़ की हड्डी में बदलाव और डिस्क व जोड़ों के धीरे-धीरे घिसने से पीठ रोजमर्रा के तनाव को झेलने में कम सक्षम हो जाती है, जिससे बार-बार परेशानी होने की संभावना बढ़ जाती है। 

उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व (bone density) भी कम हो सकता है, खासकर मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से हड्डियों का नुकसान तेजी से हो सकता है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस और वर्टेब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है, जिससे लगातार या अचानक पीठ दर्द हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में मांसपेशियों का द्रव्यमान (muscle mass) भी कम हो सकता है, जिससे पेट, कूल्हे व पीठ की कमजोर मांसपेशियां रीढ़ की हड्डी को कम सहारा देती हैं। वहीं, ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों के कारण अकड़न और दर्द हो सकता है, जो लंबे समय तक बैठने, खड़े रहने या शारीरिक गतिविधि के बाद और अधिक महसूस होता है।

इसे भी पढ़ें: पीठ को टोन करने और फैट घटाने के ल‍िए बेस्‍ट हैं ये 3 एक्‍सरसाइज, एक्‍सपर्ट से जानें फायदे

डॉक्टर को कब दिखाएं?

खासकर तब, जब पीठ के निचले हिस्से में दर्द के साथ पैरों में कमजोरी या सुन्नपन, बिना किसी कारण वजन कम होना, बुखार, गिरने के बाद दर्द, ब्लैडर या आंतों पर नियंत्रण में कठिनाई या रात में बहुत ज्यादा दर्द हो। 

कैसे करें बचाव?

डॉ. पूजा पिल्लई बताती हैं कि वजन बनाए रखना, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, कोर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करना, सही पोस्चर अपनाना और लंबे समय तक बैठने से बचना रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा में मदद कर सकता है। साथ ही, मेनोपॉज के बाद महिलाओं को सही समय पर अपने डॉक्टर से हड्डियों की सेहत और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम के बारे में भी बात करनी चाहिए।

निष्कर्ष:

हालांकि, उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पीठ दर्द को बस उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा मानकर स्वीकार कर लिया जाए। अगर पीठ के निचले हिस्से में दर्द गंभीर है, लगातार बना रहता है, बार-बार होता है या बिगड़ता जा रहा है, तो डॉक्टर से इसकी जांच करवानी चाहिए।

Image credit: Freepik

FAQ

  • क्या गैस के कारण पीठ में दर्द हो सकता है?

    गैस के कारण पीठ में दर्द हो सकता है लेकिन ये लंबे समय तक नहीं रहता है। ये आंतों पर प्रेशर पड़ने की वजह से होता है और जैसे ये प्रेशर कम होता है इस समस्या में कमी आ सकती है।
  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द के लिए व्यायाम क्या है?

    पीठ के निचले हिस्से में दर्द से राहत पाने के लिए व्यायाम में आप कुछ स्ट्रेच एक्सरसाइज कर सकती हैं। इसके अलावा पेल्विक टिल्ट वाले योग कर सकती हैं जैसे सेतुबंधासन।

Read Next

नॉर्मल डिलीवरी के कितने दिन बाद शारीरिक संबंध बनाना चाहिए? एक्सपर्ट से जानें सही समय

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Pallavi Kumari

Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 24, 2026 17:34 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
  • Aug 24, 2026 17:34 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr. Pooja Pillai

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content