Wed Sep 16, 2026 | 07:07 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

क्या मेनोपॉज के बाद भी बढ़ सकता है फाइब्रॉएड? डॉक्टर से समझें इसके पीछे का सच

अगर किसी महिला को पहले से ही फाइब्रॉएड है, तो संभवतः मेनोपॉज के बाद भी इसके आकर में वृद्धि।  हालांकि, इसके पीछे कई तरह के कारण जिम्मेदार हैं। जानें इनके बारे में-

फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में बनने वाली गैर-कैंसरकारी गांठों को अक्सर महिलाओं की प्रजनन क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि फाइब्रॉएड की वृद्धि में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महिला हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मेनोपॉज के बाद महिला के शरीर में इन हार्मोनों का स्तर काफी कम हो जाता है।  इसलिए आमतौर पर फाइब्रॉएड के आकार में कमी आने लगती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मेनोपॉज के बाद गर्भाशय की हर गांठ अपने आप गायब हो जाएगी या उसका आकार छोटा हो जाएगा। 

इस बारे में वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "मेनोपॉज के बाद हार्मोन के स्तर में तेजी से गिरावट आने के कारण सामान्यतः फाइब्रॉएड की वृद्धि धीमी पड़ती है और कई मामलों में उसका आकार भी छोटा हो जाता है। लेकिन अगर मेनोपॉज के बाद किसी गांठ का आकार बढ़ रहा है, नए लक्षण दिखाई दे रहे हैं या वजाइनल ब्लीडिंग हो रही है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।"

मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड की वृद्धि पर असर

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फाइब्रॉएड की वृद्धि मुख्य रूप से हार्मोन से प्रभावित होती है। मेनोपॉज के दौरान अंडाशय से बनने वाले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है। नतीजतन, मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड का आकार बढ़ता नहीं, बल्कि अक्सर उसमें सिकुड़न देखने को मिलती है। हालांकि, हर महिला में यह बदलाव एक जैसा नहीं होता। किसी महिला में गांठ का आकार लंबे समय तक लगभग समान रह सकता है, जबकि किसी अन्य में इसका अकार धीरे-धीरे छोटा हो सकता है। इसलिए मेनोपॉज के बाद भी पहले से मौजूद फाइब्रॉएड पर नजर रखना और नियमित जांच करना जरूरी हो जाता है।

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क्या मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड बढ़ सकता है?

डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड का बढ़ना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता, लेकिन ऐसा होने की संभावना को पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता। कुछ महिलाओं में हार्मोन से संबंधित उपचार, मोटापा या शरीर में मौजूद अन्य हार्मोनल प्रभाव फाइब्रॉएड के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "अगर मेनोपॉज के बाद अल्ट्रासाउंड में फाइब्रॉएड पहले की तुलना में बड़ा दिखाई देता है, तो चिकित्सक सबसे पहले पुराने और नए आकार की आपस में तुलना करेंगे। केवल एक रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच या अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं।"

स्टडी क्या कहती है?

2021 में Menopause में प्रकाशित एक संपादकीय टिप्पणी के अनुसार, कुछ महिलाओं में मेनोपॉज के बाद भी फाइब्रॉएड बने रहते हैं और लगातार बढ़ सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेनोपॉज के बाद शरीर में मौजूद फैट टिश्यू के जरिए सीमित मात्रा में एस्ट्रोजन बनता रहता है। यह काम फैट टिश्यू के अंदर मौजूद अरोमाटेज (Aromatase) नामक एंजाइम द्वारा होता है, क्योंकि यह शरीर के अन्य हार्मोनों को एस्ट्रोजन में बदलने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि जिन महिलाओं में चर्बी या मोटापा अधिक होता है, उनके शरीर में यह एंजाइम ज्यादा सक्रिय रहता है और मेनोपॉज के बाद भी एस्ट्रोजन बनने की प्रक्रिया जारी रहती है। इसी एस्ट्रोजन की खुराक मिलने की वजह से गर्भाशय के फाइब्रॉएड मेनोपॉज के बाद भी सिकुड़ने के बजाय लगातार बढ़ते रहते हैं।

कब बरतें सावधानी?

मेनोपॉज के बाद महिलाओं को ब्लीडिंग नहीं होती है। अगर ऐसा होता है, तो यह सही नहीं है और तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है। डॉ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं कि मेनोपॉज के बाद वजाइनल ब्लीडिंग को सीधे तौर पर फाइब्रॉएड से जोड़कर देखना सही नहीं है। इसके पीछे गर्भाशय की अंदरूनी परत में बदलाव, पॉलिप, हार्मोनल कारण या कुछ गंभीर स्थितियां भी हो सकती हैं।

मेनोपॉज के बाद एक बार भी रक्तस्राव दिखाई दे, तो महिला को स्वयं यह तय नहीं करना चाहिए कि यह फाइब्रॉएड की वजह से है। स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है।

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किन लक्षणों पर ध्यान दें?

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मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड या गर्भाशय से जुड़ी किसी समस्या में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

  • पेट के निचले हिस्से में लगातार भारीपन या दबाव
  • पेट के आकार में असामान्य बढ़ोतरी
  • बार-बार पेशाब आने की समस्या
  • कब्ज या मल त्याग में परेशानी
  • पेल्विक एरिया में दर्द या दबाव
  • मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग
  • पहले से मौजूद गांठ के आकार में बढ़ोतरी

हालांकि ये लक्षण केवल फाइब्रॉएड के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है। ये किसी अन्य बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की जांच आवश्यक है।

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फाइब्रॉएड की जांच कैसे होती है?

यदि मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड में बदलाव दिखाई देता है, तो चिकित्सक आमतौर पर पेल्विक एरिया की जांच और अल्ट्रासाउंड से शुरुआत कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार अन्य इमेजिंग टेस्ट भी किए जाते हैं। पुराने अल्ट्रासाउंड से तुलना करने पर यह समझने में मदद मिलती है कि गांठ वास्तव में बढ़ रही है या नहीं। यदि गांठ का आकार तेजी से बढ़ता दिखाई दे या कुछ असामान्यताएं दिखाई दें, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं। इसका उद्देश्य किसी गंभीर बीमारी की संभावना को समय रहते जांचना होता है।

डॉक्टर की सलाह

कई बार फाइब्रॉएड होने के बावजूद महिला सामान्य जिंदगी जी सकती है, क्योंकि वह शरीर को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती है।  इस बारे डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "अगर फाइब्रॉएड होने पर भी महिला को कोई परेशानी नहीं है और फाइब्रॉएड स्थिर है, तो कई मामलों में केवल रेगुलर जांच पर्याप्त हो सकती है। ट्रीटमेंट होगा या नहीं, कैसा होगा, यह सब गांठ के आकार, स्थान, लक्षण, महिला की उम्र और स्वास्थ्य तथा जांच के परिणामों के आधार पर किया जाता है।"

डॉ. गुप्ता आगे कहती हैं, "फाइब्रॉएड सुनते ही घबराने या तुरंत सर्जरी के बारे में सोचने की जरूरत नहीं है। हर गांठ का उपचार एक जैसा नहीं होता। लेकिन मेनोपॉज के बाद उसमें वृद्धि हो या वजाइनल ब्लीडिंग हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।"

निष्कर्ष

फाइब्रॉएड आमतौर पर गैर-कैंसरकारी गांठें होती हैं और मेनोपॉज के बाद उनका बढ़ना सामान्य प्रवृत्ति नहीं है। इसलिए मेनोपॉज के बाद गांठ के आकार में बदलाव या नया लक्षण सामने आने पर उसकी जरूरी जांच करवाएं। ध्यान रखें कि मेनोपॉज के बाद भी गर्भाशय से जुड़ी पुरानी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके उलट समय-समय पर अपनी जांच करवाते रहना चाहिए। खासकर, यदि फाइब्रॉएड बढ़ता हुआ दिखाई दे या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो, तो समय पर जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या मेनोपॉज के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) लेने से फाइब्रॉएड का आकार दोबारा बढ़ सकता है?

    HRT में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन शामिल होते हैं। अगर कोई महिला मेनोपॉज के बाद HRT लेती हैं, तो ये हार्मोन फाइब्रॉएड के अकार को दोबारा बढ़ा सकते हैं।
  • क्या मेनोपॉज के बाद फाइब्रॉएड के कैंसर में बदलने का खतरा बढ़ जाता है?

    वैसे तो फाइब्रॉएड कैंसर में नहीं बदलते, लेकिन मेनोपॉज के बाद यदि कोई गांठ तेजी से बढ़ रही हो, तो डॉक्टर से इसकी जांच करवाना जरूरी है।

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 16, 2026 17:21 IST

    Published By : Meera Tagore
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