Wed Sep 16, 2026 | 04:54 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

सही ब्रा कैसे चुनें? डॉक्‍टर से जानें ब्रेस्‍ट हेल्‍थ के ल‍िए क्‍यों जरूरी है सही चुनाव

अगर ब्रा का साइज ठीक नहीं है, फ‍िट‍िंग और कपड़ा त्‍वचा के ल‍िए सही नहीं है, तो ब्रा कई गंभीर बीमार‍ियों का कारण बन सकती है। डॉक्‍टर से जानें ब्रेस्‍ट हेल्‍थ के ल‍िए सही ब्रा कैसे चुनें?

जब भी हम ब्रेस्‍ट का नाम सुनते हैं, तो ब्रेस्‍ट कैंसर का नाम याद आ जाता है, लेक‍िन एक्‍सपर्ट्स ऐसा मानते हैं क‍ि ब्रेस्‍ट से जुड़ी ज्‍यादातर समस्‍याएं कैंसर से अलग होती हैं। इन समस्‍याओं के पीछे एक कारण गलत ब्रा का चुनाव भी है। अगर आप अपने ल‍िए सही ब्रा का चुनाव नहीं करेंगी, तो ब्रेस्‍ट की सेहत खराब हो सकती है। कई मह‍िलाएं ज्‍यादा टाइट ब्रा पहनने लगती हैं ज‍िससे ज्‍यादा पसीना आता है, इंफेक्‍शन हो सकता है। वहीं, कुछ मह‍िलाएं ज्‍यादा ढीली ब्रा पहनती हैं ज‍िससे ब्रा को उच‍ित सपोर्ट नहीं म‍िल पाता है। आइए जानते हैं क‍ि आख‍िर सही ब्रा का चुनाव कैसे करना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

ब्रा का सही साइज कैसे चुनें?

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National Breast Cancer Organisation के मुताबि‍क, अगर ब्रा का साइज सही नहीं है, तो कंधे पर रेडनेस हो सकती है, कंधों पर दबाव से गर्दन में दर्द और स‍िर दर्द हो सकता है, ब्रेस्‍ट ट‍िशू को नुकसान पहुंच सकता है और त्‍वचा में जलन की समस्‍या भी हो सकती है।

  • ब्रेस्‍ट को सपोर्ट करने के ल‍िए ब्रा का सही साइज चुनें।
  • इंच टेप लेकर ब्रेस्‍ट के नीचे कमर से ठीक ऊपर का साइज लें। जो भी नंबर आए उसमें 1 जोड़ दें, तो बैंड साइज पता चल जाएगा। उदाहरण के ल‍िए कमर का साइज 36 है, तो उसमें 1 जोड़कर बैंड साइज को 37 मानें।
  • अब बस्‍ट का साइज लें। यानी ब्रेस्‍ट के सबसे उभरे हुए ह‍िस्‍से को इंच टेप की मदद से पीछे से आगे की ओर मापें। बस्‍ट साइज में भी 1 जोड़कर साइज तय करें।
  • दोनों साइज के बीच अंतर जांच लें।
  • अगर 1 साइज का अंतर है, तो A कप साइज होगा।
  • 2 साइज का अंतर है, तो B कप साइज होगा।
  • इसी तरह 3 पर C और 4 साइज का अंतर आने पर कप साइज D होगा।

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स्पोर्ट्स ब्रा को रोजाना नहीं पहनना चाह‍िए

टीनएज लड़क‍ियां और युवत‍ियां अक्‍सर स्पोर्ट्स ब्रा को न‍ियम‍ित तौर पर पहनना शुरू कर देती हैं, लेक‍िन इसे क‍ेवल स्पोर्ट्स खेलते समय या एक्‍सरसाइज के दौरान पहनना चाह‍िए। इसे रोजाना पहनने की गलती न करें। इससे ब्रेस्‍ट को सही सपोर्ट नहीं म‍िलता है।

रोजाना कैसी ब्रा पहनें?

  • रोजाना पहनने वाली ब्रा ऐसी होनी चाह‍िए जो पूरी तरह से ब्रेस्‍ट एर‍िया को सपोर्ट दें, स्‍ट्रैप से न‍िशान न आए शरीर पर और जो न‍िप्‍पल एर‍िया को सही ढंग से कवर करे।
  • साथ ही ब्रा ज्‍यादा लूज या टाइट नहीं होनी चाह‍िए।
  • ब्रा पहनने के बाद अगर ब्रेस्‍ट बाहर की ओर न‍िकले, तो यानी साइज सही नहीं है।
  • सही ब्रा, ब्रेस्‍ट एर‍िया को पूरी तरह से कवर करता है। इसे पहनकर ब्रेस्‍ट बाहर की ओर नहीं न‍िकलता है।

ब्रा का मटेर‍ियल कैसे होना चाह‍िए?

  • स‍िंथेट‍िक मटेर‍ियल की ब्रा न चुनें। इससे त्‍वचा में रैशेज, खुजली, अध‍िक पसीना न‍िकलने की समस्‍या हो सकती है। ज्‍यादा पसीना न‍िकलने से ब्रेस्‍ट एर‍िया में इंफेक्‍शन हो सकता है।
  • नेट वाली ब्रा पहनने से बचें, इससे सपोर्ट नहीं म‍िलता है।
  • हमेशा कॉटन फैब्र‍िक की ब्रा चुननी चाह‍िए।

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इन बातों का ध्‍यान रखें

  • सोते समय ब्रा न‍िकालकर सोएं, ताक‍ि ब्रेस्‍ट एर‍िया में टाइटनेस महसूस न हो।
  • साइज हर छह महीने बाद चेक करें।
  • अगर इलास्‍ट‍िक ढीले हो जाएं, तो ब्रा बदल लें।

ब्रेस्‍ट साइज को प्रभाव‍ित कर सकते हैं ये कारक

ब्रेस्‍ट साइज को कई कारक प्रभाव‍ित कर सकते हैं ज‍िसके कारण ब्रा का साइज भी बदलने की जरूरत पड़ सकती है जैसे-
अगर वजन बढ़ता है या वेट लॉस होता है, तो ब्रा की फ‍िट‍िंग चेक करें और सही फ‍िट‍िंग की ब्रा चुनें।

  • प्रेग्नेंसी
  • ब्रेस्टफीडिंग
  • ब्रेस्टफीडिंग बंद करना
  • मेनोपॉज
  • दवाएं
  • उम्र बढ़ना
  • एक्सरसाइज

ब्रेस्‍ट हेल्‍थ के ल‍िए क्‍यों जरूरी है सही ब्रा?

  • ब्रेस्‍ट हेल्‍थ के ल‍िए सही ब्रा चुनना जरूरी है। इससे त्‍वचा को आराम म‍िलता है और ब्रेस्‍ट को सपोर्ट मि‍लता है।
  • सही फ‍िट‍िंग वाली ब्रा से चलने-फिरने या एक्सरसाइज के दौरान होने वाली अनावश्यक हलचल से बचाव होता है।
  • बहुत टाइट ब्रा पहनने से त्वचा पर दबाव, लाल निशान, खुजली और रगड़ जैसी समस्या हो सकती है।
  • वहीं, बहुत ढीली ब्रा पर्याप्त सपोर्ट नहीं देती। गलत फिटिंग के कारण स्ट्रैप कंधों में धंस सकते हैं।
  • हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सही ब्रा पहनना ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव का तरीका नहीं है। इसका मुख्य काम उचित सपोर्ट, आराम और त्वचा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

न‍िष्‍कर्ष:

सही ब्रा चुनेंगी, तो ब्रेस्‍ट को सपोर्ट म‍िलेगा और त्‍वचा को भी आरामदायक महसूस होगा। टाइट ब्रा पहनने से त्‍वचा में खुजली, रेडनेस, दबाव, गर्दन और कंधों में दर्द की समस्‍या हो सकती है। प्रेग्नेंसी, ब्रेस्टफीडिंग, ब्रेस्टफीडिंग बंद करना, मेनोपॉज, दवाएं, उम्र बढ़ना
और एक्सरसाइज जैसे कारक ब्रेस्‍ट साइज को प्रभाव‍ित कर सकते हैं। सोते समय ब्रा हटाकर सोना चाह‍िए ताक‍ि टाइटनेस महसूस न हो, हमेशा कॉटन फैब्र‍िक वाली ब्रा पहनना चाह‍िए। ऐसी ब्रा चुनें जो ब्रेस्‍ट एर‍िया को पूरी तरह से कवर करे। स्पोर्ट्स ब्रा को रोजाना पहनने से बचना चाह‍िए क्‍यों‍क‍ि इससे पर्याप्‍त सपोर्ट नहीं म‍िलता है। इसे केवल स्पोर्ट्स या एक्‍सरसाइज के दौरान पहनना चाह‍िए। बैंड साइज और बस्‍ट साइज को चेक करें और दोनों के अंतर से कप साइज पता करें। हर छह महीने में सही ब्रा के ल‍िए ब्रेस्‍ट साइज चेक करना न भूलें।

image credit: magnific

FAQ

  • ब्रेस्ट में दर्द या त्वचा पर लगातार जलन होने पर क्‍या करें?

    ब्रा की फ‍िट‍िंग और फैब्र‍िक की जांच करें। अगर त्‍वचा में दर्द, गांठ या त्‍वचा में बदलाव द‍िखे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें। 
  • गंदी ब्रा पहनने से त्‍वचा को क्‍या नुकसान होता है?

    लंबे समय तक गंदी ब्रा पहनने से ब्रा के कपड़े में पसीना, तेल और डेड सेल्‍स जमा हो सकते हैं ज‍िससे त्‍वचा में जलन या इंफेक्‍शन का खतरा बढ़ सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 16, 2026 15:32 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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