Sun Oct 25, 2026 | 11:06 PM IST

Medically Reviewed by Dr Neeharika Jaiswal , Consultant Psychiatrist - Metro Hospital & Heart Institute, Noida

सोते समय दिमाग को शांत कैसे करें? सुकून भरी नींद के लिए अपनाएं ये 8 टिप्स

ओवरथिंकिंग और तनाव के कारण नींद न आने की समस्या आम है, जिससे शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता।  सोने से पहले दिमाग को शांत करना बहुत जरूरी है। दिमाग को शांत करने और अच्छी नींद पाने के लिए ब्रेन डंपिंग, ब्रीदिंग तकनीक और डिजिटल डिटॉक्स करें। 
सोते समय दिमाग को शांत कैसे करें? सुकून भरी नींद के लिए अपनाएं ये 8 टिप्ससोते समय दिमाग को शांत कैसे करें? सुकून भरी नींद के लिए अपनाएं ये 8 टिप्स

मानसिक शांत और गहरी नींद पाने के लिए सोने से पहले दिमाग को शांत करना बहुत जरूरी है। जब तक दिमाग तनावमुक्त नहीं होता है, तब तक शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता है। वर्तमान में ओवरथिंकिंग काफी आम बात है, जो नींद की क्वालिटी पर सीधा असर डालता है। Dr. Neeharika Jaiswal, Consultant Psychiatrist- Metro Hospital & Heart Institute, Noida कहती हैं कि अगर आप रात में बार-बार करवटें बदलते हैं और दिमाग शांत न होने के कारण नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं तो आप अकेले नहीं हैं। आधुनिक लाइफस्टाइल, डिजिटल गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल और मानसिक तनाव हमारे दिमाग की काम करने के तरीके को रात में भी धीमा नहीं होने देते हैं। ऐसे में अपने दिमाग को शांत करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं।

सोते समय दिमाग को शांत करने के तरीके

साल 2023 में Journal of Interprofessional Education & Practice में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, सोने से पहले अपने मन को शांत करने और बेहतर नींद पाने के लिए जर्नलिंग, हल्की वॉक और स्लीप हाइजीन जैसी चीजें करने से दिमाग को शांत करने और अच्छी नींद में मदद मिल सकती है।

Dr. Neeharika Jaiswal के अनुसार, अच्छी नींद के लिए जरूरी है कि सोने के दौरान आपका दिमाग शांत रहे और आप किसी भी तरह के तनाव से दूर रहे। इसलिए, सोते समय दिमाग को शांत रखने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं।

1. ब्रेन डंप तकनीक अपनाएं

सोने से ठीक पहले दिमाग इसलिए तेज चलता है क्योंकि वह कल के अधूरे कामों या समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहा होता है। सोने से 30 मिनट पहले एक डायरी और पेन लें। जो भी बातें, चिंताएं या कल के काम आपके दिमाग में चल रहे हैं, उन्हें उस डायरी में लिख दें। जब आप अपनी समस्याओं को कागज पर लिखते हैं तो दिमाग को संकेत मिलता है कि यह जानकारी सुरक्षित है और उसे रातभर इसे याद रखने या सोचने की जरूरत नहीं है।

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2. 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक

4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक बहुत ही प्रभावी न्यूरोलॉजिकल तकनीक है, जो आपके पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को तुरंत एक्टिव कर देती है और दिल की धड़कन को नॉर्मल करती है। इस प्रक्रिया को करने के लिए-

  • नाक से 4 सेकेंड तक गहरी सांस लें
  • 7 सेकेंड तक सांस को रोककर रखें
  • मुंह से 8 सेकेंड तक धीरे-धीरे सांस छोड़ें
  • इस साइकिल को 4 से 5 बार दोहराएं। इससे वेगस नर्व स्टिम्युलेट होती है और दिमाग शांत होने लगता है।

3. सोने से पहले डिजीटल डिटॉक्स

मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे दिमाग में मेलाटोनिन नाम की नींद के नेचुरल हार्मोन के डिस्चार्ज को रोक देती है। इसलिए, सोने से कम से कम 1 घंटे पहले अपने फोन और लैपटॉप को दूर रख दें। स्क्रीन देखने से दिमाग की अल्फा वेव्स एक्टिव रहती हैं, जिससे दिमाग वेक-अप मोड में रहता है।

4. मांसपेशियों को आराम दें

जब शरीर में खिंचाव या तनाव होता है, तो दिमाग शांत नहीं हो सकता है। बिस्तर पर सीधे लेट जाएं और अपने पैर के पंजों से शुरुआत करते हुए मांसपेशियों को 5 सेकेंड के लिए कसें और फिर ढीला छोड़ दें। इसी तरह धीरे-धीरे पिंडलियों, जांघों, पेट, छाती, कंधों और चेहरे की मांसपेशियों को कसें और ढीला छोड़ें। इससे शारीरिक तनाव दूर होता है और दिमाग शांत होता है।

5. 20-मिनट का नियम अपनाएं

अगर आपको बिस्तर पर सेटे हुए 20 मिनट से ज्यादा हो चुके हैं और नींद नहीं आ रही है तो बिस्तर पर पड़े रहकर करवटें न बदलें। इस स्थिति में आप बिस्तर से उठ जाएं, किसी दूसरी रोशनी वाले कमरे में जाएं और कोई किताब पढ़ें या शांत संगीत सुनें। जब तक दोबारा नींद या भारीपन महसूस न हो, तब तक बिस्तर पर न लौटें।

6. कमरे का तापमान और वातावरण सही रखें

हमारे शरीर का कोर टेम्परेचर सोने के लिए 1 से 2 डिग्री गिरना जरूरी होता है। कमरे को थोड़ा ठंडा, अंधेरा और शांत रखें। हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें, पैरों को गुनगुने पानी में 10 मिनट डुबोकर रखें, ताकि शरीर का तापमान संतुलित होता है और दिमाग को शांति मिलती है।

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7. सोने से पहले कैफीन और भारी भोजन से बचें

चाय, कॉफी, डार्क चॉकलेट और एनर्जी ड्रिंक्स में मौजूद कैफीन हमारे न्यूरोट्रांसमीटर्स को 6 से 8 घंटे तक उत्तेजित रखता है। शाम 4 बजे के बाद कैफीन का सेवन न करें। सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले हल्का भोजन करें, ताकि रात में पाचन तंत्र पर ज्यादा प्रेशर न डालें।

8. विज़ुअलाइजेशन करें

रात में सोने से पहले अपनी सोच पर रोक लगाने की कोशिश करने के बजाय, अपने ध्यान को किसी शांत दृश्य पर फोकस करें। कल्पना करें कि आप किसी शांत ठंडे पहाड़ या हरे-भरे जंगल में टहल रहे हैं। वहां की हवा, आवाजों और वातावरण को महसूस करने की कोशिश करें। यह तकनीक दिमाग की सोचने वाले लूप को तोड़ देती है।

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डॉक्टर से परामर्श कब लें?

अगर यह समस्या लगातार 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है, दिन में ज्यादा थकान या काम में ध्यान न लगने की समस्या हो रही है तो इसे अनदेखा न करें। यह क्रोनिक इंसोमनिया या एंग्जायटी का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप न्यूरोलॉजिस्ट या स्लिप स्पेशलिस्ट से कंसल्ट करें। खुद से बिना डॉक्टर कंसल्ट के नींद की दवा लेने से बचें।

निष्कर्ष
सोना एक नेचुरल प्रक्रिया है। आप जितनी ज्यादा सोने की कोशिश करेंगे या यह सोचेंगे कि आपको सोना ही पड़ेगा, आपका दिमाग उतना ही ज्यादा तनाव से घिरने लगेगा। नींद लाने के लिए खुद पर प्रेशर न डालें। ध्यान रहे, शांत दिमाग रखने से बेहतर नींद लाने में मदद मिल सकती है। अच्छी नींद के लिए आप इन छोटी-छोटी आदतों को अपना सकते हैं और कई दिनों तक नींद न आने या कम नींद आने की समस्या होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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FAQ

  • रात को नींद नहीं आती कौन सी बीमारी है?

    रात को नींद न आने की समस्या को अनिद्रा कहा जाता है, जो एक तरह की मानसिक और शारीरिक स्लीप डिसऑर्डर है। यह तनाव, एंग्जायटी या खराब लाइफस्टाइल के कारण हो सकती है।
  • नींद नहीं आने से दिमाग का क्या होता है?

    पर्याप्त नींद न मिलने से दिमाग की सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, मानसिक थकान, तनाव और फोकस में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 25, 2026 21:14 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Neeharika Jaiswal