Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

मेनोपॉज के बाद बढ़ गया है चिड़चिड़ापन और गुस्सा? जानें मूड स्विंग्स से निपटने के 7 तरीके

मेनोपाॅज के बाद कई महिलाएं बात-बात पर चिड़चिड़ा जाती हैं या गुस्सा हो जाती है। कई बार उन्हें अपनी स्थिति खुद समझ नहीं आती है। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा है, तो इस लेख को ध्यान से जरूर पढ़ें।

मेनोपाॅज यानी पीरियड्स का पूरी तरह बंद हो जाना। इसके बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है। यह जीवन का एक चरण है और पूर्णतः प्राकृतिक है। हालांकि, कई महिलाओं को मेनोपाॅज के दौरान और इसके बाद तरह-तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें वजन का बढ़ना, हाॅट फ्लैशेज होना, रात को नींद न आना शामिल हैं। यही नहीं, महिलाओं को काफी ज्यादा मूड स्विंग यानी चिड़चिड़ापन भी महसूस होने लगता है। कई महिलाएं बात-बात में गुस्सा भी हो जाती हैं। अगर आपके साथ ऐसा है, तो इसे डील करने के लिए वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता आपको कुछ टिप्स दे रही हैं।

मेनोपाॅज के बाद मूड स्विंग से कैसे निपटें?

mood swings after menopause know how to deal with it 01 (24)

मेनोपाॅज के बाद मूड स्विंग से निपटना मुश्किल नहीं है। आदतों और जीवनशैली में कुछ सुधार करके इससे निपटा जा सकता है, जैसे-

1. ब्लड शुगर को संतुलित रखें

विशेषज्ञों की मानें, तो मेनोपाॅज में मूड स्विंग से डील करने के लिए ब्लड शुगर को संतुलित किया जाना जरूरी है। इसके लिए डाइट में लीन प्रोटीन, साबुत अनाज और हेल्दी फैट जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसी चीजों का सेवन करें। वहीं, दूसरी ओर कैफीन और प्रोसेस्ड शुगर से पूरी तरह दूर रहें। ध्यान रखें कि शराब, कैफीन और शुगर जैसी चीजें हैं, जो ब्लड शुगर को क्रैश करते हैं और इसका नेगेटिव असर आपके मूड पर पड़ता है।

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2. नियमित रूप से करें एक्सरसाइज

वैसे तो नियमित रूप से एक्सरसाइज करना सबके लिए अच्छा माना जाता है। विशेषकर, मेनोपाॅज के बाद महिलाओं के लिए यह और जरूरी हो जाता है। साल 2011 में Exercise beyond menopause में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, मेनोपॉज के बाद एक्सरसाइज करने से मूड में सुधार होता है। एक्सरसाइज जैसे वाॅकिंग, योगा और स्विमिंग आदि करने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन रिलीज होता है। यह फील गुड हार्मोन है, जिससे तनाव और चिंता का स्तर कम होता है। जाहिर है, ऐसे में मेनोपाॅज के बाद भी महिलाओं के मूड को बेहतर होने में मदद मिलती है।

3. नींद में सुधार करें

National Council On Aging की मानें तो कि मेनोपाॅज के बाद एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आने की वजह से कई तरह के शारीरिक बदलाव होते हैं। ऐसे में नींद भी बाधित होती है, जिससे महिला बेवजह चिड़चिड़ापन महसूस करती हैं। मेनोपाॅज के बाद चिड़चिड़ेपन को कम करने के लिए जरूरी है कि आप अपनी स्लीप साइकिल में सुधार करें। 

इसके लिए, नियमित रूप से एक निश्चित समय पर सोने जाएं, सोने से पहले मोबाइल न देखें और सोने के ठीक पहले हैवी डिनर न करें। सोने से करीब 3 घंटे पहले अपना डिनर खत्म कर लें। जब आप अच्छी और गहरी नींद लेते हैं, तो अगली सुबह चिड़चिड़ापन अपने आप कम हो जाता है।

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4. मेडिटेशन करें

चिड़चिड़ापन कम करने के लिए सबसे अच्छी आदतों में से एक है, मेडिटेशन। मेनोपाॅज के बाद महिलाओं को इसे अपनी जीवनशैली में अपना लेना चाहिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब बहुत तेज गुस्सा, डर या चिंता महसूस हो, तो ऐसे में तंत्रिका तंत्र अपने आप उत्तेजित हो जाता है और सांस भी उखड़ने लगती है। इसे तुरंत शांत करने के लिए आप डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन कर सकते हैं। इससे सांस की गति नियंत्रित होती है और मूड में भी सुधार होता है।

साल 2020 में Ovid में प्रकाशित अध्ययन से भी पता चलता है कि मेडिटेशन करने वाली महिलाओं के ब्लड टेस्ट में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL cholesterol) के स्तर में सुधार दिखा, जो मेनोपॉज के बाद दिल की सेहत (Heart Health) के लिए फायदेमंद हो सकता है और इसका मूड पर भी असर पड़ता है। 

5. टाॅक थेरेपी लें

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कई बार मेनोपाॅज के बाद चिड़चिड़ापन या मूड स्विंग से डील करना महिला के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि आप टाॅक थेरेपी लें या काॅग्निटिव थेरेपी की मदद लें। इसमें आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि आप किस तरह के नेगेटिव सोच से घिरी हुई हैं। परेशानियों को समझकर उनसे डील करना आसान हो जाता है। कई महिलाओं के लिए यह कारगर तरीका होता है।

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6. हार्मोन थेरेपी लें

कई बार जीवनशैली में सुधार और खान-पान में बदलाव करने से भी मेनोपाॅज के बाद हो रहे चिड़चिड़ापन से डील करना मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में आप हार्मोन थेरेपी ले सकते हैं। डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, ‘मेनोपाॅज के बाद इसके लक्षणों को कम करने के लिए कई महिलाएं हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेती हैं। यह कहना गलत होगा कि सब महिलाओं के लिए यह कारगर है। हालांकि, ज्यादातर महिलाओं के लिए यह फायदेमंद हो सकता है। इससे हार्मोन संतुलित होते हैं और मूड भी एन्हैंस होने में मदद मिलती है।’

7. मेडिकल ट्रीटमेंट लें

मेनोपाॅज के बाद चिड़चिड़ापन कम करने के लिए कुछ मामलों में डाॅक्टर मेडिकल ट्रीटमेंट भी दे सकते हैं। इसका मतलब है कि डाॅक्टर जरूरत पड़ने पर नाॅन-हार्मोनल दवाएं दे सकते हैं। ऐसा हर महिला के लिए जरूरी नहीं होता है। आमतौर पर डाॅक्टर मरीज की कंडीशन को देखते हुए दवा देनी है या नहीं, इसका निर्णय लेते हैं।

निष्कर्ष

मेनोपाॅज के बाद चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना कोई हैरानी की बात नहीं है। जिस तेजी से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर गिरता है, ऐसे में मूड स्विंग होना लाजिमी हो जाता है। इसको लेकर महिलाएं परेशान न हों। हां, वे इस संबंध में अपने करीबियों की मदद ले सकती हैं। अगर अपने चिड़चिड़ेपन को संभालना मुश्किल लगे, तो इस संबंध में प्रोफेशनल की मदद लेने में लापरवाही न करें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • मेनोपॉज में मूड स्विंग्स और अवसाद में मुख्य अंतर क्या है?

    मूड स्विंग्स होने पर महिला का मूड बार-बार बदलता रहता है। ऐसा कुछ घंटों या दिनों के लिए हो सकता है, जबकि डिप्रेशन में लगातार 2 सप्ताह या उससे अधिक समय तक उदासी, खालीपन जैसा महसूस होता है।
  • क्या एस्ट्रोजन के अचानक गिरने से मस्तिष्क के सेरोटोनिन केमिकल पर असर पड़ता है?

    एस्ट्रोजन हार्मोन मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामाइन दोनों पर असर डालता है। यह हार्मोन, मूड को नियंत्रित करते हैं। इनके स्तर में कमी आने पर महिला को बार-बार मूड स्विंग्स शुरू हो जाते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jul 31, 2026 19:42 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta

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