Fri Oct 9, 2026 | 11:37 AM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से कैसे निपटें? जानें डॉक्टर से

45 से 55 साल की महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों को समझना और उनसे निपटना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। सही लाइफस्टाइल, संतुलित आहार, एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह से इन लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है। 
मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से कैसे निपटें? जानें डॉक्टर सेमेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से कैसे निपटें? जानें डॉक्टर से

45 से 55 साल की महिलाओं में मेनोपॉज के कारण होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव अक्सर बहुत परेशान करने वाला हो सकता है। इस दौरान कई बार महिलाएं समझ नहीं पाती हैं कि उनके शरीर में होने वाले बदलावों से वे कैसे निपटें? अचानक बहुत तेज गर्मी लगना, चेहरा लाल होना और पसीना आने जैसी समस्याएं होना काफी आम है। बात-बात पर चिड़चिड़ाहट होती है और नींद भी पूरी नहीं हो पाती है।

Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida का कहना है कि महिलाओं के शरीर में होने वाले ये बदलाव मेनोपॉज का स्वाभाविक दौर है। इस समय महिलाओं के शरीर में जब अंडाशय से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स बनना धीमा हो जाता है और धीरे-धीरे पीरियड्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। ऐसे में महिलाएं अपने शरीर में होने वाले बदलावों से कैसे निपटें? आइए इस लेख में जानते हैं।

मेनोपॉज में होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों से कैसे निपटें?

साल 2024 में Journal of Primary Care & Community Health में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों को मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार, सही डाइट और समय पर डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है। इसके अलावा, कैफीन, मसालेदार भोजन, गर्म ड्रिंक और शराब से परहेज करना चाहिए।

Dr. Anju Suryapani के अनुसार, मेनोपॉज को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन सही लाइफस्टाइल, संतुलित खान-पान और डॉक्टर की सलाह को मानकर इसके लक्षणों को बहुत आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।

1. फाइटोएस्ट्रोजेन और कैल्शियम का सेवन बढ़ाएं

महिलाएं मेनोपॉज के दौरान अपनी डाइट में फाइटोएस्ट्रोजेन और कैल्शियम से भरपूर फूड्स को शामिल कर सकती हैं।

  • सोया प्रोडक्ट और अलसी के बीज- सोयाबीन, टोफू और अलसी के बीजों में फाइटोएस्ट्रोजेन होते हैं, जो नेचुरल तरीके से शरीर में एस्ट्रोजन जैसी भूमिका निभाते हैं और हॉट फ्लैशेस की समस्या को कम करते हैं।
  • कैल्शियम और विटामिन D3- दूध, दही, पनीर, रागी और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन बढ़ाएं ताकि हड्डियों को मजबूती मिल सके।
  • प्रोटीन से भरपूर फूड्स- अपने खाने में दालें, अंडे, अंकुरित अनाज और नट्स शामिल करें ताकि मांसपेशियां कमजोर न हों।

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2. हॉट फ्लैशेस को मैनेज करने के तरीके

हॉट फ्लैशेस को मैनेज करना बहुत जरूरी है ताकि रात में नींद में खलल न आए, इसके लिए आप-

  • सूती और ढीले कपड़े पहनें।
  • चाय, कॉफी, ज्यादा मिर्च-मसालेदार खाना और शराब का सेवन कम करें, क्योंकि ये हॉट फ्लैशेस को बढ़ाते हैं।
  • अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखें और दिनभर में 2.5 से 3 लीटर पानी पिएं।

3. नियमित व्यायाम और योग

मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों या समस्याओं से निपटने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग करें। रोजाना 30 से 40 मिनट की वॉक, योग और प्राणायाम करें। वजन कंट्रोल में रखने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या हल्की वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज जरूर करें। इससे हड्डियों को नुकसान पहुंचने की संभावना कम हो जाती है और मूड भी बेहतर रहता है।

4. मेडिटेशन करें

मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल असंतुलन और शरीर में होने वाले बदलावें का असर सीधे दिमाग पर पड़ता है। इसलिए आप मानसिक शांति के लिए अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने के अभ्यास करें, ताकि तनाव और चिड़चिड़ाहट कम हो सके। इसके अलावा, अपनी पसंद के शौक पूरे करें और परिवार व दोस्तों के साथ अपनी परेशानी को शेयर करें।

5. वजाइनल ड्राइनेस का इलाज

मेनोपॉज में महिलाओं में वजाइनल ड्राइनेस की समस्या होना बहुत आम बात है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से वॉटर-बेस्ड ल्यूब्रिकेंट्स या एस्ट्रोजन क्रीम का इस्तेमाल करें। घरेलू या केमिकल वाले साबुन के इस्तेमाल से बचें।

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मेनोपॉज में शारीरिक बदलावों से निपटने के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट

Dr. Anju Suryapani का कहना है कि अगर आपके लक्षण इतने गंभीर हैं कि आपका रूटीन प्रभावित हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर आपकी स्थिति गंभीर होने पर कुछ मेडिकल ट्रीटमेंट करवाने की सलाह दे सकते हैं, जैसे-

  • हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी- गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को डॉक्टर बहुत नियंत्रित मात्रा में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दवाएं देते हैं।
  • सप्लीमेंट्स- डॉक्टर आपको कैल्शियम, विटामिन D3, ओमेगा-3 फैटी एसिड और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दे सकते हैं।

मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव

हार्मोन्स में गिरावट के कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-

  • हॉट फ्लैशेस और नाइट स्वेट्स- अचानक चेहरे, गर्दन और सीने में तेज गर्मी महसूस होना, स्किन का लाल होना और उसके बाद बहुत तेज पसीना आने की समस्या हो सकती है। रात को सोते समय पसीना आने से नींद टूट जाती है।
  • मूड स्विंग्स और मानसिक बदलाव- बिना किसी कारण अचानक गुस्सा आना, उदासी महसूस होना, एंग्जायटी और फोकस में कमी महसूस हो सकती है। एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने से दिमाग में सेरोटोनिन कम बनता है।
  • हड्डियों का कमजोर होना- एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों को मजबूत रखने का काम करता है। मेनोपॉज के बाद हड्डियों की डेंसिटी तेजी से कम होने लगती है, जिससे जोड़ों में दर्द और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
  • वजन बढ़ना और मेटाबॉलिज्म धीमा होना- हार्मोनल असंतुलन के कारण पेट के आस-पास फैट जमा होने लगता है, क्योंकि शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।
  • वजाइनल ड्राइनेस- प्राइवेट पार्ट में ड्राइनेस, खुजली और संबंध बनाते समय दर्द महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।

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मेनोपॉज के दौरान कौन-से टेस्ट करवाने चाहिए?

Dr. Anju Suryapani के मुताबिक, मेनोपॉज की उम्र में पहुंचने पर हर महिला को साल में एक बार ये टेस्ट जरूर करवाने चाहिए, जिनमें शामिल हैं-

  • डेक्सा स्कैन- हड्डियों की मजबूती के बारे में जानने के लिए
  • मैमोग्राफी- ब्रेस्ट हेल्थ की जांच के लिए
  • पैप स्मीयर- गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम के लिए
  • लिपिड प्रोफाइल और HbA1c- कोलेस्ट्रॉल और शुगर के लेवल की जांच के लिए

निष्कर्ष
मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं होती है, बल्कि यह महिलाओं के जीवन का एक पड़ाव होता है। इस दौरान अपने शरीर में हो रहे बदलावों को स्वीकार करें और खुद को प्राथमिकता दें। अगर आप सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज और अपने डॉक्टर की सलाह को फॉलो करके मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से निपट सकते हैं।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • रजोनिवृत्ति के सबसे खराब लक्षण क्या हैं?

    रजोनिवृत्ति या मेनोपॉज के सबसे परेशान करने वाले या गंभीर लक्षणों में ज्यादा थकान, हॉट फ्लैशेस और रात में ज्यादा पसीना आना शामिल हैं।
  • मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को क्या खाना चाहिए?

    मेनोपॉज के दौरान कैल्शियम, विटामिन डी, हेल्दी फैट, फाइबर और साबुत अनाज से भरपूर फूड्स शामिल करें। ये फूड्स हार्मोनल संतुलन को बेहतर रखने और वजन कंट्रोल रखने में मदद कर सकते हैं।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 09, 2026 10:12 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani