Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गर्मियों में कौन-सा आटा है सबसे फायदेमंद? एक्‍सपर्ट से जानें

प्रेग्नेंसी में आयरन, कैल्शियम, फाइबर और प्रोटीन का सेवन जरूरी होता है इसलिए सिर्फ पेट भरने वाला नहीं, बल्कि पोषण देने वाला आटा चुनना जरूरी होता है। जानें प्रेग्नेंसी में बेस्‍ट आटा कौन सा है?

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपनी डाइट का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। गर्मियों में खासतौर पर डाइट पर फोकस करना जरूरी है क्योंकि इस मौसम में डिहाइड्रेशन, थकान, कब्ज और कमजोरी जैसी समस्याएं जल्दी हो सकती हैं। ऐसे में सही आटे का चुनाव मां और होने वाले बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आमतौर पर लोग गेहूं के आटे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आजकल रागी और खपली गेहूं (Emmer Wheat) का आटा भी हेल्दी विकल्प के रूप में काफी पसंद किया जा रहा है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गर्मियों में बेस्‍ट आटे के बारे में जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

प्रेग्नेंसी में फायदेमंद है रागी का आटा

रागी का आटा प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बेहद पौष्टिक माना जाता है। इसमें कैल्शियम, आयरन और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। कैल्शियम बच्चे की हड्डियों के विकास में मदद करता है, जबकि आयरन शरीर में खून की कमी को रोकने में मदद करता है। गर्मियों में रागी शरीर को ठंडक देने में भी मदद कर सकती है। इसका फाइबर डाइजेशन बेहतर रखने और कब्ज की समस्या कम करने में मदद करता है, जो प्रेग्नेंसी में काफी आम होती है।

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गेहूं की जगह खपली गेहूं आटा चुन सकती हैं

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Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि खपली गेहूं के आटे का ग्‍लाइसेमि‍क इंडेक्‍स कम होता है और यह नॉर्मल गेहूं के आटे से ज्‍यादा पोषण देता है। इसमें ग्‍लूटेन की मात्रा भी नॉर्मल गेहूं के आटे के मुकाबले कम होती है और डायब‍िटि‍क मरीजों के ल‍िए यह आटा ज्‍यादा फायदेमंद होता है।

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खपली गेहूं आटा क्‍या होता है?

गेहूंं के आटे की जगह खपली गेहूं का आटा (Khapli Atta or Emmer Wheat Flour) चुन सकते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान जिन महिलाओं को शुगर लेवल कंट्रोल रखने की सलाह दी जाती है, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है। साल 2017 में Journal Of Central European Agriculture नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुतब‍िक, खपली गेहूं के आटे में फाइबर, मिनरल्स और प्रोटीन जैसे पोषक तत्‍व होते हैं जो गर्भवती महिलाओं की बढ़ी हुई पोषण जरूरतों के ल‍िए असरदार माने जाते हैं। हालां‍क‍ि स्टडी में सीधे प्रेग्नेंसी के ल‍िए खपली गेहूं आटा के फायदे नहीं बताए गए हैं।

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खपली गेहूं आटा में फाइबर ज्‍यादा होता है

खपली गेहूं आटा में फाइबर ज्यादा होने के कारण यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है और कब्ज की समस्या को कम करने में भी मदद करता है। हालांकि, अगर किसी महिला को गेहूं से एलर्जी या ग्लूटेन से जुड़ी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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सिर्फ एक ही आटे पर निर्भर न रहें

प्रेग्नेंसी में सिर्फ एक प्रकार के आटे पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग अनाजों को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। ज्वार और बाजरा जैसे अनाज शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व देते हैं।

निष्कर्ष:

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए रागी और खपली गेहूं का आटा दोनों ही फायदेमंद विकल्प हो सकते हैं। रागी कैल्शियम और आयरन का अच्छा स्रोत है, जबकि खपली गेहूं ज्यादा फाइबर और बेहतर डाइजेशन के लिए जाना जाता है। इसके अलावा ज्वार और बाजरा का भी सेवन कर सकती हैं।

FAQ

  • प्रेग्नेंसी में मल्‍टीग्रेन आटा खा सकते हैं?

    प्रेग्नेंसी में मल्टीग्रेन आटा खाया जा सकता है। यह डाइजेशन बेहतर रखने और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है।
  • केवल गेहूं का आटा खाने के नुकसान क्‍या हैं?

    सिर्फ गेहूं का आटा खाने से शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। केवल गेहूं खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 29, 2026 16:46 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 29, 2026 16:46 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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