Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

प्रेग्नेंसी में बार-बार जंक फूड खाने की लत पड़ सकती है भारी, हो सकते हैं ये नुकसान

क्‍या आपको भी प्रेग्नेंसी में बार-बार जंक फूड खाने का मन करता है? जानें यह लत कैसे सेहत पर भारी पड़ती है? डॉक्‍टर से जानें बचाव के ल‍िए क‍िन उपायों की लें मदद?

प्रेग्नेंसी में क्रेव‍िंग्‍स होना आम बात है, लेक‍िन कई मह‍िलाएं इसे सामान्‍य समझकर अपनी पसंदीदा चीजों का ज्‍यादा सेवन करने लगती हैं। इससे सेहत ब‍िगड़ सकती है। बार-बार क्रेव‍िंग्‍स होने पर बाहर का खाना अच्‍छी आदत नहींं है, इससे सेहत बि‍गड़ सकती है खासकर प्रेग्नेंसी के दौरान जब मह‍िलाओंं को पोषक तत्‍वोंं की सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है। इस दौरान बाहर का तला-भुना और हैवी भोजन का सेवन करने से सेहत खराब हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें प्रेग्नेंसी में बार-बार जंक फूड खाने की लत सेहत को कैसे खराब कर सकती है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

प्रेग्नेंसी में जंंक फूड खाकर मोटापा, हाई बीपी, डायब‍िटीज का खतरा

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  1. जंंक फूड में कैलोरी, शुगर और अनहेल्‍दी फैट्स होते हैं ज‍िससे प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ सकता है।
  2. ज्‍यादा जंक फूड जैसे शुगरी ड्र‍िंक्‍स, प्रोसेस्‍ड स्‍नैक्‍स वगैरह का सेवन करने से ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है और जेस्‍टेशनल डायब‍िटीज का खतरा बढ़ जाता है।
  3. जंंक फूड्स में नमक की मात्रा ज्‍यादा होती है ज‍िससे ब्‍लड प्रेशर असामान्‍य हो सकता है और प्रीएक्लेम्पसिया का खतरा बढ़ सकता है।
  4. जंक फूड्स में पोषक तत्‍व जैसे आयरन, फोल‍िक एस‍िड, कैल्‍श‍ियम, प्रोटीन वगैरह की कमी होती है जो क‍ि बच्‍चे की ग्रोथ के ल‍िए जरूरी हैं।
  5. साथ ही जंंक फूड का सेवन करने से शरीर में पोषक तत्‍वोंं की कमी भी हो सकती है। प्रेग्नेंसी में शरीर को आयरन, व‍िटाम‍िन्‍स और अन्‍य जरूरी पोषक तत्‍वों की व‍िशेष जरूरत होती है।
  6. अगर प्रेग्नेंसी के दौरान जंंक फूड्स का ज्‍यादा सेवन करेंगी, तो होने वाला श‍िशु भी मोटापे का श‍िकार हाे सकता है।
  7. प्रोसेस्‍ड और फ्राइड फूड्स से कब्‍ज, ब्‍लोटि‍ंग, एस‍िड‍िटी जैसी समस्‍याएं ज्‍यादा परेशान कर सकती हैं, क्‍योंंक‍ि ये समस्‍याएं पहले से ही प्रेग्नेंसी के दौरान हो रही होती हैं और ऐसी चीजों का सेवन करने से ज्‍यादा बढ़ सकती हैं।
  8. जंक फूड्स का सेवन ज्‍यादा करेंगी, तो हर समय थकान महसूस होगी, मूड‍ स्‍व‍िंंग्‍स की श‍िकायत रहेगी और शरीर में सूजन भी बढ़ सकती है।
  9. प्रेग्नेंसी में र‍िफाइंड कार्ब्स, ट्रांस फैट्स का अध‍िक सेवन करने से सूजन बढ़ सकती है और सेहत खराब हो सकती है।

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प्रेग्नेंसी में हेल्‍दी व‍िकल्‍प चुनें

साल 2013 में Birth नामक एक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, जिन महिलाओं ने प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा जंक फूड खाया, उनके बच्चों का जन्म के समय वजन चार किलोग्राम से ज्‍यादा होने की संभावना पाई गई। इसल‍िए प्रेग्नेंसी में जंंक फूड खाने के बजाय ये हेल्‍दी व‍िकल्‍प चुनें-

  • कैंडीज या म‍ीठी डेजर्ट्स को खाने के बजाय ताजे फल खाएंं।
  • च‍िप्‍स की जगह होममेड पॉपकार्न खाएंं।
  • आइसक्रीम की जगह दही और नट्स खाएं।
  • बर्गर या प‍िज्‍जा की जगह होल ग्रेन सैंडव‍िच खाएं।
  • कोल्‍ड ड्र‍िंक्‍स की जगह ताजी स्‍मूदीज का सेवन करें।

न‍िष्‍कर्ष:

प्रेग्नेंसी में क्रेव‍िंग्‍स होने पर कभी-कभार जंक फूड का सेवन क‍िया जा सकता है, लेक‍िन आए द‍िन जंक फूड का सेवन करने से मह‍िला मोटापा, हाई बीपी, डायब‍िटीज जैसी बीमा‍र‍ियोंं का श‍िकार हो सकती है, शरीर में पोषक तत्‍वों की कमी हो सकती है, सूजन बढ़ सकती है और पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं।

FAQ

  • प्रेग्नेंसी में ज्‍यादा कैफीन लेने के नुकसान क्‍या हैं?

    प्रेग्नेंसी में ज्‍यादा कैफीन लेने से ड‍िहाइड्रेशन और एस‍िड‍िटी की समस्‍या बढ़ सकती है और पोषक तत्‍वों के एब्‍जॉर्ब होने की प्रक्र‍िया में रुकावट आ सकती है।
  • प्रेग्नेंसी में कौन से पोषक तत्‍व शरीर के ल‍िए जरूरी होते हैं?

    प्रेग्नेंसी में शरीर को फोल‍िक एस‍िड, आयरन, कैल्‍श‍ियम, प्रोटीन, व‍िटाम‍िन डी, ओमेगा 3 फैटी एस‍िड जैसे पोषक तत्‍वों की जरूरत होती है। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 21, 2026 19:03 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 21, 2026 19:03 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal

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