चेहरे पर काले या भूरे धब्बे और असमान स्किन का रंग आमतौर पर झाइयां या हाइपरपिग्मेंटेशन के रूप में जाना जाता है। स्किन पर पिग्मेंटेशन होना न सिर्फ आपकी खूबसूरती को कम करता है, बल्कि आपके आत्मविश्वास को भी कम करता है। पिग्मेंटेशन की समस्या तब होती है, जब स्किन में रंग देने वाले पिग्मेंट मेलेनिन का प्रोडक्शन कुछ हिस्सों में ज्यादा हो जाती है। पिग्मेंटेशन होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और इसका इलाज भी कारणों को समझकर ही हो सकता है। इसलिए, आइए इस लेख में हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं कि झाइयां क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
चेहरे पर पिग्मेंटेशन होने के कारण
साल 2023 में Molecules जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, पिग्मेंटेशन होने के तीन प्रमुख कारण हैं, जिसमें जेनेटिक, धूप का संपर्क और कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट है। इसके अलावा, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनल बदलाव और उम्र का बढ़ना भी हाइपरपिग्मेंटेशन का कारण बनते हैं। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, पिग्मेंटेशन होने के अन्य कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
1. ब्लड का इम्पुरिफाई होना
जब शरीर के अंदर खून पूरी तरह साफ नहीं होता है या उसमें टॉक्सिन्स बढ़ जाते हैं तो इसका असर चेहरे की रंगत पर दिखता है और झाइयां होने लगती हैं। इसके लिए ब्लड को साफ करने की जरूरत होती है।
2. हार्मोनल असंतुलन
महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव होना झाइयों की समस्या का एक बड़ा कारण है। प्रेग्नेंसी, पीरियड्स या तनाव के दौरान हार्मोन्स असंतुलन होने से चेहरे पर काले या भूरे धब्बे उभर आते हैं।
3. शरीर में पित्त बढ़ना
आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में पित्त यानी ज्यादा गर्मी बढ़ जाती है तो स्किन में मेलानिन पिगमेंट तेजी से बनने लगता है, जिससे झाइयों की समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।
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4. धूप के संपर्क में आना
चेहरे पर पिग्मेंटेशन का सबसे आम कारण सूरज की हानिकारक यूवी किरणें हैं। धूप स्किन की मेलेनोसाइट सेल्स को ज्यादा मेलेनिन बनाने के लिए बढ़ावा देती है। इससे स्किन पर मौजूद काले धब्बे और ज्यादा गहरे हो सकते हैं और समय के साथ नए धब्बे के रूप में नजर आ सकते हैं। इतना ही नहीं, लंबे समय तक धूप में रहने से सनस्पॉट या सोलर लेंटिजिन्स की समस्या भी हो सकती है, जो आमतौर पर चेहरे और शरीर के पर धूप लगने वाले हिस्सों पर दिखाई देते हैं।
5. मेलास्मा
मेलास्मा चेहरे पर होने वाली एक नॉर्मल पिग्मेंटेशन समस्या है। इसमें अक्सर गालों, माथे, नाक या ऊपरी होंठ के आसपास दोनों तरफ एक जैसे भूरे या गहरे पैच दिखाई देते हैं। सूरज की रोशनी के कारण ये ट्रिगर हो सकता है। इसके अलावा, हार्मोनल बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।
6. मुंहासों और त्वचा की सूजन के बाद
पिंपल, एक्ने, एक्जिमा, रैशेज या स्किन पर किसी चोट के ठीक होने के बाद उसी जगह पर भूरा या काला निशान रह सकता है। इसे पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है। यह गहरी स्किन वाले लोगों में ज्यादा साफ और लंबे समय तक रह सकता है। इसलिए, पिंपल को बार-बार दबाना या स्किन को खरोंचने के कारण भी यह समस्या बढ़ सकती है।
7. गलत स्किनकेयर
स्किनकेयर रूटीन में ऐसे प्रोडक्ट चुनना, जो स्किन में जलन या चुभन जैसा एहसास पैदा करते हैं, स्किन की सूजन को बढ़ा सकते हैं। इस सूजन के बाद चेहरे पर नजर आने वाले पिग्मेंटेशन और गहरे हो सकते हैं। खासकर सेंसिटिव स्किन में बहुत ज्यादा एक्सफोलिएशन या कई एक्टिव इंग्रेडिएंट्स एक साथ इस्तेमाल करने से समस्या बढ़ सकती है।
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8. कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट
कुछ दवाएं भी स्किन पर पिग्मेंटेशन का कारण बन सकती है। कुछ एंटीमलेरियल, कीमोथेरेपी दवाएं और अन्य दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण स्किन का रंग बदल सकता है।
पिग्मेंटेशन से बचने के लिए उपाय
डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, पिग्मेंटेशन से बचने के लिए आप इन बातों का ध्यान रखें:
1. रोजाना सनस्क्रीन लगाएं
पिग्मेंटेशन से बचाव के लिए जरूरी है कि आप सनस्क्रीन सबसे अहम भूमिका निभाती है। कम से कम SPF 30 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम, वॉटर-रेसिस्टेंट सनस्क्रीन इस्तेमाल करें और बाहर जाने से लगभग 15 मिनट पहले इसे अपनी स्किन पर लगाएं। अगर आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं तो इसे कम से कम दो घंटे बा दोबारा लगाएं।
2. धूप से बचाव करें
सिर्फ सनस्क्रीन पर निर्भर रहने के बजाय तेज धूप में छाता, टोपी और यूवी प्रोटेक्टिव सनग्लासेस का इस्तेमाल करें। अगर संभव हो तो दोपहर की तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचें।
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3. पिंपल को न दबाएं
एक्ने को दबाने या नाखून से छेड़ने से सूजन और स्किन को नुकसान पहुंच सकता है, जिसके कारण डार्क स्पॉट बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, एक्ने का सही ट्रीटमेंट करना पिग्मेंटेशन को रोकने में मदद कर सकता है।
4. घरेलू नुस्खों से बचें
पिग्मेंटेशन से बचाव के लिए नींबू, बेकिंग सोडा या बहुत कठोर स्क्रब जैसे घरेलू उपाय स्किन में जलन पैदा कर सकते हैं। नेचुरल होना हमेशा स्किन के लिए सुरक्षित नहीं होता है। खासकर पिग्मेंटेशन वाली स्किन के लिए।
कब डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए?
अगर पिग्मेंटेशन लगातार बढ़ रहा है, बहुत तेजी से बदल रहा है, असामान्य आकार या रंग का है, खुजली या घाव के साथ है या फिर स्किनकेयर के बाद भी लंबे समय तक बना हुआ है तो डर्मेटोलॉजिस्ट से जांच कराना बेहतर होता है। चेहरे के हर काले धब्बे को नॉर्मल पिग्मेंटेशन मानना सही नहीं है, क्योंकि अलग-अलग स्किन से जुड़ी बीमारी भी एक जैसे दिखाई दे सकते हैं।
निष्कर्ष
चेहरे के पिग्मेंटेशन के पीछे ब्लड से जुड़ी समस्या, धूप, शरीर में धूप बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन, एक्ने या सूजन के बाद बने निशान, स्किन में जलन और कुछ दवाएं जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसकी रोकथाम के लिए रोजाना सनस्क्रीन लगाना, धूप से बचाव, सही स्किन केयर रूटीन और पिंपल्स को न छेड़ना जरूरी है। अगर पिग्मेंटेशन लगातार बढ़ रहा है या बार-बार हो रहा है तो इसके होने के कारण की सही पहचान करना जरूरी है।
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FAQ
पिग्मेंटेशन किसकी कमी से होता है?
पिग्मेंटेशन किसी चीज की कमी के कारण नहीं, बल्कि स्किन में मेलानिन पिगमेंट के बढ़ने या उसके असमान होने के कारण होता है। हालांकि, कुछ खास पोषक तत्वों जैसे विटामिन बी12 और विटामिन सी की कमी भी स्किन पर काले धब्बे या पिग्मेंटेशन का कारण बन सकती है।चेहरे पर पिग्मेंटेशन हो जाए तो क्या करें?
चेहरे पर पिग्मेंटेशन होने पर बसे पहले रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल शुरू करें और स्किन एक्सपर्ट से मिलकर सही इलाज लेने की कोशिश करें।
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Sep 04, 2026 22:28 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Shrey Sharma
