आपने कई बार नोटिस किया होगा कि कील-मुंहासों ठीक होने के बाद भी अक्सर चेहरे पर कुछ काले धब्बे रह जाते हैं, जो कि त्वचा के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक गहरे दिखाई देते हैं। इसे ही हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है। हाइपरपिग्मेंटेशन एक बेहद आम समस्या है, लेकिन लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती कम होती है, बल्कि त्वचा पर स्थायी दाग भी हो सकता है। आइए, जानते हैं कि असल में हाइपरपिग्मेंटेशन क्या है और इसके कारण, लक्षण तथा इलाज क्या हो सकते हैं? इस बारे में जानने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की।
हाइपरपिग्मेंटेशन क्या है?- What Is Hyperpigmentation
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डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "हाइपरपिग्मेंटेशन कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि त्वचा में मेलेनिन बनने की प्रक्रिया में बदलाव का परिणाम है। दरअसल, जब त्वचा के किसी हिस्से में मेलेनिन सामान्य से अधिक बनने लगता है, तो वह हिस्सा आसपास की त्वचा की तुलना में अधिक गहरा दिखाई देता है। यह समस्या चेहरे के अलावा गर्दन, हाथों, बाजुओं, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी हो सकती है। इसी स्थिति को हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है। कई लोग इसे केवल कॉस्मेटिक से जुड़ी समस्या मान लेते हैं और घर में ही इसका खुद से इलाज करने लगते हैं। यह सही नहीं है।"
National Cancer Institute के अनुसार जिसमें त्वचा के कुछ हिस्से बाकी त्वचा की तुलना में अधिक गहरे (काले) हो जाते हैं। आमतौर पर ऐसा तब होता है, जब त्वचा में मौजूद विशेष सेल्स मेलानिन का प्रोडक्शन काफी ज्यादा करने लगते हैं।
हाइपरपिग्मेंटेशन के प्रमुख कारण- Hyperpigmentation Causes
1. धूप के संपर्क में अधिक रहना
सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें मेलेनिन के उत्पादन को बढ़ा देती हैं। लंबे समय तक बिना सनस्क्रीन के धूप में रहने से सन स्पॉट्स और पिग्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।
2. मुंहासों या चोट के बाद निशान
मुंहासे, जलने, कटने या किसी अन्य त्वचा संबंधी सूजन के बाद गहरे रंग के निशान रह जाना पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन कहलाता है।
3. हार्मोनल बदलाव
Cleveland Clinic के अनुसार गर्भावस्था, मेनोपॉज, गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोनल असंतुलन के कारण मेलाज्मा हो सकता है, जिसमें खासतौर पर गाल, माथे और ऊपरी होंठ पर भूरे धब्बे दिखाई देते हैं।
4. बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पर एज स्पॉट्स या लिवर स्पॉट्स विकसित हो सकते हैं, जो लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने का परिणाम होते हैं।
5. गलत स्किनकेयर
बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड क्रीम, तेज केमिकल्स या बार-बार स्क्रब करने से त्वचा में जलन होकर पिग्मेंटेशन बढ़ सकता है।
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हाइपरपिग्मेंटेशन के लक्षण- Hyperpigmentation Symptoms
हाइपरपिग्मेंटेशन के लक्षण हर व्यक्ति पर अलग हो सकते हैं। असल में, यह कारण पर निर्भर करते हैं। इसके लक्षणों की बात करें-
- चेहरे या शरीर पर भूरे या काले रंग के धब्बे नजर आना
- मुंहासों के बाद लंबे समय तक दाग का बने रहना
- धूप में जाते ही चेहरे के धब्बों का और गहरा हो जाना
- त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग असमान होना
- माथे, गाल, नाक और ऊपरी होंठ पर पैच के रूप में पिग्मेंटेशन
- आमतौर पर इसमें दर्द या खुजली नहीं होती, लेकिन त्वचा का रंग असमान दिखने के कारण आत्मविश्वास प्रभावित हो सकता है।
हाइपरपिग्मेंटेशन का इलाज कैसे किया जाता है?- Hyperpigmentation Treatment
हाइपरपिग्मेंटेशन का ट्रीटमेंट भी इसके कारण पर निर्भर करता है। साथ ही इसकी गहराई और त्वचा के प्रकार से भी इसका इलाज तय होता है-
- सबसे पहले रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एसपीएफ 30 या उससे अधिक सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी है।
- डॉक्टर की सलाह पर डिपिग्मेंटिंग क्रीम, विटामिन-सी, एजेलिक एसिड, कोजिक एसिड, ट्रानेक्सामिक एसिड या रेटिनॉइड्स जैसी दवाएं दी जा सकती हैं।
- जरूरत पड़ने पर केमिकल पील्स, पिको लेजर, माइक्रोनीडलिंग या अन्य आधुनिक डर्मेटोलॉजिकल प्रक्रियाओं की सलाह दी जा सकती है।
- हार्मोनल कारण होने पर मूल समस्या का इलाज भी आवश्यक होता है।
डाॅक्टर की सलाह
ध्यान रखें कि हाइपरपिग्मेंटेशन का इलाज तुरंत परिणाम देने वाला नहीं होता। त्वचा में सुधार आने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। डॉ. करुणा मल्होत्रा इस संबंध में सलाह देती हैं, ‘हर हाइपरपिग्मेंटेशन एक जैसा नहीं होता और हर मरीज का इलाज भी अलग होता है। यदि पिग्मेंटेशन लंबे समय तक बना रहे या लगातार बढ़ रहा हो, तो घरेलू नुस्खों पर समय बर्बाद करने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। सही समय पर शुरू किया गया उपचार बेहतर और लंबे समय तक टिकने वाले परिणाम देता है।’
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
- धब्बे तेजी से बढ़ रहे हों।
- पिग्मेंटेशन अचानक बिना किसी स्पष्ट कारण के शुरू हुआ हो।
- घरेलू उपाय या ओवर-द-काउंटर क्रीम इस्तेमाल करने के बाद भी सुधार न हो।
- धब्बों के साथ खुजली, दर्द, खून आना या त्वचा का आकार बदलना शुरू हो जाए।
- गर्भावस्था या हार्मोनल बदलाव के दौरान पिग्मेंटेशन तेजी से बढ़ रहा हो।
- त्वचा पर नया काला धब्बा बन रहा हो या पुराने तिल में बदलाव दिखाई दे।
हाइपरपिग्मेंटेशन से बचाव के लिए क्या करें?
- रोजाना सनस्क्रीन लगाएं, चाहे मौसम कैसा भी हो।
- धूप में निकलते समय टोपी, छाता और सनग्लासेस का उपयोग करें।
- मुंहासों को बार-बार छूने या फोड़ने से बचें।
- संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी स्किन लाइटनिंग या स्टेरॉयड क्रीम इस्तेमाल न करें।
- अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार स्किनकेयर रूटीन अपनाएं।
- त्वचा की सही देखभाल है सबसे बड़ा बचाव
निष्कर्ष
हाइपरपिग्मेंटेशन एक सामान्य समस्या है, लेकिन ये दाग बहुत जिद्दी होते हैं, जो कि आसनी से नहीं निकलते हैं। इसे छिपाने के बजाय इसके कारण को समझना और समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना बहुत जरूरी होता है। सही उपचार, धैर्य और नियमित सन प्रोटेक्शन से अधिकांश मामलों में त्वचा का रंग काफी हद तक समान किया जा सकता है।
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FAQ
क्या डाइट में बदलाव करके हाइपरपिग्मेंटेशन को कम किया जा सकता है?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर भोजन चीजें खाने से को फ्री-रेडिकल्स से बचाया जा सकता यही।क्या लेजर थेरेपी हाइपरपिग्मेंटेशन को पूरी तरह ठीक हो कर देते हैं?
नहीं, लेजर पिग्मेंटेशन को रिमूव कर सकता है या हल्का कर देता है। इसके बावजूद हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या दोबारा हो सकती यही। इसलिए उसके कारणों पर गौर करना जरूरी है।
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Jul 31, 2026 13:59 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 31, 2026 13:59 IST
Modified By : Meera TagoreJul 31, 2026 13:59 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra