पिग्मेंटेशन एक ऐसी समस्या है, जिसमें त्वचा में दाग-धब्बे हो जाते हैं। इससे स्किन का कलर इवेन नजर नहीं आता है, जो कि चेहरे की खूबसूरती को प्रभावित करता है। यही कारण है कि लोग अक्सर अपनी समस्या का समाधान करने के लिए अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाते हैं। हैरानी की बात यह है कि कई लोगों में पिग्मेंटेशन ट्रीटमेंट के बाद दोबारा हो जाता है। ऐसे में यह सवाल जरूर मन में उठता है कि आखिर यह समस्या वापस क्यों आ जाती है? क्या इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है? आइए, जानते हैं कि राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा की राय।
इलाज के बाद पिग्मेंटेशन वापस आने के कारण
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यह पूरी तरह सच है कि पिग्मेंटेशन ट्रीटमेंट के बावजूद दोबारा लौट सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पिग्मेंटेशन के मुख्य कारण का समाधान नहीं किया जाता है, बल्कि इस स्थिति को कंट्रोल पर अधिक जोर दिया जाता है। आइए, समझते हैं इसके कारणों को-
हार्मोनल बदलाव
कई ऐसी स्किन कंडीशन्स होती हैं, जो कि हर्मोनल बदलाव के कारण ट्रिगर होते हैं, जैसे मेलासमा। यह एक हार्मलेस स्किन कंडीशन है, जिसमें त्वचा में दाग-धब्बे, डार्क स्पॉट्स और हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या हो जाती है। चूंकि, यह क्राॅनिक है और इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए कंडीशन को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है। इस संबंध में साल 2010 में PubMed Central (The Journal of Clinical and Aesthetic Dermatology) में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च जर्नल के अनुसार हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी समस्या में सबसे पहले सूजन या मूल बीमारी का इलाज किया जाता है। हालांकि, इस संबंध में रिसर्च में स्पष्ट कहा गया है कि पिग्मेंटेशन होने पर किसी भी तरह की क्रीम को चेहरे पर लगाने से पहले सावधानी बरतें। कई बार क्रीम के उपयोग से जलन होने लगती है।
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धूप में अत्यधिक समय बिताना
जो लोग बहुत ज्यादा धूप में समय बिताते हैं, उनमें पिग्मेंटेशन की समस्या बार-बार होती है। साल 2023 में Molecules में प्रकाशित रिव्यू पेपर के अनुसार जब कोई बहुत अधिक समय सूरज की रोशनी में बिताता है, तो उसकी अल्ट्रावायलेट रेज त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाती है। दरअसल, बार-बार और बहुत लंबे समय तक बिना किसी सनस्क्रीन के तेज धूप में रहने से त्वचा के कुछ हिस्सों में मेलेनिन प्रोडक्शन असमान हो जाता है। नतीजतन, हाइपरपिग्मेंटेशन, झाइयां या मेलास्मा और एज स्पॉट्स होने लगते हैं।
अधूरा ट्रीटमेंट
अगर कोई व्यक्ति पिग्मेंटेशन का ट्रीटमेंट अधूरा छोड़ देता है, तो बाद यह स्थिति दोबारा पैदा हो जाती है। डॉ. करुणा मल्होत्रा इसे समझाती हैं, ‘अगर कोई ट्रीटमेंट को पूरा नहीं कर रहा है, लेकिन अक्सर सूरज के संपर्क में रहता है और बॉडी में हार्मोनल बदलाव हो रहे हैं, तो पिग्मेंटेशन की समस्या दोबारा हो सकती है। यही कारण है कि लोगो को अपना ट्रीटमेंट बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। खासकर, मेलाजमा जैसी कंडीशन को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। यह क्रॉनिक कंडीशन बन जाती है, जिसे ठीक होने में लंबा समय लगता है।’
त्वचा में सूजन
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अगर त्वचा पर सूजन, कील-मुंहासे, जलन और खुजली जैसी समस्याएं हैं, तो ऐसे में त्वचा पिग्मेंटेशन की समस्या दोबारा हो सकती है। इस स्थिति को पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है। साल 2024 में PubMed में प्रकाशित मेडिकल जर्नल StatPearls में प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन त्वचा पर होने वाली सूजन या चोट के बाद बनने वाले दाग-धब्बे हैं। हालांकि यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन इसे ठीक होने में महीनों ही नहीं, सालों भी लग सकते हैं।
अनुवांशिक
आपको यह जानकारी पहले से ही होगी कि हमारी त्वचा का रंग अनुवांशिकी कारणों पर निर्भर करता है। साल 2023 में Molecules में प्रकाशित जर्नल आर्टिकल के अनुसार हमारे शरीर में लगभग 125 ऐसे जींस हैं, जो स्किन टोन को प्रभावित करते हैं। ये जींस और हार्मोन्स तय करते हैं कि हमारी त्वचा की कोशिकाएं कितना मेलेनिन बनाएंगी। गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में मेलेनिन की मात्रा अधिक होती है। इसका मतलब है कि गर कोई बार-बार किसी विशेष किस्म के क्रीम या ट्रीटमेंट के जरिए पिग्मेंटेशन की समस्या से राहत पाना चाहता है, तो भी कुछ समय बाद लौट सकती है।
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पिग्मेंटेशन की समस्या को कैसे मैनेज करें?
पिग्मेंटेशन की समस्या क्यों हो रही है, यह जानना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। उसके मुख्य कारणों को जानकर समस्या का समाधान कर सकते हैं। बहरहाल, कुछ टिप्स की मदद से इस कंडीशन को कुछ हद तक मैनेज किया जा सकता है, जैसे-
- सनस्क्रीन जरूर लगाएंः जब भी घर से बाहर निकलें, तो ऐसा सनस्क्रीन लगाएं, जिसमें जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम ऑक्साइड हो। ध्यान रखें कि सूरज मेलानिन के प्रोडक्शन को बढ़ा देता है। वहीं, सनस्क्रीन से त्वचा की रक्षा होती है।
- एंटीऑक्सीडेंट सीरम लगाएंः पिग्मेंटेशन की समस्या को कम करने क लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त सीरम लगाएं। विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन सी युक्त सीरम त्वचा की रंगत में भी सुधार करता है।
- स्किन बैरियर की प्रोटेक्शनः चूंकि, सूजन के कारण भी पिग्मेंटेशन की समस्या ट्रिगर होती है। इसे रोकने और मेलेनिन के उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए नियासिनमाइड (विटामिन B3) का उपयोग अपनी त्वचा पर करें। हालांकि, संबंध में एक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें।
- एक्सफोलिएट करेंः पिग्मेंटेशन से दो-चार हो रहे लोग अक्सर अपनी त्वचा को ओवर एक्सफोलिएट करते हैं। आप ऐसा न करें। हालांकि, एक्सफोलिएट करने से त्वचा की रंगत बेहतर होती है, डार्क स्पाॅट कम होते हैं। ध्यान रखें कि एक्सफोलिएट की मदद से डेड सेल्स रिमूव होते हैं। डेड सेल्स हटाने के लिए सप्ताह में एक बार लैक्टिक या ग्लाइकोलिक एसिड जैसे हल्के केमिकल एक्सफोलिएंट्स फायदेमंद होते हैं।
निष्कर्ष
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पिग्मेंटेशन की समस्या बार-बार हो सकती है। यहां तक कि ट्रीटमेंट के बाद यह लौट सकता है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे बार-बार धूप के संपर्क में आना। अगर आपके त्वचा रंगत में सुधार नहीं हो रहा है, तो अपनी जीवनशैली में थोड़े-बहुत सुधार करें, उपरोक्त दिए गए टिप्स अपनाएं और डाॅक्टर से अपना प्रापर ट्रीटमेंट करवाएं। ट्रीटमेंट कभी भी आधा न छोड़ें। संभवतः पिग्मेंटेशन में कमी आने लगेगी।
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FAQ
क्या खान-पान या डाइट में गड़बड़ी के कारण भी पिग्मेंटेशन की समस्या बढ़ सकती है?
हां, शरीर में विटामिन B12, विटामिन डी और आयरन की कमी के कारण हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या हो सकती है।क्या लैपटॉप, मोबाइल की ब्लू लाइट से भी फाइन लाइन्स वापस आ सकते हैं?
हां, मोबाइल, लैपटॉप और LED स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट भी त्वचा के मेलेनिन को ट्रिगर कर सकती है।
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Jul 15, 2026 10:32 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra