Thu Oct 1, 2026 | 04:59 AM IST

Medically Reviewed by Dr Shireen Furtado , Sr. Consultant – Medical & Cosmetic Dermatology

पिग्मेंटेशन और टैनिंग में क्या अंतर है? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें

गर्मियों में धूप से त्वचा के रंग में बदलाव आम है, लेकिन टैनिंग और पिग्मेंटेशन दो अलग-अलग स्थितियां हैं, जिनमें मेलानिन की भूमिका होती है। इनके कारणों, अंतर और बचाव के उपायों पर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. शिरीन ने प्रकाश डाला है।
पिग्मेंटेशन और टैनिंग में क्या अंतर है? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानेंपिग्मेंटेशन और टैनिंग में क्या अंतर है? डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें

गर्मियों में धूप में निकलने के बाद स्किन के रंग में बदलाव आना एक आम समस्या है। कई बार लोगों को लगता है धूप में रहने के कारण स्किन का डार्क होना ही पिग्मेंटेशन है, जबकि कुछ लोग काले-धब्बों को टैनिंग समझ लेते हैं, लेकिन दोनों स्थितियां अलग होती हैं और इनमें मेलानिन की अहम भूमिका होती है। इसके कारण ही त्वचा के कालेपन की ड्यूरेशन अलग हो सकती है। ऐसे में इन दोनों की स्थितियों को समझना जरूरी हो जाता है कि इनके क्या कारण हो सकते हैं। ऐसे में आइए इस बारे में Dr. Shireen Furtado, Sr. Consultant - Medical & Cosmetic Dermatology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।

टैनिंग और पिग्मेंटेशन में अंतर

Dr. Shireen Furtado के अनुसार, टैनिंग और पिग्मेंटेशन दोनों ही स्किन से जुड़ी समस्याएं हैं। दोनों आपस में जुड़े हुए हैं, क्योंकि दोनों में मेलेनिन शामिल होता है। यह एक नेचुरल पिग्मेंट है, जो हमारी स्किन को रंग देता है। इनके कारण लोगों को स्किन में कालापन आने और स्किन से जुड़ी कई अन्य परेशानियां हो सकती हैं।

  टैनिंग पिग्मेंटेशन
कारण खासकर यूवी किरणों के संपर्क में आने, मेलेनिन का अधिक प्रोडक्शन होने। धूप के कारण मेलेनिन का अधिक प्रोडक्शन होने, हार्मोनल बदलाव, जेनेटिक्स से जुड़ी सूजन, मुंहासे, चोट, कुछ दवाइयों या त्वचा की स्थितियां।
लक्षण अक्सर धूप में रहने वाले बड़े हिस्से का रंग गहरा होना। दाग, धब्बे, पैच या त्वचा का असमान रंग।
ड्यूरेशन धूप कम होने पर धीरे-धीरे हल्का हो सकती है। कारण के आधार पर लंबे समय तक रह सकती है।
त्वचा पर असर धूप में रहने के बाद हाथ या चेहरे का रंग गहरा होना।

मेलास्मा या मुंहासों के बाद बने गहरे निशान।

शरीर के किस हिस्से पर दिखते हैं  मुख्य रूप से शरीर के उन हिस्सों को प्रभावित करता है, जो धूप के संपर्क में आते हैं, जैसे चेहरा, गर्दन, हाथ और पैर। कारण के आधार पर, यह आपके शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, जैसे चेहरा, हाथ, गर्दन, पीठ, हथेलियां या शरीर के अन्य हिस्से।

टैनिंग क्या होती है?

Dr. Shireen के अनुसार, टैनिंग आमतौर पर सूरज की रोशनी, खासकर धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट यानी यूवी किरणों के संपर्क में आने के बाद त्वचा के रंग के गहरा होने को कहा जाता है। जब त्वचा को यूवी किरणों का सामना करना पड़ता है, तो शरीर सुरक्षा के लिए अधिक मेलानिन बनाने लगता है। मेलानिन त्वचा को उसका नेचुरल रंग देने वाला पिग्मेंट है और UV किरणों से बचाव में भी अहम भूमिका निभाता है।

टैनिंग अक्सर उन हिस्सों में दिखाई देती है, जो धूप के सीधे संपर्क में रहते हैं, जैसे चेहरा, गर्दन, हाथ और पैर। धूप से संपर्क कम होने पर त्वचा की नेचुरल प्रक्रिया के साथ टैन धीरे-धीरे हल्का हो सकता है।

हालांकि, बार-बार और ज्यादा यूवी एक्सपोजर को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता है। लंबे समय तक तेज धूप त्वचा की समय से पहले उम्र बढ़ने, झुर्रियों, स्किन रंग के अनइवन होने और त्वचा कैंसर के खतरे से जुड़ी है।

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पिग्मेंटेशन क्या है?

Dr. Shireen बताती हैं, पिग्मेंटेशन एक व्यापक शब्द है। इसका मतलब त्वचा के किसी हिस्से का आस-पास की त्वचा की तुलना में अधिक गहरा या हल्का दिखाई देना हो सकता है। त्वचा में अधिक रंग बनने पर हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या हो सकती है, जबकि कुछ स्थितियों में त्वचा का रंग हल्का भी पड़ सकता है।

पिग्मेंटेशन के कई कारण हो सकते हैं। इनमें धूप में रहना, हार्मोनल बदलाव, मुंहासों के बाद पड़े निशान, त्वचा में सूजन या चोट, कुछ दवाएं और मेलास्मा जैसी स्किन से जुड़ी कुछ स्थितियां शामिल हैं। मेलास्मा भी पिग्मेंटेशन की एक आम समस्या है, जिसमें चेहरे पर गहरे रंग के पैच दिखाई दे सकते हैं।

पिग्मेंटेशन के कारण

साल 2023 में Molecules Journal में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, त्वचा का काला पड़ना या पिग्मेंटेशन एक आम समस्या है, जो कई अलग-अलग वजहों से हो सकती है। इसके तीन मुख्य कारण हैं - जेनेटिक्स, धूप में रहना और कुछ खास दवाइयां।

क्या दोनों एक साथ हो सकते हैं?

Dr. Shireen के अनुसार, हां, एक व्यक्ति में टैनिंग और पिग्मेंटेशन दोनों एक साथ हो सकते हैं। बता दें, धूप में रहने से पूरे चेहरे का रंग थोड़ा गहरा हो सकता है और उसी समय पहले से मौजूद पिग्मेंटेशन के दाग भी ज्यादा गहरे दिखाई दे सकते हैं।

इसी वजह से सिर्फ स्किन देखकर हमेशा यह तय करना आसान नहीं होता कि रंग में बदलाव सिर्फ टैनिंग की वजह से है या उसके पीछे कोई पिग्मेंटेशन की समस्या भी मौजूद है। अगर दाग लंबे समय से हैं या उनका स्वरूप बदल रहा है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।

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टैनिंग और पिग्मेंटेशन से बचने के उपाय

Dr. Shireen का कहना है, टैनिंग और अनचाहे पिग्मेंटेशन दोनों से बचाव में धूप से बचाव की अहम भूमिका है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे -

सनस्क्रीन का सही इस्तेमाल करें

बाहर निकलने से पहले SPF 30 या उससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर धूप के संपर्क में आने वाले हिस्सों पर पर्याप्त सनस्क्रीन लगाएं। लंबे समय तक बाहर रहने पर इसे दोबारा लगाना जरूरी हो सकता है।

बचाव के अन्य बातों पर दें ध्यान

सनस्क्रीन के साथ-साथ धूप से बचाव के लिए टोपी, धूप से बचाने वाले कपड़े, छाता और सनग्लासेस पहनें। तेज धूप में अनावश्यक रूप से लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए और छाया में रहने की कोशिश करें।

मेलास्मा या पिग्मेंटेशन का खतरा

जिन लोगों को मेलास्मा या पिग्मेंटेशन होने का खतरा होता है, उनके लिए आयरन ऑक्साइड वाली टिंटेड सनस्क्रीन कुछ मामलों में फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि यह विजिबल लाइट से भी बचाव करती है।

त्वचा के साथ क्या सावधानी बरतें?

Dr. Shireen के अनुसार, पिग्मेंटेशन होने पर त्वचा को जोर से रगड़ना, दागों को बार-बार छेड़ने या मुंहासों को दबाने के साथ-साथ बिना रेगुलेटेड फेयरनेस या ब्लीचिंग क्रीम का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे त्वचा में जलन, सूजन आने या पिग्मेंटेशन को और बढ़ावा मिलता है, जिससे कुछ लोगों में गहरे निशान बन सकते हैं।

अगर कोई गहरा पैच लगातार बढ़ रहा हो, तेजी से बदल रहा हो, फैल रहा हो, लंबे समय से बना हुआ हो या उसके कारण का पता न चल रहा हो, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना सही है, ताकि यह पता चल सके कि यह आम टैनिंग है, मेलास्मा है, पोस्ट-इंफ्लेमेटरी पिग्मेंटेशन है या त्वचा की कोई और समस्या है, सही कारण की पहचान के बाद ही सही इलाज चुना जा सकता है।

निष्कर्ष

टैनिंग मुख्य रूप से यूवी किरणों के संपर्क में आने के बाद त्वचा में मेलानिन बढ़ने से होने वाला अस्थायी गहरापन है, जबकि पिग्मेंटेशन त्वचा के रंग में होने वाले बदलाव के लिए एक व्यापक शब्द है और इसके कई कारण हो सकते हैं। इसलिए हर कालेपन को टैनिंग समझना सही नहीं है। इन समस्याओं से बचने के लिए नियमित सनस्क्रीन, धूप से बचाव और त्वचा के साथ सावधानी दोनों स्थितियों में अहम हैं। लंबे समय से मौजूद या बदलते हुए दाग-धब्बों के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लेना सबसे सेफ तरीका है।

ध्यान रहे, स्किन से जुड़ी कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • टैनिंग होने के क्या कारण हैं?

    टैनिंग की समस्या यूवी किरणों के संपर्क में आने, मौसम में बदलाव होने और पानी बदलने के कारण जैसी समस्याओं के कारण होती है।
  • पिग्मेंटेशन के क्या लक्षण हैं?

    पिग्मेंटेशन की समस्या होने पर त्वचा के रंग के गहरे होने, गहरे पैच पड़ने, मुंहासों के काले निशान रह जाने और त्वचा के रंग के अनइवन हो जाने जैसी समस्याएं होती हैं। 

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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