चेहरे पर टैनिंग और काले धब्बे कम करने के लिए आप रोजाना सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन इसके बावजूद स्किन का रंग असमान हो रहा है? कई बार चेहरे पर भूरे धब्बे बढ़ने लगते हैं या पहले से मौजूद पिग्मेंटेशन और गहरा दिखाई देने लगता है। ऐसी स्थिति में लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगते हैं, लेकिन समस्या कम होने के बजाय बढ़ती जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद की सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा के अनुसार, सनस्क्रीन लगाने के बावजूद स्किन पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन होने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार लोग सनस्क्रीन का सही चुनाव नहीं करते या इसे लगाने के बाद धूप में ज्यादा देर तक रहते हैं। वहीं, कुछ मामलों में स्किन पर बढ़ते काले धब्बों की वजह हार्मोनल बदलाव, मुंहासों के निशान या स्किन में होने वाली जलन भी हो सकती है।
सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग होने के मुख्य कारण
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा के अनुसार, सनस्क्रीन लगाने के बावजूद टैनिंग होने का एक बड़ा कारण इसका सही तरीके से इस्तेमाल न करना होता है। कई लोग चेहरे पर सनस्क्रीन की बहुत कम मात्रा लगाते हैं, जिससे स्किन को सही प्रोटेक्शन नहीं मिलता है। इसके अलावा, अगर आप धूप में लंबे समय तक रहते हैं और सनस्क्रीन दोबारा नहीं लगाते हैं, तो स्किन पर टैनिंग हो सकती है। सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि स्किन को धूप से पूरी तरह सुरक्षा यानी प्रोटेक्शन मिल गई है। इसलिए बाहर निकलते समय छाया का सहारा लेना, टोपी पहनना और धूप से बचाव के दूसरे तरीके अपनाना भी जरूरी है।
1. सनस्क्रीन दोबारा न लगाना
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा बताती हैं कि कई लोग सुबह घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाते हैं और फिर पूरे दिन इसे दोबारा नहीं लगाते। ऐसा करने से स्किन को मिलने वाली प्रोटेक्शन कम हो सकती है। खासकर पसीना आने, चेहरा धोने या स्विमिंग के बाद सनस्क्रीन दोबारा लगाना जरूरी होता है। आमतौर पर बाहर रहने के दौरान हर दो घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाने की सलाह दी जाती है। अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं, तो इस नियम का पालन करना और भी जरूरी हो जाता है।
2. गलत सनस्क्रीन से पिग्मेंटेशन की समस्या
हर सनस्क्रीन हर तरह की स्किन और हर समस्या के लिए एक जैसी असरदार नहीं होती। स्किन को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने के लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, जो UVA और UVB दोनों से प्रोटेक्शन देती है। कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन एक अच्छा विकल्प हो सकती है। वहीं, जिन लोगों को मेलाज्मा या चेहरे पर गहरे भूरे धब्बों की समस्या है, उनके लिए आयरन ऑक्साइड युक्त टिंटेड सनस्क्रीन फायदेमंद हो सकती है। यह सूर्य की किरणों के साथ-साथ लाइट से होने वाले पिग्मेंटेशन कम करने में भी मदद कर सकती है।
इसे भी पढ़ें: क्या ऑयली स्किन वाले लोगों को सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए? जानें डर्मेटोलॉजिस्ट से
3. हार्मोनल बदलाव
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा बताती हैं कि चेहरे पर पिग्मेंटेशन बढ़ने का कारण हमेशा धूप नहीं होती। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी, हार्मोनल बदलाव या हार्मोन से जुड़ी दवाओं के कारण मेलाज्मा की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, मुंहासे, स्किन में जलन और गलत स्किन केयर प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से भी काले निशान बन सकते हैं। इसे पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है। ऐसे में केवल सनस्क्रीन लगाने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होती। पिग्मेंटेशन का सही कारण जानकर उसका इलाज करना जरूरी होता है।
tanning increase despite using sunscreen
साल 2021 में The Journal of Primary Prevention जर्नल में प्रकाशित स्टडी का निष्कर्ष यह है कि कॉलेज के युवाओं में सनबर्न होना एक आम समस्या है, जो कि बाहर की एक्टिविटीज और टैनिंग के कारण होती है। रिसर्च से पता चलता है कि पुरुष, गोरी स्किन वाले लोग और धूप में जानबूझकर या अनजाने में रहने वाले लोग सनबर्न के प्रति सबसे ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। इसके अलावा, खेलकूद, धूप में लेटना भी इसके प्रमुख कारण हैं। इसलिए, युवाओं में स्किन कैंसर के खतरे को रोकने के लिए सनबर्न से बचाव के इन खास कारणों और आदतों पर फोकस करने की जरूरत है।
टैनिंग और पिग्मेंटेशन से बचने के लिए क्या करें?
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा सलाह देती हैं कि अगर सनस्क्रीन लगाने के बाद भी चेहरे पर टैनिंग या पिग्मेंटेशन बढ़ रहा है, तो सबसे पहले उसके इस्तेमाल का तरीका सुधारें। चेहरे और गर्दन पर पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन लगाएं और बाहर रहने के दौरान हर दो घंटे में दोबारा इस्तेमाल करें। धूप में निकलते समय छाता, टोपी और धूप से बचाने वाले कपड़ों का सहारा लें। इसके साथ ही स्किन को साफ रखें, मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें और ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जिनसे जलन होती हो। अगर चेहरे पर काले धब्बे लगातार बढ़ रहे हैं या कई महीनों से बने हुए हैं, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।
इसे भी पढ़ें: इलाज के बाद पिग्मेंटेशन वापस क्यों आ जाता है? डॉक्टर से जानें 5 कारण
निष्कर्ष
सनस्क्रीन लगाने के बावजूद चेहरे पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ने के पीछे गलत इस्तेमाल, हार्मोनल बदलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल सनस्क्रीन लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही प्रोडक्ट्स चुनना और उसे नियमित रूप से दोबारा लगाना भी जरूरी है। अगर सही देखभाल के बाद भी पिग्मेंटेशन कम नहीं हो रहा है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।
All Image Credit- magnific
FAQ
क्या बादल होने पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है?
बादलों के बावजूद काफी मात्रा में UV किरणें स्किन तक पहुंच सकती हैं। इसलिए दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।क्या विटामिन C सीरम पिग्मेंटेशन कम करने में मदद करता है?
विटामिन C सीरम कुछ लोगों में काले धब्बों को हल्का करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका असर स्किन की समस्या और प्रोडक्ट के इस्तेमाल पर निर्भर करता है।क्या पिग्मेंटेशन पूरी तरह खत्म हो सकता है?
यह पिग्मेंटेशन के कारण और अवधि पर निर्भर करता है। सही इलाज और धूप से बचाव के साथ कई तरह के काले धब्बे हल्के हो सकते हैं, लेकिन रिजल्ट आने में समय लग सकता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 21, 2026 12:33 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Padmaja
