Wed Oct 21, 2026 | 02:32 PM IST

Medically Reviewed by Dr Padmaja , Senior Consultant – Dermatology

सनस्क्रीन लगाने के बाद भी चेहरे पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ रहा है? डॉक्टर से जानें कारण

सनस्क्रीन लगाने के बावजूद टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ रहा है, तो इसकी वजह कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाना, दोबारा न लगाना या UVA किरणें हो सकती हैं। यहां डॉक्टर से जानिए, सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग क्यों होती है?
सनस्क्रीन लगाने के बाद भी चेहरे पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ रहा है? डॉक्टर से जानें कारणसनस्क्रीन लगाने के बाद भी चेहरे पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ रहा है? डॉक्टर से जानें कारण

चेहरे पर टैनिंग और काले धब्बे कम करने के लिए आप रोजाना सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन इसके बावजूद स्किन का रंग असमान हो रहा है? कई बार चेहरे पर भूरे धब्बे बढ़ने लगते हैं या पहले से मौजूद पिग्मेंटेशन और गहरा दिखाई देने लगता है। ऐसी स्थिति में लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगते हैं, लेकिन समस्या कम होने के बजाय बढ़ती जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद की सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा के अनुसार, सनस्क्रीन लगाने के बावजूद स्किन पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन होने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार लोग सनस्क्रीन का सही चुनाव नहीं करते या इसे लगाने के बाद धूप में ज्यादा देर तक रहते हैं। वहीं, कुछ मामलों में स्किन पर बढ़ते काले धब्बों की वजह हार्मोनल बदलाव, मुंहासों के निशान या स्किन में होने वाली जलन भी हो सकती है।

सनस्क्रीन लगाने के बाद भी टैनिंग होने के मुख्य कारण

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा के अनुसार, सनस्क्रीन लगाने के बावजूद टैनिंग होने का एक बड़ा कारण इसका सही तरीके से इस्तेमाल न करना होता है। कई लोग चेहरे पर सनस्क्रीन की बहुत कम मात्रा लगाते हैं, जिससे स्किन को सही प्रोटेक्शन नहीं मिलता है। इसके अलावा, अगर आप धूप में लंबे समय तक रहते हैं और सनस्क्रीन दोबारा नहीं लगाते हैं, तो स्किन पर टैनिंग हो सकती है। सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि स्किन को धूप से पूरी तरह सुरक्षा यानी प्रोटेक्शन मिल गई है। इसलिए बाहर निकलते समय छाया का सहारा लेना, टोपी पहनना और धूप से बचाव के दूसरे तरीके अपनाना भी जरूरी है।

1. सनस्क्रीन दोबारा न लगाना

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा बताती हैं कि कई लोग सुबह घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाते हैं और फिर पूरे दिन इसे दोबारा नहीं लगाते। ऐसा करने से स्किन को मिलने वाली प्रोटेक्शन कम हो सकती है। खासकर पसीना आने, चेहरा धोने या स्विमिंग के बाद सनस्क्रीन दोबारा लगाना जरूरी होता है। आमतौर पर बाहर रहने के दौरान हर दो घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाने की सलाह दी जाती है। अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं, तो इस नियम का पालन करना और भी जरूरी हो जाता है।

2. गलत सनस्क्रीन से पिग्मेंटेशन की समस्या

हर सनस्क्रीन हर तरह की स्किन और हर समस्या के लिए एक जैसी असरदार नहीं होती। स्किन को अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने के लिए ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए, जो UVA और UVB दोनों से प्रोटेक्शन देती है। कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन एक अच्छा विकल्प हो सकती है। वहीं, जिन लोगों को मेलाज्मा या चेहरे पर गहरे भूरे धब्बों की समस्या है, उनके लिए आयरन ऑक्साइड युक्त टिंटेड सनस्क्रीन फायदेमंद हो सकती है। यह सूर्य की किरणों के साथ-साथ लाइट से होने वाले पिग्मेंटेशन कम करने में भी मदद कर सकती है।

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3. हार्मोनल बदलाव

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा बताती हैं कि चेहरे पर पिग्मेंटेशन बढ़ने का कारण हमेशा धूप नहीं होती। कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी, हार्मोनल बदलाव या हार्मोन से जुड़ी दवाओं के कारण मेलाज्मा की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, मुंहासे, स्किन में जलन और गलत स्किन केयर प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से भी काले निशान बन सकते हैं। इसे पोस्ट-इंफ्लेमेटरी हाइपरपिग्मेंटेशन कहा जाता है। ऐसे में केवल सनस्क्रीन लगाने से समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होती। पिग्मेंटेशन का सही कारण जानकर उसका इलाज करना जरूरी होता है।

tanning increase despite using sunscreentanning increase despite using sunscreen

साल 2021 में The Journal of Primary Prevention जर्नल में प्रकाशित स्टडी का निष्कर्ष यह है कि कॉलेज के युवाओं में सनबर्न होना एक आम समस्या है, जो कि बाहर की एक्टिविटीज और टैनिंग के कारण होती है। रिसर्च से पता चलता है कि पुरुष, गोरी स्किन वाले लोग और धूप में जानबूझकर या अनजाने में रहने वाले लोग सनबर्न के प्रति सबसे ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। इसके अलावा, खेलकूद, धूप में लेटना भी इसके प्रमुख कारण हैं। इसलिए, युवाओं में स्किन कैंसर के खतरे को रोकने के लिए सनबर्न से बचाव के इन खास कारणों और आदतों पर फोकस करने की जरूरत है।

टैनिंग और पिग्मेंटेशन से बचने के लिए क्या करें?

डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. पद्मजा सलाह देती हैं कि अगर सनस्क्रीन लगाने के बाद भी चेहरे पर टैनिंग या पिग्मेंटेशन बढ़ रहा है, तो सबसे पहले उसके इस्तेमाल का तरीका सुधारें। चेहरे और गर्दन पर पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन लगाएं और बाहर रहने के दौरान हर दो घंटे में दोबारा इस्तेमाल करें। धूप में निकलते समय छाता, टोपी और धूप से बचाने वाले कपड़ों का सहारा लें। इसके साथ ही स्किन को साफ रखें, मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें और ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जिनसे जलन होती हो। अगर चेहरे पर काले धब्बे लगातार बढ़ रहे हैं या कई महीनों से बने हुए हैं, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।

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निष्कर्ष

सनस्क्रीन लगाने के बावजूद चेहरे पर टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ने के पीछे गलत इस्तेमाल, हार्मोनल बदलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल सनस्क्रीन लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही प्रोडक्ट्स चुनना और उसे नियमित रूप से दोबारा लगाना भी जरूरी है। अगर सही देखभाल के बाद भी पिग्मेंटेशन कम नहीं हो रहा है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।

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FAQ

  • क्या बादल होने पर भी सनस्क्रीन लगाना जरूरी है?

    बादलों के बावजूद काफी मात्रा में UV किरणें स्किन तक पहुंच सकती हैं। इसलिए दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।
  • क्या विटामिन C सीरम पिग्मेंटेशन कम करने में मदद करता है?

    विटामिन C सीरम कुछ लोगों में काले धब्बों को हल्का करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका असर स्किन की समस्या और प्रोडक्ट के इस्तेमाल पर निर्भर करता है।
  • क्या पिग्मेंटेशन पूरी तरह खत्म हो सकता है?

    यह पिग्मेंटेशन के कारण और अवधि पर निर्भर करता है। सही इलाज और धूप से बचाव के साथ कई तरह के काले धब्बे हल्के हो सकते हैं, लेकिन रिजल्ट आने में समय लग सकता है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 21, 2026 12:33 IST

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