अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पैरों में सूजन किडनी डिजीज का संकेत है? इसका जवाब है हां, यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है और पैरों में सूजन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। किडनी ठीक से काम न करने पर शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम बाहर नहीं निकल पाता है। इससे शरीर के टिशूज में पानी जमा होने लगता है, जिसे एडिमा (Edema) कहा जाता है। इस वजह से दोनों पैरों, टखनों या पंजों में एक जैसी सूजन दिखाई दे सकती है। इस वजह से आंखों के आस-पास भी सूजन हो सकती है। हालांकि, पैरों में सूजन केवल किडनी की समस्या के कारण नहीं होती। कुछ दवाएं, लिम्फेटिक सिस्टम (लसीका तंत्र) से जुड़ी समस्याएं, नसों में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से न होना, लिवर की बीमारी और हृदय रोग भी इसका कारण हो सकते हैं। आइए जानें पैरों में सूजन और किडनी रोग का संबंध, अन्य कारण और इलाज। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Clinical Director & HOD Of Nephrology And Transplant Services At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
थायराइड भी सूजन का कारण हो सकता है
थायराइड होने पर पैरों में सूजन हो सकती है। थायराइड हार्मोन की कमी में सूजन दिख सकती है। थायराइड की जांच के लिए TSH टेस्ट कराएं। जिन लोगों को पहले से थायराइड है, वे भी पैरों में सूजन नजर आने पर थायराइड टेस्ट कराएं ताकि यह पता चले कि डोज बढ़ाने की जरूरत है या नहीं।
टोटल प्रोटीन की मात्रा घटने से सूजन आ सकती है
जब शरीर में कुल प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है, तो पैरों में सूजन आ सकती है। पैरों में सूजन आने पर डॉक्टर कई बार किडनी फंक्शन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इस जांच में चेक करें कि प्रोटीन का स्तर कितना है? अगर टोटल प्रोटीन 6.5 से नीचे आ रहा है, तो यह प्रोटीन की कमी हो सकती है। ब्लड में प्रोटीन उसे गाढ़ापन देता है। अगर ब्लड ज्यादा पतला हो जाए, तो वह तरल के रूप में पैरों में जमना शुरू हो जाता है। प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए प्रोटीन रिच फूड्स का सेवन करें। हालांकि, प्रोटीन का सेवन करने से क्रिएटिनिन लेवल बढ़ता है, लेकिन इससे किडनी खराब नहीं होती है। प्रोटीन लेने से 0.5 और 1.5 तक क्रिएटिनिन लेवल बढ़ सकता है। डॉक्टर की सलाह पर प्रोटीन इनटेक चेक करें।
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किडनी फेलियर में पैरों में सूजन आ सकती है
अगर शरीर में प्रोटीन इनटेक ठीक है, थायराइड नहीं है और फिर भी अगर पैरों में सूजन नजर आए, तो यह किडनी फेलियर का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में पानी का सेवन चेक करें। एक साथ पानी का सेवन करने के बजाय थोड़े-थोड़े समय में पानी पिएं। डाइट में नमक की मात्रा को कम करें, इससे सूजन कम हो सकती है।
National Kidney Foundation के मुताबिक, जब किडनी को नुकसान पहुंचता है, तो शरीर के टिशूज में तरल जमा हो सकता है। यह खासतौर, पर शरीर के निचले हिस्सों में अधिक दिखाई दे सकता है, क्योंकि ग्रैविटी के कारण तरल नीचे की ओर जमा होता है। यह भी महसूस हो सकता है कि मोजे पहनने के बाद त्वचा पर उनके निशान पड़ जाते हैं या दिन के अंत तक जूते पहले की तुलना में ज्यादा टाइट लगने लगते हैं।
पैरों में सूजन के अलावा इन लक्षणों पर गौर करें
अगर पैरों में सूजन लगातार बनी हुई है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। खासकर, अगर इसके साथ थकान, हाई ब्लड प्रेशर या पेशाब में झाग आने जैसे लक्षण भी हों। किडनी की समस्या का पता लगाने के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट किए जा सकते हैं। किडनी की बीमारी को कंट्रोल करने के लिए समय पर जांच और इलाज शुरू करना जरूरी है। अगर पैरों में तरल जमा हाे रहा है, तो यह चिंता का विषय है क्योंकि यह तरल धीरे-धीरे फेफड़ों में भी जमा हो सकता है। ऐसे में अगर लेटने पर घुटन महसूस होती है या सांस की समस्या होती है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
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पैरों में सूजन का इलाज
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1. किडनी की बीमारी का इलाज
किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम को पेशाब के जरिए बाहर निकालने का काम करती है। जब किडनी ठीक तरह से काम नहीं कर पाती, तो शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इससे पैरों में सूजन दिखाई दे सकती है। कुछ मरीजों को ब्लड प्रेशर और किडनी की सेहत के लिए दवाएं दी जा सकती हैं। अगर शरीर में ज्यादा पानी जमा हो रहा है, तो डॉक्टर कुछ मामलों में डाइयुरेटिक्स (Diuretics) दे सकते हैं। इन दवाओं की मदद से पानी की अतिरिक्त मात्रा को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
2. नमक कम करने की सलाह
किडनी की कुछ बीमारियों में शरीर में सोडियम और पानी जमा होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर डाइट में नमक कम करने की सलाह दे सकते हैं। खाने में ऊपर से नमक डालने के साथ-साथ पैकेज्ड फूड, चिप्स, नमकीन, अचार और ज्यादा सोडियम वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किडनी की बीमारी में हर व्यक्ति की डाइट एक जैसी नहीं होती। इसलिए नमक, पानी, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
3. नसों की समस्या का इलाज
अगर पैरों में सूजन का कारण नसों में ब्लड फ्लो ठीक न होना है, तो इलाज किडनी की बीमारी से अलग होगा। डॉक्टर कुछ लोगों को पैरों को ऊंचा रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि या कंप्रेशन स्टॉकिंग्स की सलाह दे सकते हैं।
4. हार्ट या लिवर की बीमारी का इलाज
अगर जांच में सूजन का कारण हार्ट या लिवर से जुड़ी बीमारी निकलती है, तो उसी बीमारी का इलाज किया जाता है। इसके लिए दवाएं, डाइट में बदलाव और अन्य उपचार की जरूरत हो सकती है।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
अगर पैरों में सूजन लगातार बनी हुई है, बार-बार हो रही है या बढ़ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। सूजन के साथ सांस की परेशानी, सीने में दर्द, अचानक ज्यादा सूजन, पेशाब में खून या अधिक कमजोरी दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
पैरों में सूजन के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे प्रोटीन की मात्रा कम होना या थायराइड डिजीज, लिवर या हार्ट डिजीज, लिम्फेटिक सिस्टम से जुड़ी समस्या वगैरह। किडनी फेलियर के कारण भी पैरों में सूजन आ सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर नमक की मात्रा घटाने की सलाह देते हैं। कुछ मामलों में, डाइयुरेटिक्स की मदद भी ली जाती है। नसों की समस्या होने पर डॉक्टर पैरों को ऊंचा रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि या कंप्रेशन स्टॉकिंग्स को पहनने की सलाह दे सकते हैं। किडनी की समस्या का पता लगाने के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट किए जा सकते हैं।
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FAQ
क्या पैरों में सूूजन होने पर पानी का सेवन कम करना चाहिए?
खुद से पानी का सेवन कम करना सही नहीं है। किडनी के कुछ मरीजों को डॉक्टर तरल पदार्थ कम करने की सलाह देते हैं, लेकिन खुद से ऐसा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।पैरों में सूजन होने पर नमक पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए?
नहीं, हर व्यक्ति को नमक की मात्रा को घटाना जरूरी नहीं होता है। अगर किडनी, हार्ट या बीपी के मरीज हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर नमक की मात्रा को घटाएं।
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Sep 28, 2026 18:58 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu
