Mon Sep 28, 2026 | 07:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajasekara C Madarasu , Senior Consultant Nephrologist | Clinical Director & Head of Department - Nephrology & Transplant Services

पैर में सूजन के पीछे क‍िडनी की बीमारी तो नहीं? डॉक्‍टर से समझें दोनों का संबंध

पैरों में सूजन केवल थकान या ज्‍यादा चलने का नतीजा नहीं होता। अगर दोनों पैरों में सूजन नजर आ रही है, तो इसका संबंध क‍िडनी ड‍िजीज से हो सकता है। समझें दोनों का संबंध और इलाज। 
पैर में सूजन के पीछे क‍िडनी की बीमारी तो नहीं? डॉक्‍टर से समझें दोनों का संबंधपैर में सूजन के पीछे क‍िडनी की बीमारी तो नहीं? डॉक्‍टर से समझें दोनों का संबंध

अक्‍सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है क‍ि क्‍या पैरों में सूजन क‍िडनी ड‍िजीज का संकेत है? इसका जवाब है हां, यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है और पैरों में सूजन के कई अन्‍य कारण भी हो सकते हैं। किडनी ठीक से काम न करने पर शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम बाहर नहीं निकल पाता है। इससे शरीर के ट‍िशूज में पानी जमा होने लगता है, जिसे एडिमा (Edema) कहा जाता है। इस वजह से दोनों पैरों, टखनों या पंजों में एक जैसी सूजन दिखाई दे सकती है। इस वजह से आंखों के आस-पास भी सूजन हो सकती है। हालांकि, पैरों में सूजन केवल किडनी की समस्या के कारण नहीं होती। कुछ दवाएं, लिम्फेटिक सिस्टम (लसीका तंत्र) से जुड़ी समस्याएं, नसों में ब्‍लड सर्कुलेशन ठीक से न होना, लिवर की बीमारी और हृदय रोग भी इसका कारण हो सकते हैं। आइए जानें पैरों में सूजन और क‍िडनी रोग का संबंध, अन्‍य कारण और इलाज। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Clinical Director & HOD Of Nephrology And Transplant Services At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

थायराइड भी सूजन का कारण हो सकता है

थायराइड होने पर पैरों में सूजन हो सकती है। थायराइड हार्मोन की कमी में सूजन द‍िख सकती है। थायराइड की जांच के ल‍िए TSH टेस्‍ट कराएं। जि‍न लोगों को पहले से थायराइड है, वे भी पैरों में सूजन नजर आने पर थायराइड टेस्‍ट कराएं ताक‍ि यह पता चले क‍ि डोज बढ़ाने की जरूरत है या नहीं।

टोटल प्रोटीन की मात्रा घटने से सूजन आ सकती है

जब शरीर में कुल प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है, तो पैरों में सूजन आ सकती है। पैरों में सूजन आने पर डॉक्‍टर कई बार क‍िडनी फंक्‍शन टेस्‍ट कराने की सलाह देते हैं। इस जांच में चेक करें क‍ि प्रोटीन का स्‍तर क‍ितना है? अगर टोटल प्रोटीन 6.5 से नीचे आ रहा है, तो यह प्रोटीन की कमी हो सकती है। ब्‍लड में प्रोटीन उसे गाढ़ापन देता है। अगर ब्‍लड ज्‍यादा पतला हो जाए, तो वह तरल के रूप में पैरों में जमना शुरू हो जाता है। प्रोटीन की कमी दूर करने के ल‍िए प्रोटीन र‍िच फूड्स का सेवन करें। हालांक‍ि, प्रोटीन का सेवन करने से क्र‍िएट‍िन‍िन लेवल बढ़ता है, लेक‍िन इससे क‍िडनी खराब नहीं होती है। प्रोटीन लेने से 0.5 और 1.5 तक क्र‍िएट‍िन‍िन लेवल बढ़ सकता है। डॉक्‍टर की सलाह पर प्रोटीन इनटेक चेक करें।

यह भी पढ़ें- पैरों में सूजन होने पर क्या नहीं खाना चाहिए? जानें डॉक्टर से

क‍िडनी फेल‍ियर में पैरों में सूजन आ सकती है

अगर शरीर में प्रोटीन इनटेक ठीक है, थायराइड नहीं है और फ‍िर भी अगर पैरों में सूजन नजर आए, तो यह क‍िडनी फेल‍ियर का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्‍थ‍िति‍ में पानी का सेवन चेक करें। एक साथ पानी का सेवन करने के बजाय थोड़े-थोड़े समय में पानी प‍िएं। डाइट में नमक की मात्रा को कम करें, इससे सूजन कम हो सकती है।

National Kidney Foundation के मुताब‍िक, जब किडनी को नुकसान पहुंचता है, तो शरीर के ट‍िशूज में तरल जमा हो सकता है। यह खासतौर, पर शरीर के निचले हिस्सों में अधिक दिखाई दे सकता है, क्योंकि ग्रैव‍िटी के कारण तरल नीचे की ओर जमा होता है। यह भी महसूस हो सकता है कि मोजे पहनने के बाद त्वचा पर उनके निशान पड़ जाते हैं या दिन के अंत तक जूते पहले की तुलना में ज्यादा टाइट लगने लगते हैं।

पैरों में सूजन के अलावा इन लक्षणों पर गौर करें

अगर पैरों में सूजन लगातार बनी हुई है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। खासकर, अगर इसके साथ थकान, हाई ब्लड प्रेशर या पेशाब में झाग आने जैसे लक्षण भी हों। किडनी की समस्या का पता लगाने के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट किए जा सकते हैं। किडनी की बीमारी को कंट्रोल करने के ल‍िए समय पर जांच और इलाज शुरू करना जरूरी है। अगर पैरों में तरल जमा हाे रहा है, तो यह च‍िंता का व‍िषय है क्‍योंक‍ि यह तरल धीरे-धीरे फेफड़ों में भी जमा हो सकता है। ऐसे में अगर लेटने पर घुटन महसूस होती है या सांस की समस्‍या होती है, तो डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करें।

यह भी पढ़ें- क्या पैरों में सूजन हार्ट डिजीज का संकेत है? डॉक्‍टर से जानें कब करें च‍िंता

पैरों में सूजन का इलाज

leg-swelling-kidney-diseaseleg-swelling-kidney-disease

1. क‍िडनी की बीमारी का इलाज

किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम को पेशाब के जरिए बाहर निकालने का काम करती है। जब किडनी ठीक तरह से काम नहीं कर पाती, तो शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इससे पैरों में सूजन दिखाई दे सकती है। कुछ मरीजों को ब्लड प्रेशर और किडनी की सेहत के लिए दवाएं दी जा सकती हैं। अगर शरीर में ज्यादा पानी जमा हो रहा है, तो डॉक्टर कुछ मामलों में डाइयुरेटिक्स (Diuretics) दे सकते हैं। इन दवाओं की मदद से पानी की अति‍र‍िक्‍त मात्रा को बाहर न‍िकालने में मदद म‍िलती है।

2. नमक कम करने की सलाह

किडनी की कुछ बीमारियों में शरीर में सोडियम और पानी जमा होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर डाइट में नमक कम करने की सलाह दे सकते हैं। खाने में ऊपर से नमक डालने के साथ-साथ पैकेज्ड फूड, चिप्स, नमकीन, अचार और ज्यादा सोडियम वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किडनी की बीमारी में हर व्यक्ति की डाइट एक जैसी नहीं होती। इसलिए नमक, पानी, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

3. नसों की समस्या का इलाज

अगर पैरों में सूजन का कारण नसों में ब्‍लड फ्लो ठीक न होना है, तो इलाज किडनी की बीमारी से अलग होगा। डॉक्टर कुछ लोगों को पैरों को ऊंचा रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि या कंप्रेशन स्टॉकिंग्स की सलाह दे सकते हैं।

4. हार्ट या लिवर की बीमारी का इलाज

अगर जांच में सूजन का कारण हार्ट या लिवर से जुड़ी बीमारी निकलती है, तो उसी बीमारी का इलाज किया जाता है। इसके लिए दवाएं, डाइट में बदलाव और अन्य उपचार की जरूरत हो सकती है।

डॉक्टर से संपर्क कब करें?

अगर पैरों में सूजन लगातार बनी हुई है, बार-बार हो रही है या बढ़ रही है, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। सूजन के साथ सांस की परेशानी, सीने में दर्द, अचानक ज्‍यादा सूजन, पेशाब में खून या अध‍िक कमजोरी द‍िखे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

पैरों में सूजन के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे प्रोटीन की मात्रा कम होना या थायराइड ड‍िजीज, ल‍िवर या हार्ट ड‍िजीज, लिम्फेटिक सिस्टम से जुड़ी समस्या वगैरह। क‍िडनी फेल‍ियर के कारण भी पैरों में सूजन आ सकती है। ऐसी स्‍थ‍ित‍ि में डॉक्‍टर नमक की मात्रा घटाने की सलाह देते हैं। कुछ मामलों में, डाइयुरेटिक्स की मदद भी ली जाती है। नसों की समस्‍या होने पर डॉक्‍टर पैरों को ऊंचा रखने, नियमित शारीरिक गतिविधि या कंप्रेशन स्टॉकिंग्स को पहनने की सलाह दे सकते हैं। किडनी की समस्या का पता लगाने के लिए ब्लड और यूरिन टेस्ट किए जा सकते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्‍या पैरों में सूूजन होने पर पानी का सेवन कम करना चाह‍िए?

    खुद से पानी का सेवन कम करना सही नहीं है। क‍िडनी के कुछ मरीजों को डॉक्‍टर तरल पदार्थ कम करने की सलाह देते हैं, लेक‍िन खुद से ऐसा करना सेहत के ल‍िए हान‍िकारक हो सकता है।
  • पैरों में सूजन होने पर नमक पूरी तरह से बंद कर देना चाह‍िए?

    नहीं, हर व्‍यक्‍त‍ि को नमक की मात्रा को घटाना जरूरी नहीं होता है। अगर क‍िडनी, हार्ट या बीपी के मरीज हैं, तो डॉक्‍टर की सलाह पर नमक की मात्रा को घटाएं।

Read Next

→ शरीर में खुजली और पेशाब में जलन को न करें नजरअंदाज, क्रिएटिनिन बढ़ने पर दिख सकते हैं ये 5 संकेत

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 28, 2026 18:58 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu