Sat Sep 19, 2026 | 06:59 AM IST

Medically Reviewed by Dr Mandeep Singh Malhotra , Surgical & Molecular Oncologist | Founder & Chief Mentor – Art of Healing Cancer

सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए क्यों जरूरी है Colposcopy? डॉक्टर से जानें पूरी प्रक्रिया

सर्वाइकल कैंसर से चेकअप के लिए कोल्पोस्कोपी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, ताकि समय रहते सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों की पहचान करके इलाज शुरू किया जा सके। हालांकि, कई बार महिलाएं इस टेस्ट का नाम सुनकर घबरा जाती है। इसलिए इस लेख में कोल्पोस्कोपी टेस्ट के बारे में विस्तार से बताया गया है।
सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए क्यों जरूरी है Colposcopy? डॉक्टर से जानें पूरी प्रक्रियासर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए क्यों जरूरी है Colposcopy? डॉक्टर से जानें पूरी प्रक्रिया

दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए इससे बचाव के लिए रेगुलर चेकअप कराना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर शुरुआती स्टेज पर ही बीमारी का पता चल जाए, तो इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है। सर्वाइकल कैंसर के रेगुलर चेकअप में पैप स्मीयर या HPV टेस्ट होता है, लेकिन अगर ये टेस्ट पॉजिटिव होते हैं, तो डॉक्टर कोल्पोस्कोपी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। आमतौर पर महिलाएं इस टेस्ट को सुनकर घबरा जाती हैं। इसलिए कोल्पोस्कोपी की जरूरत और इसकी प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से बात की।

Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं कि इसमें किसी तरह की सर्जरी नहीं होती, बल्कि यह काफी सुरक्षित डायग्नोस्टिक प्रक्रिया है।

सर्वाइकल कैंसर में कोल्पोस्कोपी क्यों जरूरी है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने कहा, “आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पैप स्मीयर कराना काफी होता है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कुछ मामलों में अगर पैप स्मीयर पॉजिटिव आता है, तो कोल्पोस्कोपी की सलाह दी जाती है। दरअसल, पैप स्मीयर सिर्फ यह बताता है कि सर्विक्स के सेल्स में कुछ असामानता है, लेकिन यह नहीं बता पाता कि यह बदलाव किस जगह पर है और कितना गंभीर है।”

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि ऐसी कंडीशन में मरीज को कोल्पोस्कोपी कराने की सलाह देते हैं, ताकि सीधे प्रभावित हिस्से को देखा जा सके। अगर कुछ भी अलग लगता है, तो वहीं से छोटा सैंपल लेकर बायोप्सी के लिए लैब में भेज दिया जाता है।

National Cancer Institute Division of Cancer Epidemiology & Genetics में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, ASCCP रिस्क-बेस्ड मैनेजमेंट कंसेंसस गाइडलाइंस में बताया गया है कि सर्वाइकल कैंसर की जांच में असामान्य कोशिकाओं के मैनेजमेंट के लिए कोल्पोस्कोपी या बायोप्सी के साथ एक साल की निगरानी जरूरी है।

कोल्पोस्कोपी कराने की सलाह कब दी जाती है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि हर महिला को इसकी जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ खास कंडीशन में चेक किया जाता है कि बदलाव सामान्य है या कैंसर से पहले के बदलाव है। आमतौर पर इन महिलाओं को कोल्पोस्कोपी कराने की सलाह दी जा सकती है।

  • पैप स्मीयर या HPV टेस्ट पॉजिटिव आने पर
  • सर्विक्स में किसी तरह का जख्म महसूस होने पर
  • सेक्शुअल इंटरकोर्स के बाद ब्लीडिंग होने पर
  • लंबे समय से सफेद पानी आने पर
  • बार-बार सर्विक्स में इंफेक्शन या सूजन आने पर

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कोल्पोस्कोपी कैसे की जाती है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं, “कोल्पोस्कोपी के जरिए सर्विक्स, वजाइना और वल्वा की जगह को कई गुना बड़ा करके देखा जाता है। इससे उन जगहों की पहचान आसान हो जाती है, जहां कोशिकाएं में असामान्य बदलाव हो रहे हों।”

Dr. Mandeep Singh Malhotra के अनुसार, “कोल्पोस्कोपी की जांच क्लिनिक में भी की जा सकती है और करीब 10 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है। इस दौरान महिला को बैड पर लिटाकर स्पेकुलम की मदद से सर्विक्स को देखते हैं। इसके बाद सर्विक्स पर हल्का एसिटिक एसिड या आयोडीन सॉल्यूशन लगाया जाता है। इससे असामान्य सेल्स सफेद या अलग रंग में दिखाई देने लगते हैं। अगर डॉक्टर को जरूरत महसूस होती है, तो उसकी छोटी सी बायोप्सी भी की जा सकती है।”

कोल्पोस्कोपी के दौरान बायोप्सी रिपोर्ट में कैसे पढ़ी जा सकती है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra के अनुसार, कोल्पोस्कोपी के दौरान बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर इलाज तय होता है। इस रिपोर्ट में तीन तरह के रिजल्ट आ सकते हैं।

सामान्य 

प्रीकैंसरस बदलाव 

कैंसरस बदलाव

गंभीर बदलाव नहीं मिले

फिलहाल कैंसर नहीं, लेकिन भविष्य में कैंसर बन सकता है।

कम मामलों में बायोप्सी से कैंसर की पुष्टि होती है।

प्रीकैंसरस बदलाव मिलने पर इलाज का तरीका क्या हो सकता है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने कहा, “अगर रिपोर्ट में प्रीकैंसरस बदलाव आते हैं, तो मरीज की मेडिकल कंडीशन को देखकर ही इलाज किया जाता है। इसमें डॉक्टर असामान्य कोशिकाओं को हटाने की कोशिश करते हैं, ताकि भविष्य में कैंसर से बचाव हो सके।”

  • LEEP (Loop Electrosurgical Excision Procedure) - इसमें असामान्य हिस्से को पतले वायर लूप से हटाया जाता है।
  • क्रायोथेरेपी - इस तकनीक में असामान्य सेल्स को कोल्ड टेम्परेचर की मदद से खत्म किया जाता है।
  • कोन बायोप्सी - सर्विक्स के कोन के आकार के हिस्से को हटाकर चेक करके इलाज किया जाता है।

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कोल्पोस्कोपी के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने अगर कोल्पोस्कोपी से सिर्फ जांच हुई है, तो कुछ जरूरत नहीं होती, लेकिन बायोप्सी लेने पर कुछ दिनों तक ये सावधानियां बरतने की सलाह दी जा सकती है।

  1. 3–7 दिन तक सेक्शुअल इंटरकोर्स से बचें।
  2. टैम्पोन का इस्तेमाल न करें।
  3. भारी वजन न उठाएं।
  4. बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

निष्कर्ष
Dr. Mandeep Singh Malhotra ने महिलाओं को सलाह दी कि कोल्पोस्कोपी से डरने की जरूरत नहीं होती। अगर किसी की पैप स्मीयर या HPV टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव है, तो डॉक्टर कोल्पोस्कोपी से असामान्य कोशिकाओं को चेक करते हैं। समय पर कोल्पोस्कोपी कराने से कई बार कैंसर बनने से पहले ही इलाज शुरू किया जा सकता है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या कोल्पोस्कोपी की जांच में दर्द होता है?

    ज्यादातर महिलाओं को कोल्पोस्कोपी के दौरान केवल हल्की असुविधा महसूस होती है। अगर सिर्फ जांच ही की जा रही है, तो दर्द नहीं होता, लेकिन अगर डॉक्टर बायोप्सी लेते हैं, तो कुछ सेकंड के लिए हल्की चुभन या ऐंठन महसूस हो सकती है।
  • क्या कोल्पोस्कोपी का मतलब कैंसर है?

    Dr. Mandeep Singh Malhotra ने कहा कि कई महिलाओं को लगता है कि कोल्पोस्कोपी का मतलब सिर्फ सर्वाइकल कैंसर ही है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि यह एक जांच का तरीका है। इसका यह कतई मतलब नहीं है कि महिला को सर्वाइकल कैंसर होगा ही। बस इस जांच के जरिए समय रहते बीमारी की पहचान करने की कोशिश की जाती है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 04, 2026 20:19 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra

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