Fri Sep 11, 2026 | 08:24 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

Self Tried Remedy: एक चम्‍मच घी ने कब्‍ज से द‍िलाई राहत, एक्सपर्ट से जानें फायदे और पढ़ें मेरा अनुभव

कब्‍ज दूर करने के ल‍िए मैंने दादी का नुस्‍खा आजमाया ज‍िसमें उन्‍होंने मुझे रोज एक चम्‍मच घी खाने की सलाह दी। घी से मेरा पाचन बेहतर हो गया। मेरे इस अनुभव के साथ जानें रोज घी खाने के फायदे जो मुझे म‍िले और सेवन का सही तरीका वो भी एक्‍सपर्ट की सलाह के साथ।

मुझे बाहर का खाना खाने या अन‍ियम‍ित समय पर खाने से अक्‍सर कब्‍ज की समस्‍या हो जाती है। आप सोच रहे होंगे क‍ि 30 की उम्र में भी कब्‍ज होता है? इसका जवाब है हां, यह समस्‍या केवल बुजुर्गों को नहीं बल्‍क‍ि क‍िसी को भी हो सकती है। मेरी लाइफस्‍टाइल के साथ अन‍ियम‍ित खान-पान, घंटों बैठकर काम करना और स्‍ट्रेस जुड़ा हुआ है। इसका असर मेरे शरीर पर भी पड़ता है। मुझे अक्‍सर ठीक से पेट साफ न होना, पेट में मरोड़ या भारीपन महसूस होता है। इसे ठीक करने के ल‍िए मैंने कई बार दवाओं का सहारा भी ल‍िया है, लेक‍िन दो साल पहले मेरी दादी ने मुझे कब्‍ज के ल‍िए घी खाने की सलाह दी थी और मैंने उसे तुरंत आजमाया क्‍योंक‍ि दादी के नुस्‍खे असरदार होते हैं। बस फ‍िर क्‍या था न स‍िर्फ मुझे कब्‍ज से राहत म‍िली बल्‍क‍ि मेरा पाचन भी सुधर गया। इसी अनुभव को आपके साथ साझा करने जा रही हूं।

पेट साफ न होने पर द‍ि‍नभर भारीपन लगता था

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मुझे कब्‍ज की समस्‍या तब होती है जब मैं बहुत स्‍ट्रेस में होती हूं या क‍िसी कारण से खानपान अन‍ियमि‍त हो जाता है। पेट जब ठीक से साफ नहीं होता, तो पेट में भारीपन महसूस होता है, गैस होती है और च‍िड़च‍िड़ापन भी महसूस होता है। कब्‍ज दूर करने के ल‍िए मैंने फाइबर का ज्‍यादा सेवन करना शुरू कर द‍िया, लेक‍िन उससे भी आराम‍ नहीं म‍िला। मेरी बुआ डॉक्‍टर हैं और उनकी सलाह पर मैंने कुछ दवाएं खाईं ज‍िससे आराम तो म‍िला लेक‍िन कब्‍ज की समस्‍या पूरी तरह से दूर नहीं हुई।

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दादी का किस्सा: जब दवा के नाम पर घी ही हुआ करता था

मुझे आज भी दादी की बात याद है। वो कहा करती थीं क‍ि बेटा, पेट ठीक होगा तो सब ठीक रहेगा। हमारे समय में कब्ज (Constipation) के लिए कोई गोली नहीं, बस एक चम्मच घी काफी था। दादी हर सुबह गुनगुने दूध या सादे रोटी के साथ थोड़ा सा देसी घी लेने को कहती थीं। उनका मानना था कि घी आंतों को चिकना करता है और मल को आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। तब ये बातें पुरानी लगती थीं, लेकिन आज वही बात मेरे काम आई।

मैंने कैसे शुरू किया घी का सेवन?

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मैंने रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच देसी गाय का घी लेना शुरू किया। कभी-कभी उसे गुनगुने पानी के साथ लिया, तो कभी गर्म रोटी पर लगाकर। कोई चमत्कार एक दिन में नहीं हुआ, लेकिन एक हफ्ते में फर्क साफ दिखने लगा। पेट हल्का रहने लगा, गैस कम हुई और सुबह की शुरुआत आसान हो गई।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं घी और कब्ज के बारे में?- How Ghee Helps To Relieve Constipation

Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana के अनुसार, सुबह गुनगुने पानी के साथ गाय का घी एक से दो ग्राम की मात्रा लें। यह घी का सेवन करने से सबसे अच्‍छा तरीका है। घी का सेवन करने का दूसरा तरीका है सुबह एक ग‍िलास गुनगुना पानी प‍िएं और उसके आधे घंटे बाद घी को गुनगुना करके लें। आप घर पर तैयार क‍िए गए घी का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं। घी का सेवन करने से गट और पेट की समस्‍याएं दूर होती हैं, आंतों की ड्राईनेस से छुटकारा म‍िलता है। घी का सेवन करने से बाउल मूवमेंट बेहतर होता है। ज‍िन लोगों को कब्‍ज की समस्‍या है उनके ल‍िए घी का सेवन फायदेमंद माना जाता है।

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घी का सेवन करने से ये फायदे म‍िले- Benefits Of Consuming Ghee

  • घी सिर्फ कब्ज में ही नहीं, बल्कि पूरी सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • पेट साफ रहने से त्‍वचा का ग्‍लो बढ़ गया।
  • ब्‍लोट‍िंग की समस्‍या दूर हुई और एनर्जी लेवल बढ़ गया।
  • च‍िड़च‍िड़ापन दूर हो गया और मूड बेहतर हुआ।

न‍िष्‍कर्ष:

मेरे लिए एक चम्मच घी सिर्फ कब्ज का इलाज नहीं, बल्कि पूरी बॉडी को बेहतर बनाने का एक जरि‍या बन गया। कभी-कभी समाधान महंगी चीजों में नहीं, बल्कि हमारी रसोई में ही छिपा होता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 02, 2026 19:12 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 02, 2026 19:12 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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