ओव्यूलेशन, पीरियड साइकिल का वह समय होता है, जब ओवरीज एग रिलीज करती हैं। जो महिलाएं कंसीव करना चाहती हैं, उनके लिए यह चरण काफी महत्वपूर्ण होता है। बहरहाल, माना जाता है कि जिस तरह पीरियड्स के दौरान महिलाएं मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन आदि महसूस करती हैं, उसी तरह ओव्यूलेशन के आसपास भी महिलाएं अधिक बेचैनी महसूस करती हैं। यहां यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर ऐसा कुछ महिलाओं के साथ क्यों होता है और इस स्थिति में महिलाओं को क्या करना चाहिए? इस बारे में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।
ओव्यूलेशन में चिड़चिड़ापन महसूस होने के कारण
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हार्मोन्स में उछाल
महिलाओं के शरीर में समय-समय पर हार्मोन में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। ओव्यूलेशन पीरियड में भी ऐसा होता है। डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं कि ओव्यूलेशन के ठीक पहले एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर अपने चरम पर होता है और एग रिलीज होते ही इसका स्तर तेजी से नीचे गिर जाता है। अचानक हार्मोन में इस बदलाव के कारण दिमाग के वे केमिकल प्रभावित होते हैं, जो कि हमारे मूड को कंट्रोल करते हैं। इसी वजह से ओव्यूलेशन के आसपास महिलाएं घबराहट और चिड़चिड़ापन महसूस करने लगती हैं।
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प्रोजेस्टेरोन के स्तर में बढ़ोतरी
ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का काम दिमाग के ‘GABA’ रिसेप्टर्स को शांत करना है। गाबा रिसेप्टर का मुख्य काम शरीर को शांत करना, तनाव कम करना और उत्तेजित न्यूरोन्स को भी शांत रखना है। चूंकि, ओव्यूलेशन के दौरान गाबा रिसेप्टर प्रभावित होता है, तो महिलाओं का शरीर इस बदलाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में उनके लिए शांत रहना मुश्किल हो जाता है यानी नर्वस सिस्टम ट्रिगर हो जाता है, जिससे एंग्जायटी होने लगती है।
PMDD के बढ़ते लक्षण
जिन महिलाओं को पहले से ही पीएमडीडी यानी प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर की समस्या है, उनमें ओव्यूलेशन के कारण गंभीर एंग्जायटी होने लगती है। यही नहीं, ओव्यूलेशन के कारण इन महिलाओं में पेट में दर्द या ब्लोटिंग जैसी शारीरिक परेशानियां भी होने लगती हैं, जो कि उनके स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। ऐसे में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक हो जाता है।
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निष्कर्ष
ओव्यूलेशन के दौरान बेचैनी होना या मूड स्विंग होना, किसी मानसिक बीमारी का संकेत नहीं है। यह पूरी तरह नेचुरल है, जिसे सामान्यतः रोका नहीं जा सकता है। हार्मोन में उतार-चढ़ाव इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। हां, महिलाएं अपनी डाइट और जीवनशैली में सुधार करके और रात को अच्छी नींद लेकर हार्मोन के असंतुलन को कुछ हद तक मैनेज कर सकती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि अगर नियमित रूप से ओव्यूलेशन के दौरान चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव महसूस हो, तो इस बारे में डाॅक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।
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FAQ
क्या ओव्यूलेशन के दौरान एंग्जायटी होना सामान्य है?
हां, ओव्यूलेशन के दौरान हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो कि मध्यम स्तर की एंग्जायटी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।ओव्यूलेशन की एंग्जायटी कितने दिनों तक रहती है?
आमतौर पर इस तरह की समस्या 2 से 3 दिनों तक रहती है और फिर खुद ब खुद ठीक हो जाती है।ओव्यूलेशन के दौरान हो रही घबराहट को कम करने के लिए क्या करें?
ओव्यूलेशन के दौरान चाय या कॉफी का सेवन कम करें, रोजाना हल्की एक्सरसाइज या योग करें और खुद को अच्छी तरह हाइड्रेटेड रखें। इस तरह ओव्यूलेशन के दौरान हो रही घबराहट को कम किया जा सकता है।
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Jun 23, 2026 09:57 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 23, 2026 09:57 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta