Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

क्या सोते समय मेंस्ट्रुअल कप इस्तेमाल करना सही है? डॉक्‍टर से जानें 

पीर‍ियड्स में बार-बार पैड बदलने की झंंझट से बचने के ल‍िए मह‍िलाएंं आजकल मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल करती हैं जो उन्‍हें ज्‍यादा सुव‍िधाजनक लगता है। क्‍या इसे रात में सोते समय इस्‍तेमाल कर सकते हैं? डॉक्‍टर से जानें।

जैसे पीर‍ियड्स में ब्‍लीड‍िंग को सोखने के ल‍िए पैड का इस्‍तेमाल क‍िया जाता है, उसी तरह आजकल कुछ मह‍िलाएं मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल करने लगी हैं। मेंस्ट्रुअल कप वजाइन के भीतर लगाया जाता है ताक‍ि पीर‍ियड्स के दौरान न‍िकलने वाला ब्‍लड उसमें इकट्ठा हो सके। जब कप भर जाता है, तो इसे खाली करके और साफ करने के बाद दोबारा इस्‍तेमाल क‍िया जाता है। कई म‍ह‍िलाओं को यह आरामदायक और क‍िफायती लगता है क्‍योंकि‍ कप को दोबारा इस्‍तेमाल क‍िया जा सकता है और इसे बार-बार बदलने की झंझट नहीं रहती। मेंस्ट्रुअल कप को लेकर एक शंका हमेशा मह‍िलाओं के मन में रहती है क‍ि क्‍या इसे रातभर लगाकर सो सकते हैं? यानी मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल रात में सुरक्ष‍ित है या नहीं? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

सोते समय मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल सुरक्ष‍ित है

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Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि सोते समय मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल सुरक्ष‍ित है। आमतौर पर इसे 8 से 12 घंटों तक लगाया जा सकता है, अगर आपकी नींद 7 से 8 घंटों की है, तो इसे पहनकर आराम से सो सकते हैं। मेंस्ट्रुअल कप शरीर के अंंदर पीर‍ियड्स का ब्‍लड इकट्ठा करते हैं, उसे सोखते नहीं है। यही वजह है क‍ि इससे इंफेक्‍शन होने की संभावना कम होती है।

Mayo Clinic में प्रकाश‍ित एक लेख के मुता‍ब‍िक, मेंस्ट्रुअल कप को करीब 12 घंटे तक पहना जा सकता है। वहीं टैम्‍पोन या पैड को हर चार से छह घंटे में बदलना पड़ता है। कप को बार-बार खाली करने की जरूरत नहीं होती है, खासकर अगर ब्‍लीड‍िंग कम हो।

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क‍िनके ल‍िए उपयोगी है रात में मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल?

  • जो मह‍िलाएं यात्रा कर रही हों या लंबे समय तक बाहर हों।
  • जो लंबे समय तक चलने वाला पीर‍ियड प्रोडक्‍ट यूज करना चाहती हों।
  • जो मह‍िलाएं बार-बार पैड या टैम्‍पोन बदलने से बचना चाहती हों।

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रात में मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल करने का सही तरीका

  • कप को लगाते और न‍िकालते समय आपके हाथ साफ होने चाह‍िए। इससे इंफेक्‍शन का खतरा कम करने में मदद म‍िलती है।
  • अगर पीर‍ियड्स का फ्लो ज्‍यादा है, तो सोने से पहले कप को खाली करके दोबारा लगाएं ताक‍ि रात में कप भरने की संभावना कम हो।
  • कप भले ही आरामदायक लगते हैं, लेक‍िन इसे 8 से 12 घंटे से ज्‍यादा नहीं पहनना चाह‍िए।
  • अगर कप का आकार सही नहीं है, तो लीकेज या असुव‍िधा हो सकती है इसल‍िए उम्र, फ्लो और साइज के मुताब‍िक कप चुनें।

निष्‍कर्ष:

रात में सोते समय मह‍िलाएं मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल कर सकती हैं। मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल 8 से 12 घंटों तक सुरक्ष‍ित माना जाता है इसल‍िए रात में इसे लगा सकती हैं, लेक‍िन कप को जरूरत पड़ने पर खाली कर लें और हाइजीन बनाए रखें।

FAQ

  • रात में मेंस्ट्रुअल कप यूज करने से इंंफेक्‍शन हो सकता है?

    अगर कप को साफ रखेंगी और इस्‍तेमाल के दौरान हाथों को साफ रखेंगी और हाइजीन बनाए रखेंगी, तो इंफेक्‍शन का खतरा कम होगा। सफाई की कमी से बैक्‍टीर‍ियल ग्रोथ हो सकती है। 
  • क‍िन मह‍िलाओं को मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल नहीं करना चाह‍िए?

    अगर बार-बार यूटीआई हो, हाल ही में सर्जरी हुई हो, ड‍िलीवरी के तुरंत बाद, लीकेज की श‍िकायत जैसे मामलों में मेंस्ट्रुअल कप का इस्‍तेमाल नहीं करना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 22, 2026 15:39 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 22, 2026 15:39 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal

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