मैंने कभी मिस्वाक का इस्तेमाल खुद नहीं किया, लेकिन मेरी मम्मी बताती हैं कि नानाजी रोज सुबह उठकर मिस्वाक से मंजन करते थे, उनके जमाने में टूथपेस्ट का ज्यादा चलन नहीं था, पर फिर भी उस जमाने में लोगों के दांत मजबूत हुआ करते थे। मम्मी बताती हैं कि नानाजी एक खास डिब्बे से मिस्वाक निकालकर बड़े आराम से धूप में बैठकर दांत साफ किया करते थे। लोग अब दोबारा मिस्वाक का महत्व समझने लगे हैं। जहां ब्रांड अलग-अलग टूथपेस्ट के प्रमोशन में लगी हैं, वहीं लोगों को यह समझ आ रहा है कि प्राकृतिक चीजों को फैंसी पैकेजिंग और झूठे वादों के सामनेे हराना मुश्किल है। मेडिकल या आयुर्वेदिक दुकान में पर मिस्वाक आसानी से मिल जाता है। राजस्थान, गुजरात और सूखे क्षेत्रों में मिस्वाक आसानी से मिल जाता है। कई लोग आज भी मिस्वाक को ओरल हेल्थ के लिए महंगे टूथपेस्ट से ऊपर मानते हैं। आइए आयुर्वेदाचार्य के नजरिए से समझते हैं कि यह छोटी सी लकड़ी पूरे शरीर की सेहत कैसे बदल सकती है?
शीत प्रकृति का होता है मिस्वाक
Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana ने बताया कि मिस्वाक की तासीर ठंडी होती है, आयुर्वेद के मुताबिक यह शीत प्रकृति का होता है। मिस्वाक में प्राकृतिक रूप से विटामिन सी, एंटीबैक्टीरियल गुण, एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं। मिस्वाक को आयुर्वेद में दंतधावन की प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जाता है। मिस्वाक, दांतों की लेयर को सुरक्षा देता है। मिस्वाक के इस्तेमाल से मुंह के छाले दूर होते हैं। जब मुंह की परत पतली हो जाती है, तो छाले होते हैं, मिस्वाक की मदद से इसे ठीक किया जा सकता है।
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मिस्वाक के इस्तेमाल से मसूड़े स्वस्थ रहते हैं
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के साल 2014 के एक अध्ययन के मुताबिक, मिस्वाक ओरल हाइजीन सुधारने में मदद करता है। इससे दांतों की गंदगी और दांतों में जमा प्लाक को कम करने में मदद मिलती है। स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों ने मिस्वाक का इस्तेमाल किया उनका जिंजिवल इंडेक्स स्कोर कम पाया गया यानी उनके मसूड़े ज्यादा स्वस्थ थे। जिंजिवल इंडेक्स स्कोर से पता चलता है कि मसूड़ों की सेहत कितनी अच्छी है। इसका स्कोर जितना कम होगा, मसूड़े उतने हेल्दी माने जाएंंगे।
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मिस्वाक से ओरल हेल्थ की समस्याएं दूर होती हैं

- मिस्वाक की मदद से दांतों पर जमा प्लाक और गंदगी साफ होती है। दांतों की सफाई के लिए मिस्वाक फायदेमंद है।
- मिस्वाक के इस्तेमाल से मुंह की बदबू दूर होती है क्योंकि इससे मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।
- जब मिस्वाक की लकड़ी से दातुन करते हैं, तो इससे उससे निकलने वाला रस सलाइवा के साथ मिलकर पेट में जाता है और पाचन अग्नि को शांत करता है जिससे पाचन बेहतर होता है।
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मिस्वाक को रेशे नर्म होने तक चबाते हैं
- मिस्वाक का इस्तेमाल करने के लिए हमेशा ताजी और लचीली टहनी ही चुनें।
- टहनी को सिरे से लगभग आधा इंच तक छील दें।
- छिले हुए हिस्से को दांतों में तब तक चबाएं जब तक वह नर्म होकर ब्रश के रेशे जैसे न महसूस होने लगे।
- रेशों से दांतों के चारों ओर ऊपर और नीचे मसाज करें।
- हर दो से तीन दिन के इस्तेमाल के बाद रेशों को काट दें और नया सिरा तैयार करें।
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मिस्वाक का इस्तेमाल करके सफाई का ध्यान रखें
- इस बात का ध्यान रखें कि लकड़ी को इस्तेमाल के बाद साफ तरीके से स्टोर करता है।
- मिस्वाक को गंदे या गीले डिब्बे में न रखें, इससे बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
पुरानी या सूखी लकड़ी से मसूड़े छिल सकते हैं
- मिस्वाक की लकड़ी बहुत पुरानी या सूखी होगी, तो मसूड़े छिल सकते हैं या मसूड़ों में चोट लग सकती है।
- ज्यादा जोर डालकर अगर मिस्वाक की लकड़ी का इस्तेमाल करेंगे, तो दांत की सुरक्षा परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंच सकता है।
- अगर मिस्वाक को इस्तेमाल के बाद साफ न रखें या ड्राई न करें, तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
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आयुर्वेदाचार्य की सलाह
Dr. Shrey Sharma के मुताबिक, स्वस्थ दांतों के लिए सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले मिस्वाक का इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद माना जाता है। मिस्वाक पूरी तरह से केमिकल फ्री होती है इसलिए इसका इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे, तो ओरल हेल्थ अच्छी होगी और पाचन स्वास्थ्य भी बेहतर बनेगा।
निष्कर्ष:
मिस्वाक का इस्तेमाल ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद है। यह मुंह की बदबू को दूर करता है और मुंह में जमा गंदगी और प्लाक को भी साफ करता है। आयुर्वेद में इसे दंतधावन का अहम हिस्सा माना गया है। आप भी डॉक्टर की सलाह से इसे अपने रूटीन में शामिल कर सकते हैं।
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image credit: garuda, brownliving
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Feb 25, 2026 17:58 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Feb 25, 2026 17:58 IST
Modified By : Yashaswi MathurFeb 25, 2026 17:58 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma