Tue Sep 22, 2026 | 07:53 PM IST

Medically Reviewed by Vandana Rajput , Antenatal and Postnatal Nutrition & Diabetes Educator

पेट की सेहत के लिए वरदान हैं ये 5 प्रोबायोटिक फूड्स, आज ही डाइट में करें शामिल

पेट की सेहत के लिए प्रोबायोटिक्स जैसे दही, छाछ आदि फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन करने से पेट शांत रहता है, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में भी कमी आती है। जानें, प्रोबायोटिक्स फूड्स के रूप में डाइट में क्या-क्या शामिल करें?
पेट की सेहत के लिए वरदान हैं ये 5 प्रोबायोटिक फूड्स, आज ही डाइट में करें शामिलपेट की सेहत के लिए वरदान हैं ये 5 प्रोबायोटिक फूड्स, आज ही डाइट में करें शामिल

पेट के लिए प्रोबायोटिक फूड्स काफी फायदेमंद माने जाते हैं। दरअसल, प्रोबायोटिक फूड्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो न सिर्फ आंत में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि पाचन क्षमता में भी सुधार करते हैं। हालांकि, अक्सर लोगों को यह पता नहीं चलता है कि प्रोबायोटिक फूड्स के विकल्प के तौर पर वे अपनी डाइट में किन-किन चीजों को शामिल कर सकते हैं। अगर आपको भी यह जानकारी नहीं है, तो इस लेख को जरूर पढ़ें। इस लेख में नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत आपको प्रोबायोटिक फूड्स के कुछ बेहतर विकल्पों के बारे में बता रही हैं।

पेट की सेहत के लिए 5 प्रोबायोटिक फूड्स

best probiotic foods for gut healthbest probiotic foods for gut health

  1. खाएं दहीः यह बात तो आप जानते ही होंगे कि दही पेट के लिए बहुत ही लाभकारी प्रोबायोटिक फूड है। इसमें कई तरह के माइक्रोऑर्गेनिज्म होते हैं, जो आंतों को स्वस्थ रखते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि दही का सेवन करने से ब्लोटिंग, गैस और कब्ज जैसी तमाम समस्याओं से राहत मिलती है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि कई बार गैस या ब्लोटिंग किसी अन्य समस्या का लक्षण हो सकता है।
  2. पिएं छाछः प्रोबायोटिक के विकल्पों में छाछ भी शामिल है। छाछ में विटामिन, कैल्शियम, फाॅस्फोरस आदि शामिल होते हैं। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और पेट के बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। छाछ पीने से पेट की एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्या कम होती है। यही नहीं, छाछ बॉडी को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे बाउल मूवमेंट भी सुधार होता है।
  3. कांजीः यह भी पारंपरिक नॉर्थ इंडियन फर्मेंटेड प्रोबायोटिक ड्रिंक है। विशेषज्ञ की मानें, तो कोई भी फर्मेंटेड ड्रिंक पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह पेट के एसिड को शांत करती है, आंतों के बैक्टीरिया में सुधार करती हैं और गट हेल्थ को बेहतर बनाती है। इस तरह देखा जाए, तो कांजी पेट से संबंधित समस्याओं से राहत दिलाती है।
  4. इडली-डोसाः इडली और डोसा सिर्फ दक्षिण में ही नहीं, बल्कि उत्तरी भारत में भी काफी प्रचलित है। यह डिश न सिर्फ स्वाद के लिए जाने जाते हैं, बल्कि यह पेट के लिए भी काफी फायदेमंद हैं। असल में, इडली और डोसा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला चावल-उड़द की दाल बैटर रात भर के लिए फर्मेंटेड होता है। फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के दौरान कॉम्प्लेक्स स्टार्च और प्रोटीन का प्राकृतिक रूप से टूटना पाचन तंत्र के काम को आसान बना देता है।
  5. पखाला भातः पखाला भात पूर्वी भारत में खाई जाने वाली एक ट्रेडिशनल डिश है। इसे बनाने के लिए पके हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है। इससे पके हुए चावल फर्मेंटेड हो जाते हैं। इस तरह, यह बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड के रूप में सामने आता है। इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है, इम्यूनिटी बूस्ट होती है और पेट की सेहत को भी बहुत आराम मिलता है। आप चाहें, तो दही के साथ पखाला भात मिक्स करके इसका सेवन कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स क्या हैं? एक्‍सपर्ट से जानें सेहत के लिए ये क्यों हैं जरूरी

क्या कहती है स्टडी?

साल 2025 में Frontiers in Microbiology नामक जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, प्रोबायोटिक्स पेट के माइक्रोबायोम को संतुलित रखते हैं। स्टडी में आगे यह भी बताया गया है कि पाचन तंत्र स्वस्थ रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही नहीं, इसे सिर्फ पाचन संबंधी समस्याओं तक सीमित रखना सही नहीं है। यह कई विभिन्न बीमारियों जैसे डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग, सूजन संबंधी बीमारियों और श्वास संबंधी समस्याओं के रोकथाम और उपचार में मदद करता है।

एक्सपर्ट की सलाह

Dietetics वंदना राजपूत कहती हैं, "वैसे तो पेट की सेहत के लिहाज से प्रोबायोटिक बहुत ही लाभकारी है। यह आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने, पेट को शांत रखने और एसिडिटी जैसी समस्या से राहत दिलाने में अहम भूमिका अदा करता है।  इसके बावजूद, इस बात का ध्यान रखें कि हर व्यक्ति को प्रोबायोटिक का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि, इस संबंध में अभी रिसर्चों की कमी है। एक्सपर्ट यह विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आप किसी खास किस्म की मेडिसिन ले रहे हैं या हाल ही में जिन महिलाओं ने प्री-मैच्योर शिशु को जन्म दिया है, तो इन स्थितियों में प्रोबायोटिक्स का सेवन करने से बचें।"

इसे भी पढ़ें: पेट में गुड बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए क्या खाएं? एक्सपर्ट से जानें

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि आंतों के लिए प्रोबायोटिक्स फायदेमंद हैं। इसे आप अपनी रेगुलर डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। हालांकि, अगर आपको किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो बेहतर है कि इसे डाइट का हिस्सा बनाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह ले लें। इसके अलावा, अगर किसी तरह का इंफेक्शन है, तो भी इसका सेवन करने से बचें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड या पैक्ड योगर्ट को प्रोबायोटिक विकल्प के रूप में चुन सकते हैं?

    पैक्ड फ्लेवर्ड योगर्ट में प्रिजर्वेटिव्स और एडेड शुगर होते हैं। ये तत्व आंतों में हानिकारक बैक्टीरिया और यीस्ट को बढ़ावा देती है, जिससे प्रोबायोटिक्स का प्राकृतिक लाभ समाप्त हो जाता है।
  • क्या एसिडिटी या सीने में जलन के तुरंत बाद बहुत ठंडा दही या छाछ पीना सही रहता है?

    एसिडिटी या सीने में जलन के तुरंत बाद बहुत ठंडा दही या छाछ नहीं पीना चाहिए। एसिडिटी में सामान्य तापमान की छाछ में थोड़ा भुना जीरा या काला नमक मिलाकर पीना पेट को तुरंत राहत दिलाता है।

Read Next

छोले-भटूरे से लेकर चाट-पकौड़ी तक, क्या ऑयली फूड खाकर नींबू पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 22, 2026 18:13 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Vandana Rajput

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content