पेट के लिए प्रोबायोटिक फूड्स काफी फायदेमंद माने जाते हैं। दरअसल, प्रोबायोटिक फूड्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो न सिर्फ आंत में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि पाचन क्षमता में भी सुधार करते हैं। हालांकि, अक्सर लोगों को यह पता नहीं चलता है कि प्रोबायोटिक फूड्स के विकल्प के तौर पर वे अपनी डाइट में किन-किन चीजों को शामिल कर सकते हैं। अगर आपको भी यह जानकारी नहीं है, तो इस लेख को जरूर पढ़ें। इस लेख में नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत आपको प्रोबायोटिक फूड्स के कुछ बेहतर विकल्पों के बारे में बता रही हैं।
पेट की सेहत के लिए 5 प्रोबायोटिक फूड्स
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- खाएं दहीः यह बात तो आप जानते ही होंगे कि दही पेट के लिए बहुत ही लाभकारी प्रोबायोटिक फूड है। इसमें कई तरह के माइक्रोऑर्गेनिज्म होते हैं, जो आंतों को स्वस्थ रखते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि दही का सेवन करने से ब्लोटिंग, गैस और कब्ज जैसी तमाम समस्याओं से राहत मिलती है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि कई बार गैस या ब्लोटिंग किसी अन्य समस्या का लक्षण हो सकता है।
- पिएं छाछः प्रोबायोटिक के विकल्पों में छाछ भी शामिल है। छाछ में विटामिन, कैल्शियम, फाॅस्फोरस आदि शामिल होते हैं। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और पेट के बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। छाछ पीने से पेट की एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्या कम होती है। यही नहीं, छाछ बॉडी को हाइड्रेटेड रखता है, जिससे बाउल मूवमेंट भी सुधार होता है।
- कांजीः यह भी पारंपरिक नॉर्थ इंडियन फर्मेंटेड प्रोबायोटिक ड्रिंक है। विशेषज्ञ की मानें, तो कोई भी फर्मेंटेड ड्रिंक पेट के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह पेट के एसिड को शांत करती है, आंतों के बैक्टीरिया में सुधार करती हैं और गट हेल्थ को बेहतर बनाती है। इस तरह देखा जाए, तो कांजी पेट से संबंधित समस्याओं से राहत दिलाती है।
- इडली-डोसाः इडली और डोसा सिर्फ दक्षिण में ही नहीं, बल्कि उत्तरी भारत में भी काफी प्रचलित है। यह डिश न सिर्फ स्वाद के लिए जाने जाते हैं, बल्कि यह पेट के लिए भी काफी फायदेमंद हैं। असल में, इडली और डोसा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला चावल-उड़द की दाल बैटर रात भर के लिए फर्मेंटेड होता है। फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के दौरान कॉम्प्लेक्स स्टार्च और प्रोटीन का प्राकृतिक रूप से टूटना पाचन तंत्र के काम को आसान बना देता है।
- पखाला भातः पखाला भात पूर्वी भारत में खाई जाने वाली एक ट्रेडिशनल डिश है। इसे बनाने के लिए पके हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है। इससे पके हुए चावल फर्मेंटेड हो जाते हैं। इस तरह, यह बेहतरीन प्रोबायोटिक फूड के रूप में सामने आता है। इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है, इम्यूनिटी बूस्ट होती है और पेट की सेहत को भी बहुत आराम मिलता है। आप चाहें, तो दही के साथ पखाला भात मिक्स करके इसका सेवन कर सकते हैं।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2025 में Frontiers in Microbiology नामक जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, प्रोबायोटिक्स पेट के माइक्रोबायोम को संतुलित रखते हैं। स्टडी में आगे यह भी बताया गया है कि पाचन तंत्र स्वस्थ रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही नहीं, इसे सिर्फ पाचन संबंधी समस्याओं तक सीमित रखना सही नहीं है। यह कई विभिन्न बीमारियों जैसे डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग, सूजन संबंधी बीमारियों और श्वास संबंधी समस्याओं के रोकथाम और उपचार में मदद करता है।
एक्सपर्ट की सलाह
Dietetics वंदना राजपूत कहती हैं, "वैसे तो पेट की सेहत के लिहाज से प्रोबायोटिक बहुत ही लाभकारी है। यह आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने, पेट को शांत रखने और एसिडिटी जैसी समस्या से राहत दिलाने में अहम भूमिका अदा करता है। इसके बावजूद, इस बात का ध्यान रखें कि हर व्यक्ति को प्रोबायोटिक का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि, इस संबंध में अभी रिसर्चों की कमी है। एक्सपर्ट यह विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर आप किसी खास किस्म की मेडिसिन ले रहे हैं या हाल ही में जिन महिलाओं ने प्री-मैच्योर शिशु को जन्म दिया है, तो इन स्थितियों में प्रोबायोटिक्स का सेवन करने से बचें।"
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निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि आंतों के लिए प्रोबायोटिक्स फायदेमंद हैं। इसे आप अपनी रेगुलर डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। हालांकि, अगर आपको किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो बेहतर है कि इसे डाइट का हिस्सा बनाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह ले लें। इसके अलावा, अगर किसी तरह का इंफेक्शन है, तो भी इसका सेवन करने से बचें।
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FAQ
क्या बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड या पैक्ड योगर्ट को प्रोबायोटिक विकल्प के रूप में चुन सकते हैं?
पैक्ड फ्लेवर्ड योगर्ट में प्रिजर्वेटिव्स और एडेड शुगर होते हैं। ये तत्व आंतों में हानिकारक बैक्टीरिया और यीस्ट को बढ़ावा देती है, जिससे प्रोबायोटिक्स का प्राकृतिक लाभ समाप्त हो जाता है।क्या एसिडिटी या सीने में जलन के तुरंत बाद बहुत ठंडा दही या छाछ पीना सही रहता है?
एसिडिटी या सीने में जलन के तुरंत बाद बहुत ठंडा दही या छाछ नहीं पीना चाहिए। एसिडिटी में सामान्य तापमान की छाछ में थोड़ा भुना जीरा या काला नमक मिलाकर पीना पेट को तुरंत राहत दिलाता है।
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Sep 22, 2026 18:13 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Vandana Rajput
