Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

सिर्फ खराब डाइट ही नहीं, शरीर में लगातार सूजन रहने के पीछे हो सकते हैं ये 5 कारण

शरीर में सूजन एक ऐसी स्थिति है, जिसे अक्सर लोग केवल खराब खानपान या किसी बीमारी से जोड़कर देखते हैं। हालांकि आयुर्वेद के अनुसार सूजन के पीछे सिर्फ भोजन ही जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं ज‍िसके बारे में जानें इस लेख से।

शरीर में सूजन (Inflammation) का कारण स‍िर्फ डाइट नहीं होती, बल्‍क‍ि इसके पीछे खराब जीवनशैली, खराब मानसिक स्थिति, सोने-जागने की गलत आदतें और भोजन के गलत न‍ियम भी इसकी वजह बन सकते हैं। जब शरीर में दोषों, विशेष रूप से पित्त दोष, का असंतुलन बढ़ता है, तो शरीर में गर्मी, जलन और सूजन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अगर इन कारणों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो शरीर में लगातार सूजन बनी रह सकती है। आइए जानते हैं कि खराब डाइट के अलावा कौन-से वो पांच कारण हैं जो शरीर में लगातार सूजन बढ़ा सकते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

1. तनाव, गुस्सा और बढ़ता पित्त

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आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा माना गया है। लगातार तनाव, चिंता और गुस्सा पित्त दोष को बढ़ा सकते हैं। जो लोग लगातार तनाव में रहते हैं या बात-बात पर गुस्‍सा हो जाते हैं, उनमें सूजन की समस्या ज्‍यादा देखने को मिल सकती है।
जब पित्त बढ़ता है, तो शरीर में-

  • गर्मी बढ़ सकती है।
  • जलन महसूस हो सकती है।
  • सूजन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, क्रॉन‍िक सूजन के कारण टाइप 2 डायब‍िटीज और कार्ड‍ियोवैस्‍कुलर बीमार‍ियों का खतरा बढ़ सकता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा भी हो सकता है।

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2. रात में देर तक जागना

आधुनिक जीवनशैली में देर रात तक मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर काम करना या पर्याप्त नींद न लेना आम बात हो गई है। आयुर्वेद के अनुसार रात में जागने से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (Biological Clock) प्रभावित होती है। इस वजह से-

  • स्‍ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं।
  • शरीर की रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • पित्त असंतुलित हो सकता है।
  • सूजन की समस्या बढ़ सकती है।
  • नियमित और पर्याप्त नींद शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

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3. कम पानी पीना और ज्‍यादा देर धूप में रहना

गर्मी के मौसम में शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। जब व्यक्ति कम पानी पीता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ सकती है और पित्त असंतुलित हो सकता है। इसके अलावा ये कारण भी हो सकते हैं-

  • लंबे समय तक धूप में रहना
  • खुले वातावरण में लगातार काम करना
  • तेज गर्मी के संपर्क में रहना

ये सभी स्थितियां शरीर में गर्मी और सूजन को बढ़ा सकती हैं। इसलिए गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है।

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4. जेनेटिक कारण

आयुर्वेद के अनुसार कुछ लोगों की प्रकृति जन्म से ही पित्त प्रधान होती है। ऐसे लोगों में शरीर की गर्मी, सेंस‍िट‍िव‍िटी और सूजन की प्रवृत्ति ज्‍यादा हो सकती है। इसलिए उन्हें अपने खानपान और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

5. गलत खानपान और दूषी विष का बनना

आयुर्वेद के अनुसार जब व्यक्ति लंबे समय तक गलत समय पर भोजन करता है या ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करता है जो एक-दूसरे के साथ अनुकूल नहीं हैं, तो शरीर में दूषी विष बनने लगता है। इसका अर्थ है ऐसा विष या हानिकारक तत्व जो धीरे-धीरे शरीर को दूषित करता रहता है। जैसे-

  • दूध और नमक का एक साथ सेवन
  • दूध और मछली का सेवन
  • बार-बार भारी भोजन करना
  • भूख न होने पर भी खाना

ऐसी आदतें पाचन तंत्र पर ज्‍यादा डाल सकती हैं और शरीर में सूजन संबंधि‍त समस्याओं को बढ़ावा दे सकती हैं।

न‍िष्कर्ष:

अगर शरीर में लगातार सूजन है, तो उसका कारण स्‍ट्रेस, गुस्‍सा, बढ़ता पित्त, रात में देर तक जागना, कम पानी पीना और ज्‍यादा देर धूप में रहना, जेनेटिक कारण, गलत खानपान और दूषी विष बनने जैसे कारण हो सकते हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 31, 2026 23:01 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 31, 2026 23:01 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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