Fri Oct 23, 2026 | 08:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

नजरअंदाज न करें प्रोबायोटिक की कमी के ये 5 लक्षण, समय रहते कर लें डाइट में शामिल

प्रोबायोटिक, शरीर में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है और इसकी कमी से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं। कैसे? जानते हैं इस बारे में एक्सपर्ट और साथ ही जानेंगे इस कमी से कैसे बचें?
नजरअंदाज न करें प्रोबायोटिक की कमी के ये 5 लक्षण, समय रहते कर लें डाइट में शामिलनजरअंदाज न करें प्रोबायोटिक की कमी के ये 5 लक्षण, समय रहते कर लें डाइट में शामिल

आप जो भी खाते हैं, उसका आपकी सेहत पर गहरा असर हो सकता है खासकर कि आपकी आंतों पर। इसकी कमी न सिर्फ पेट में गट बैक्टीरिया को प्रभावित कर सकती है बल्कि, आपका डाइजेशन भी इससे काफी हद तक प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा भी प्रोबायोटिक सेहत के लिए अलग-अलग कारणों से जरूरी है, जिस बारे में हमने Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से बात की। साथ ही जाना कि प्रोबायोटिक्स की कमी से शरीर में कौन से लक्षण नजर आते हैं और इससे बचाव के लिए हमें क्या करना चाहिए?

प्रोबायोटिक की कमी के 5 लक्षण

Dr. Aravinda S N कहते हैं कि प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं जो पर्याप्त मात्रा में सेवन करने पर स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं। ये दही, केफिर और कुछ किण्वित खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। हालांकि, प्रोबायोटिक की कमी कोई औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सीय निदान नहीं है और केवल लक्षणों के आधार पर यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि किसी व्यक्ति में लाभकारी बैक्टीरिया की कमी है। हालांकि, निम्नलिखित लक्षण पाचन संबंधी समस्याओं या आंत के माइक्रोबायोम में बदलाव का संकेत दे सकते हैं जैसे-

1. बार-बार पेट फूलना और गैस बनना

डॉ. अरविंद कहते हैं कि अगर किसी को अकारण ही बार-बार पेट फूलने की समस्या हो जाती है तो यह खराब गट हेल्थ का संकेत हो सकता है। इसके अलावा गुड बैक्टीरिया की कमी से भी यह समस्या हो सकती है। आंत के बैक्टीरिया द्वारा भोजन के फर्मेंटेशन में भिन्नता आने पर अत्यधिक गैस, पेट भरा हुआ महसूस होना या पेट फूलना की दिक्कत हो सकती है। हालांकि, खाद्य असहिष्णुता, कब्ज और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम भी इसी तरह के लक्षण पैदा कर सकते हैं।

2. अनियमित मल त्याग

प्रोबायोटिक की कमी से अनियमित मल त्याग की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों लोग रेगुलर मलत्याग में दिक्कत होती है। बार-बार कब्ज या दस्त आंत के माइक्रोबायोम में बदलाव से संबंधित हो सकते हैं। लगातार लक्षण संक्रमण, आहार संबंधी समस्याओं या अन्य पाचन संबंधी स्थितियों का भी संकेत दे सकते हैं।

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3. पेट में बेचैनी

डॉ. अरविंद कहते हैं कि पाचन में बदलाव के साथ हल्का पेट दर्द या बेचैनी हो सकती है। गंभीर या बार-बार होने वाले दर्द को आंत के बैक्टीरिया में असंतुलन से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हालांकि, Nutrients जर्नल में प्रकाशित इस शोध की मानें तो प्रोबायोटिक्स ने वयस्कों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट संक्रमण के जोखिम को मामूली रूप से कम किया है।

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4. शरीर में सूजन कम करने वाला

डॉ. अरविंद कहते हैं कि प्रोबायोटिक की कमी से शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है। प्रोबायोटिक्स सूजन बढ़ाने वाले साइटोकिन्स को कम करके और लीकी गट की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के असर को भी कम कर सकते हैं जिससे शरीर में सूजन की समस्या नहीं होती।

5. कुछ संक्रमणों के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि

आंत का माइक्रोबायोम इम्यून सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन बार-बार होने वाले संक्रमण प्रोबायोटिक्स के निम्न स्तर का विशिष्ट संकेत नहीं हैं। अन्य स्वास्थ्य समस्याएं, पोषण संबंधी कमियां और जीवनशैली संबंधी कारक भी इसमें योगदान दे सकते हैं।

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प्रोबायोटिक की कमी से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. अरविंद कहते हैं कि प्रोबायोटिक की कमी से बचने के लिए डाइट में कुछ चीजों को शामिल करें जैसे सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां और दालें। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों के सेवन पर ध्यान दें जैसे केला, संतरा और एवोकाडो। साथ ही डाइट में दही, इडली-डोसा, कांजी और छाछ का सेवन करें जो कि फर्मेंटेंड फूड्स में खाते हैं।

इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद लेना समग्र स्वास्थ्य के लिए जरूरी है क्योंकि प्रोबायोटिक फूड्स को पचाने के लिए शरीर को ज्यादा तेज मेटाबॉलिज्म की जरूरत होती है जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है नहीं को एसिडिटी की दिक्कत हो सकती है।

निष्कर्ष:

प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स सभी के लिए जरूरी नहीं हैं और इनके लाभ विशिष्ट प्रकार और इलाज की जा रही स्थिति पर निर्भर करते हैं। अगर पाचन संबंधी लक्षण बने रहें, विशेष रूप से अगर मल में खून आना, बिना किसी कारण के वजन कम होना, बुखार या पेट में तेज दर्द हो, तो किसी स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श लें।

FAQ

  • फर्मेंटेड खाना खाने के क्या फायदे हैं?

    फर्मेंडेट खाना खाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह डाइजेशन को बेहतर बनाने में मददगार है। इसके अलावा यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ शरीर में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में मदद कर सकता है।
  • फर्मेंटेड फूड कौन-कौन से हैं? 

    फर्मेंडेट फूड में आप दही, किमची, इडली, डोसा खा सकते हैं। 

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Pallavi Kumari

चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 23, 2026 19:41 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr. Aravinda S N