शरीर में सूजन का पता लगाने के लिए लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, ऑटोइम्यून मार्कर, स्टूल कैलप्रोटेक्टिन, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड, CRP, ESR और CBC जैसे टेस्ट किए जाते हैं। कई बार शरीर में दर्द, हाथ-पैरों में सूजन, जोड़ों में अकड़न या हर समय थकान महसूस होती है। अक्सर लोग इसे काम की थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये लक्षण शरीर के अंदर होने वाली सूजन का संकेत हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि शरीर में सूजन होने पर कौन से लक्षण नजर आते हैं और सूजन का पता लगाने के लिए किन जांच की मदद ली जा सकती है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Vighnesh Y, Sr. Consultant General Physician At Yashoda Hospitals, Secunderabad से बात की।
शरीर में छिपी सूजन के संकेत
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इंफ्लेमेशन (सूजन) शरीर में इंफेक्शन, चोट या जलन के प्रति एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया है। यह दो तरह का हो सकता है। पहला एक्यूट इंफ्लेमेशन जो अचानक होता है। दूसरा क्रोनिक इंफ्लेमेशन जो धीरे-धीरे विकसित होता है और कई बार इसके स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते हैं।
एक्यूट इंफ्लेमेशन के लक्षण
एक्यूट इंफ्लेमेशन के सामान्य लक्षणों में-
- स्किन रेडनेस
- प्रभावित हिस्से में गर्माहट महसूस होना
- सूजन
- दर्द या छूने पर तकलीफ होना और
- उस हिस्से की गतिविधि या काम करने की क्षमता कम होना शामिल हैं।
क्रोनिक इंफ्लेमेशन के लक्षण
क्रोनिक इंफ्लेमेशन के लक्षण हल्के और अस्पष्ट हो सकते हैं जैसे-
- लगातार थकान
- जोड़ों में दर्द या अकड़न
- बार-बार बुखार आना
- त्वचा पर चकत्ते होना
- पाचन संबंधित समस्याएं
- बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में बदलाव
- नींद ठीक से न आना और हर समय अस्वस्थ महसूस होना शरीर में अंदरूनी सूजन का संकेत हो सकता है।
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क्रोनिक सूजन के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
क्रोनिक सूजन यानी लंबे समय तक शरीर में बनी रहने वाली सूजन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है जैसे- लगातार सूजन रहने से शरीर के टिशूज और अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। Harvard Medical School में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, शरीर में सूजन के कारण हार्ट डिजीज, टाइप 2 डायबिटीज, अल्जाइमर रोग, एलर्जी, अस्थमा, गठिया, चिंता, डिप्रेशन और त्वचा से जुड़ी कुछ बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सूजन का पता लगाने के लिए जरूरी मेडिकल टेस्ट
शरीर में सूजन होने पर डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी लेते हैं। सूजन का पता लगाने के लिए केवल एक जांच काफी नहीं होती। इसकी पुष्टि के लिए कई जांच की जा सकती हैं-
1. लिवर फंक्शन टेस्ट
लिवर फंक्शन टेस्ट से लिवर की कार्यक्षमता और उससे जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जाता है। लिवर में सूजन या किसी तरह का डैमेज होने पर कुछ लिवर एंजाइम का लेवल बढ़ सकता है।
2. किडनी फंक्शन टेस्ट
किडनी फंक्शन टेस्ट से किडनी की कार्यक्षमता का पता चलता है। किडनी में किसी तरह की समस्या होने पर शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे सूजन दिखाई दे सकती है।
3. ऑटोइम्यून मार्कर
ऑटोइम्यून मार्कर की जांच से उन बीमारियों के संकेत मिल सकते हैं, जिनमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही कोशिकाओं और टिशूज पर हमला करने लगता है। ल्यूपस और रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियों में इन जांचों की मदद ली जा सकती है।
4. स्टूल कैलप्रोटेक्टिन
आंतों में सूजन का संदेह होने पर स्टूल कैलप्रोटेक्टिन (Stool Calprotectin) की जांच भी कराई जा सकती है। इससे स्टूल में कैलप्रोटेक्टिन नाम के प्रोटीन के लेवल का पता चलता है, जो आंतों में सूजन का संकेत हो सकता है।
5. इमेजिंग टेस्ट
इसके अलावा, शरीर के किसी खास अंग या टिशूज में सूजन का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांच की मदद ली जा सकती है।
6. सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP)
इंफेक्शन चोट या अन्य सूजन संबंधित स्थितियों में लिवर द्वारा बनाए जाने वाले इस प्रोटीन का स्तर बढ़ सकता है जिसे इस जांच से चेक किया जाता है।
7. एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट (ESR)
ESR टेस्ट से पता चलता है कि रेड ब्लड सेल्स एक घंटे में कितनी तेजी से टेस्ट ट्यूब के नीचे बैठती हैं? इसकी दर बढ़ने पर शरीर में सूजन होने का संकेत मिल सकता है, लेकिन यह जांच सूजन का सटीक कारण नहीं बताती।
8. कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC)
CBC टेस्ट से रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स की संख्या का पता लगाया जाता है। व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या में बदलाव, इंफेक्शन या सूजन का संकेत दे सकता है। हालांकि, केवल CBC से सूजन की पुष्टि नहीं होती।
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डॉक्टर की सलाह: सूजन को कम करने के टिप्स
- Harvard Medical School में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, टमाटर, हरी पत्तेदार सब्जियां, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, चेरी, संतरा, सेब जैसे फूड्स शरीर की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- डाइट में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें शामिल करें। इनमें मौजूद फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स, सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- नियमित रूप से टहलना, साइकिल चलाना, तैरना या योग करने से शरीर की सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है।
- हर दिन अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। नींद की कमी शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।
- लगातार तनाव रहने से शरीर की सामान्य प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। तनाव कम करने के लिए ध्यान, योग, गहरी सांस लेने की तकनीक और अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालें।
- सिगरेट और तंबाकू के सेवन से बचें। इससे शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन बढ़ सकती है।
- शरीर में पानी की कमी होने से कई शारीरिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और अपनी जरूरत के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन करें।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
केवल लक्षण या लैब टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर खुद से बीमारी का पता लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर शरीर में सूजन लगातार बढ़ रही हो या बनी हुई हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। जोड़ों में दर्द, लगातार थकान या अन्य लक्षण बने हुए हैं, तो भी जांच कराएं।
निष्कर्ष:
शरीर में सूजन का पता लगाने के लिए लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, ऑटोइम्यून मार्कर, स्टूल कैलप्रोटेक्टिन, सीटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड वगैरह की मदद ली जाती है। इसके अलावा CRP, ESR और CBC जैसे टेस्ट भी किए जाते हैं। अगर शरीर में सूजन बढ़ रही हो या कम न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। सूजन कम करने के लिए कुछ टिप्स की मदद ले सकते हैं जैसे डाइट में हरी सब्जिया, फल, साबुत अनाज, दालें वगैरह शामिल करें। नियमित रूप से टहलना, साइकिल चलाना, योग वगैरह से सूजन कम करने में मदद मिलती है। हर दिन अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। स्ट्रेस से बचने के लिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन की मदद लें, सिगरेट, तंबाकू के सेवन से बचें।
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FAQ
क्या शरीर में सूजन होने से पेट फूल सकता है?
हां, आंतों में सूजन या पाचन संबंधित कुछ समस्याओं के कारण पेट फूल सकता है। इसके साथ, पेट में दर्द, गैस, दस्त या पेट में भारीपन भी महसूस हो सकता है।क्या शरीर में सूजन होने से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है?
क्रोनिक इंफ्लेमेशन ब्लड वेसल्स को प्रभावित कर सकता है और धमनियों में प्लाक जमा होने का कारण भी बन सकता है।
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Oct 01, 2026 20:02 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Vighnesh Y
