Sun Sep 27, 2026 | 01:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

महिलाओं के शरीर में विटामिन डी कम होने पर नजर आते हैं ये 7 लक्षण, न करें नजरअंदाज

महिलाओं में विटामिन डी की कमी एक आम समस्या है, जिसके कारण थकान, हड्डियों में दर्द और बालों का झड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं। आइए जानते हैं विटामिन डी की कमी के अन्य लक्षण और इस कमी को पूरा करने के तरीके के बारे में। 
महिलाओं के शरीर में विटामिन डी कम होने पर नजर आते हैं ये 7 लक्षण, न करें नजरअंदाजमहिलाओं के शरीर में विटामिन डी कम होने पर नजर आते हैं ये 7 लक्षण, न करें नजरअंदाज

भारत में ज्यादातर महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी वर्तमान में एक आम समस्या बन चुकी है। महिलाएं शरीर में लगातार थकान, कमर दर्द, जोड़ों में अकड़न या बाल झड़ने की समस्या से परेशान रहती हैं। आमतौर पर महिलाओं के शरीर में होने वाली इन समस्याओं का एक बड़ा कारण विटामिन डी की कमी होती है। Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida बताती हैं कि शरीर में विटामिन डी एक हार्मोन की तरह काम करता है। यह भोजन से कैल्शियम और फास्फोरस को अवशोषित करने में मदद करता है, जो हड्डियों, मांसपेशियों और इम्यून सिस्टम के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे में आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर क्या लक्षण नजर आते हैं?

महिलाओं में विटामिन डी की कमी के लक्षण

साल 2026 में MAEDICA – a Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, महिलाओं की जीवन के अलग-अलग स्टेज में विटामिन डी की कमी के कई गंभीर लक्षण नजर आ सकते हैं। जैसे-

  • बच्चों और किशोरियों में यह कमी रिकेट्स और समय से पहले प्यूबर्टी का कारण बनना।
  • वयस्क महिलाओं में PCOS की समस्या और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं होना।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन डी की कमी से जेस्टेशनल डायबिटीज, प्री-इक्लेम्पसिया, सिजेरियन डिलीवरी, समय से पहले डिलीवरी, जन्म के समय शिशु का कम वजन और विकसित हो रहे भ्रूण के हड्डियों का द्रव्यमान प्रभावित होने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
  • मेनोपॉज के समय यह हॉट फ्लैशेस, नींद से जुड़ी समस्याएं, डिप्रेशन, यौन समस्याएं, ऑस्टियोपोरोसिस, टाइप 2 डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, डिस्लिपिडेमिया और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ाती है।
  • बुजुर्ग महिलाओं में इसकी कमी से मांसपेशियों में कमजोरी, सार्कोपेनिया, शरीर का संतुलन बिगड़ने के कारण और हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा ज्यादा हो जाता है।

Dr.Anju Suryapani का कहना है कि विटामिन डी की कमी की शुरुआत अक्सर बहुत धीमी होती है, इसलिए शुरुआती स्टेज में महिलाएं इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। हालांकि, समय के साथ यह शरीर में साफ संकेत दिखाने लगते हैं-

1. हड्डियों और जोड़ों में लगातार दर्द

विटामिन डी की कमी से शरीर कैल्शियम को सोख नहीं पाता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसके कारण अक्सर महिलाओं को यह समस्याएं हो सकती हैं- 

  • पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहता है
  • घुटनों, कूल्हों और पैरों की हड्डियों में तेज दर्द महसूस होता है
  • सीढ़ियां चढ़ने या लंबे समय तक खड़े रहने में मुश्किल होती है।

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2. ज्यादा थकान और कमजोरी

पर्याप्त नींद लेने और अच्छा भोजन करने के बाद भी अगर सुबह उठते ही शरीर में सुस्ती और भारीपन महसूस होता है, तो यह विटामिन डी की कमी का एक बड़ा लक्षण है। सेल्स में एनर्जी निर्माण के लिए विटामिन डी जरूरी होता है।

3. मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी

मांसपेशियों के सही कामकाज के लिए शरीर में विटामिन डी जरूरी होता है। ऐसे में शरीर में इसकी कमी से हाथों और पैरों की मांसपेशियों में अचानक खिंचाव या ऐंठन आने लगती है। इसके साथ ही उठने या बैठने में मांसपेशियों में कमज़ोरी महसूस होती है।

4. मस्कुलोसकेलेटल और हार्मोनल बदलाव

विटामिन डी दिमाग में सेरोटिनिन नाम का न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण को प्रभावित करता है, जिसे 'हैप्पी हार्मोन' के रूप में जाना जाता है। शरीर में विटामिन डी की कमी महिलाओं में चि़ड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण देखे जाते हैं। खासतौर पर PMS या मेनोपॉज के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है।

5. ज्यादा बाल झड़ना

बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन जब महिलाओं में बहुत तेजी से बाल पतले होने की समस्या बढ़ जाती है या बाल झड़ते हैं तो इसका मुख्य कारण शरीर में विटामिन डी की कमी हो सकती है। यह बालों के फॉलिकल्स को बढ़ावा देने में मदद करते हैं, जिससे बाल मजबूत होते हैं।

6. बार-बार बीमार पड़ना या इंफेक्शन होना

विटामिन डी हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखता है। इसकी कमी होने पर महिलाओं को बार-बार सर्दी, जुकाम, खांसी या सांस से जुड़े इंफेक्शन होने लगते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ने लगता है, जिससे शरीर में कमजोरी की समस्या होती है।

7. घाव या चोट का धीरे भरना

अगर किसी सर्जरी, चोट या इंफेक्शन के बाद आपका घाव भरने में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है, तो यह दिखाता है कि शरीर में नए टिश्यू के निर्माण के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं है। घाव या चोट का धीरे-धीरे ठीक होने या सही होने में समय लगना शरीर में विटामिन डी की कमी का संकेत हो सकता है।

महिलाओं में विटामिन डी की कमी के कारण

Dr.Anju Suryapani के अनुसार, महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

1. धूप का कम संपर्क

घर के अंदर लंबे समय तक काम करना, सुबह की हल्की धूप न लेना और बार निकलते समय सनस्क्रीन या पूरे ढके हुए कपड़ों का इस्तेमाल करने से शरीर में विटामिन डी की कमी हो सकती है।

2. मेनोपॉज और उम्र का असर

40 से 50 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने लगता है, जिससे उनकी हड्डियों का घनत्व होता है और विटामिन डी को प्रोसेस करने की क्षमता कम हो जाती है।

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3. प्रेग्नेंसी और स्तनपान

प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण के विकास के लिए मां के शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की खपत बढ़ जाती है, जिससे शरीर में विटामिन डी की कमी हो सकती है।

4. अनहेल्दी खान-पान

शाकाहारी भोजन में विटामिन डी का नेचुरल सोर्स बहुत सीमित होते हैं। अनहेल्दी और असंतुलित खान-पान की आदतें शरीर में विटामिन डी के अवशोषण और लेवल को सीधे प्रभावित करता है।

5. मोटापा

ज्यादा फैट वाले शरीर में विटामिन डी बढ़ना बंद हो जाता है और खून में आसानी से घुल नहीं पाता है। विटामिन डी एक फैट में घुलनशील विटामिन है। ज्यादा वजन या मोटापे वाले लोगों के शरीर में फैट टिशू ज्यादा होते हैं, जो विटामिन डी को अवशोषित करके अपने अंदर जमा कर लेते हैं।

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विटामिन डी की कमी से होने वाले खतरे

Dr. Anju Suryapani के अनुसार, अगर शरीर में विटामिन डी की कमी का समय पर इलाज न किया जाए तो महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे-

  • ऑस्टियोपोरोसिस- शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियां इतनी खोखली और कमजोर हो जाती हैं कि मामूली झटके या गिरने पर भी फ्रैक्चर हो जाता है।
  • ऑस्टियोमलेशिया- विटामिन डी की कमी होने पर हड्डियों के नरम होने की समस्या बढ़ जाती है, जिससे चलने-फिरने में ज्यादा दर्द महसूस होता है।
  • हार्ट डिजीज और डायबिटीज- विटामिन डी की कमी के कारण महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।

विटामिन डी के लेवल को कैसे सुधारें?

Dr. Anju Suryapani बताती हैं कि शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए आप इन बातों का ध्यान रखें-

  1. सुबह की धूप लें- हफ्ते में कम से कम 4 से 5 दिन, सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच 15 से 20 मिनट तक चेहरे, हाथों और पैरों पर सीधी धूप लें। सनस्क्रीन का इस्तेमाल किए बिना धूप में बैठना विटामिन डी की कमी पूरा करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है।
  2. आहार में बदलाव करें- अपने रोजाना के खाने में विटामिन डी से भरपूर फूड्स शामिल करें। फोर्टिफाइड दूध, फोर्टिफाइड दही, पनीर, संतरे का रस और मशरूम का सेवन करने के साथ, अंडे की जर्दी, फैटी फिश और कॉड लिवर ऑयल का सेवन करें।
  3. जांच और सप्लीमेंट्स- अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह पर 25-Hydroxy विटामिन डी ब्लड टेस्ट करवाएं। अगर विटामिन डी लेवल 20 ng/mL से नीचे है, तो डॉक्टर अक्सर 60,000 IU का वीकली विटामिन डी3 सप्लीमेंट 8 से 12 हफ्तों के लिए प्रिस्क्राइब करते हैं। ध्यान रहे सप्लीमेंट हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।

निष्कर्ष
महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य, हड्डियों की मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए विटामिन डी एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। अक्सर परिवार की देखभाल में व्यस्त महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। इसलिए, महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले विटामिन डी की कमी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • विटामिन डी की कमी से कहाँ-कहाँ दर्द हो सकता है?

    विटामिन डी की कमी से हड्डियों, पीठ और कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द बना रह सकता है। इसके अलावा, मांसपेशियों में कमजोरी और जोड़ों के साथ पैरों की पिंडलियों में भी तेज दर्द या ऐंठन महसूस हो सकती है।
  • महिलाओं में विटामिन डी कितना होना चाहिए?

    महिलाओं के ब्लड में विटामिन डी का सामान्य लेवल 30 से 50 ng/mL (नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर) के बीच होना चाहिए। इससे कम विटामिन डी लेवल सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 27, 2026 11:59 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani

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