Tue Sep 29, 2026 | 08:14 PM IST

Medically Reviewed by Dr Lokesh Bahadur Singh , Sr. Consultant Dental Surgeon

क्या दांतों की बीमारी दिल को भी पहुंचा सकती है नुकसान? जानें Heart Health से इसका कनेक्शन

मसूड़ों और दांतों की खराब हेल्थ का संबंध हार्ट हेल्थ से देखा गया है। यहां डेंटिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट से जानिए, ओरल हेल्थ की समस्या दिल की बीमारी के जोखिम से कैसे जुड़ सकती है।
क्या दांतों की बीमारी दिल को भी पहुंचा सकती है नुकसान? जानें Heart Health से इसका कनेक्शनक्या दांतों की बीमारी दिल को भी पहुंचा सकती है नुकसान? जानें Heart Health से इसका कनेक्शन

क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि दांतों और दिल की बीमारी का आपस में क्या संबंध हो सकता है? आमतौर पर दांतों में दर्द, मसूड़ों से खून आना या मुंह की बदबू को लोग केवल ओरल हेल्थ की समस्या मानते हैं लेकिन लगातार खराब ओरल हेल्थ और खासकर मसूड़ों की गंभीर बीमारी को हार्ट हेल्थ से भी जोड़ा गया है। देहरादून के कैलाश हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, डेंटल सर्जन डॉ. लोकेश बहादुर सिंह और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. इरफान याकूब भट के मुताबिक, ओरल हेल्थ और हार्ट हेल्थ के बीच संबंध को सही तरीके से समझना जरूरी है। मसूड़ों की बीमारी और हार्ट डिजीज के बीच संबंध को लेकर रिसर्च और स्टडीज मौजूद हैं, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनती है।

दांतों और दिल की बीमारी के बीच क्या संबंध है?

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. इरफान याकूब भट के अनुसार, मसूड़ों की बीमारी में लंबे समय तक सूजन और इंफेक्शन बनी रह सकती है। गंभीर पीरियडोंटल बीमारी (Periodontal Disease) में मुंह के बैक्टीरिया और सूजन से जुड़े पदार्थ ब्लड फ्लो तक पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि खराब ओरल हेल्थ और हार्ट संबंधी समस्याओं के बीच संबंध को लेकर लगातार स्टडी की जा रही हैं। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि केवल मसूड़ों की बीमारी से किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक हो जाएगा।

  • डॉक्टर लोकेश बहादुर सिंह बताते हैं कि ब्रश करते समय कभी-कभार खून आने को लोग अक्सर सामान्य समझ लेते हैं लेकिन अगर मसूड़ों से बार-बार खून आता है, मसूड़े लाल या सूजे हुए हैं, सांस से बदबू आती है, दांत हिलने लगे हैं या मसूड़े दांतों से पीछे हट रहे हैं, तो यह गम डिजीज के संकेत हो सकते हैं।
  • शुरुआती स्टेज में मसूड़ों की सूजन यानी जिंजिवाइटिस का इलाज न होने पर समस्या आगे बढ़कर पीरियडोंटाइटिस का रूप ले सकती है।
  • डॉक्टर लोकेश बहादुर सिंह बताते हैं कि गम डिजीज और हार्ट डिजीज के कई जोखिम कारक समान हैं। धूम्रपान, डायबिटीज, मोटापा, उम्र और फिजिकल एक्टिविटी की कमी दोनों स्थितियों के साथ जुड़े पाए गए हैं।
  • इसलिए अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है या वह तंबाकू का सेवन करता है, तो उसे दांतों और मसूड़ों की सेहत के साथ-साथ हार्ट हेल्थ पर भी ध्यान देना चाहिए।

Harvard Medical School में प्रकाशित जानकारी के अनुसार-

  • ओरल हेल्थ और दिल की बीमारियों के बीच गहरा संबंध हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, मसूड़ों के बैक्टीरिया खून की नसों में पहुंचकर सूजन और नुकसान पैदा कर सकते हैं, जिससे दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा, यह शरीर की सूजन (इम्यून रिस्पांस) या धूम्रपान, खराब लाइफस्टाइल और आनुवंशिक कारणों जैसी समस्याओं के कारण भी हो सकता है।
  • यानी मुंह की खराब सेहत केवल दांतों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह हमारे दिल की सेहत पर भी बुरा असर डाल सकती है।

क्या दांतों का इलाज कराने से हार्ट अटैक रुक सकता है?

डॉ. इरफान याकूब भट के अनुसार, गम डिजीज और हार्ट डिजीज के बीच संबंध के प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि पीरियडोंटल बीमारी का इलाज करने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक रोका जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी का इलाज जरूरी नहीं है। हेल्दी मसूड़े बनाए रखना ओरल हेल्थ के लिए जरूरी है और शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।

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दांतों और हार्ट को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?

  • डॉ. लोकेश बहादुर सिंह के अनुसार, ओरल और हार्ट हेल्थ दोनों के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।
  • दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें, रोजाना फ्लॉस करें और नियमित रूप से डेंटिस्ट से जांच कराएं।
  • साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे हार्ट रिस्क फैक्टर को कंट्रोल रखना भी जरूरी है। अगर मसूड़ों से लगातार खून आता है या दांत-मसूड़ों में इंफेक्शन के लक्षण हैं, तो डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए।

American Heart Association में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, ओरल हेल्थ और दिल की सेहत का सीधा संबंध हमारे पूरे शरीर की भलाई से जुड़ा है। हेल्दी रहने के लिए रोजाना कम से कम दो बार ब्रश और एक बार फ्लॉस जरूर करें, जिससे प्लाक पैदा करने वाले बैक्टीरिया दूर रहें। इसके अलावा, चीनी और प्रोसेस्ड फूड से दूर रहकर पौष्टिक डाइट लें और सिगरेट या तंबाकू जैसी हानिकारक आदतों से पूरी तरह बचें।

अपने डेंटिस्ट और डॉक्टर से नियमित रूप से खुलकर बात करें, अपनी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री शेयर करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाइयां लें। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप मसूड़ों की बीमारियों और दिल के खतरों से बच सकते हैं।

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निष्कर्ष

दांत और दिल अलग-अलग अंग जरूर हैं, लेकिन शरीर में उनकी सेहत के बीच संबंध देखा गया है। खासकर लंबे समय तक रहने वाली गम डिजीज और सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि गम डिजीज को सीधे हार्ट अटैक का कारण बताना सही नहीं है। बेहतर ओरल हाइजीन, नियमित डेंटल चेकअप, तंबाकू से दूरी और हार्ट के जोखिम कारकों को कंट्रोल रखना दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।

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FAQ

  • कितने समय में एक बार दांतों की जांच करानी चाहिए?

    जांच की जरूरत व्यक्ति की ओरल हेल्थ पर निर्भर करती है। कुछ लोगों को नियमित अंतराल पर डेंटिस्ट की सलाह की जरूरत होती है, जबकि मसूड़ों की बीमारी वाले लोगों को ज्यादा बार फॉलो-अप करना पड़ सकता है।
  • क्या मुंह की बदबू हमेशा मसूड़ों की बीमारी का संकेत होती है?

    नहीं। मुंह की बदबू के कई कारण हो सकते हैं, जैसे ओरल हाइजीन की कमी, जीभ पर बैक्टीरिया, मुंह की ड्राईनेस या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। लगातार समस्या रहने पर डेंटिस्ट से कारण की जांच करानी चाहिए।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 29, 2026 17:08 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Lokesh Bahadur Singh