Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Keshav Naithani , Maxillofacial Surgery & Implantology | 21+ Years of Clinical Experience

स्मोकिंग करने वालों में मसूड़ों की बीमारी का पता देर से क्यों चलता है? डॉक्टर से जानें वजह

जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उन्हें कई बार पता ही नहीं चलता कि मसूड़ों में खराबी हो गई है। इसकी वजह लंबे समय तक स्मोकिंग करना है और कई बार लोग इसके लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते। इस वजह से कई मामलों में दांतों और मसूड़ों को परमानेंट नुकसान पहुंच सकता है।  

स्मोकिंग करने वाले लोगों को न सिर्फ हार्ट और फेफड़ों की बीमारियां होने का रिस्क रहता है, बल्कि इससे दांतों और मसूड़ों को भी नुकसान हो सकता है। सबसे दिक्कत की बात यह है कि स्मोकिंग करने वाले लोगों में मसूड़ों की बीमारी की शुरुआती स्टेज में पहचान करना मुश्किल हो जाता है। जब तक मरीज दांतों की ओर ध्यान देता है, तब तक बीमारी दांतों और मसूड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा चुकी होती है। स्मोकिंग करने वाले लोगों को मसूड़ों की बीमारी का देर से क्यों पता चलता है? यह जानने के लिए हमने Dr. Keshav Naithani, Principal Director & HOD, Department of Dental & Maxillofacial Surgery, Max Multi-Speciality Hospital, Noida (UP) से बात की। उन्होंने बताया कि स्मोकिंग मसूड़ों की बीमारी के लक्षणों को छिपा देती है, जिससे इलाज में देरी हो सकती है।

स्मोकिंग के कारण मसूड़ों की बीमारी का पता देर से क्यों लगता है?

Dr. Keshav Naithani कहते हैं, “आमतौर पर मसूड़ों में इंफेक्शन होने का कारण ब्रश करते समय खून आना होता है, लेकिन स्मोकिंग करने वाले लोगों को ये लक्षण दिखाई नहीं देते, क्योंकि निकोटीन मसूड़ों की ब्लड वेसल्स को संकरा कर देता है। इससे मसूड़ों का ब्लड फ्लो कम हो जाता है और इंफेक्शन होने के कारण खून नहीं निकलता। जब मसूड़ों से खून नहीं आता, तो स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति को लगता है कि मसूड़े सेहतमंद है, लेकिन अंदर ही अंदर बीमारी बढ़ रही होती है।”

स्मोकिंग करने वाले लोगों के मसूड़ों पर असर

Dr. …. कहते हैं कि CDC के अनुसार, स्मोकिंग न करने वाले लोगों के मुकाबले स्मोकर्स को मसूड़ों की बीमारी होने का खतरा दोगुना हो सकता है। इसके अलावा, जो लोग जितने लंबे समय तक स्मोकिंग करते हैं, उन्हें मसूड़ों का खतरा उतना ही ज्यादा रहता है। जो लोग मसूड़ों की बीमारी का इलाज भी कराते हैं, उन लोगों पर इलाज का उतना ज्यादा असर नहीं हो पाता। इसलिए दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए स्मोकिंग और तंबाकू छोड़ना सबसे जरूरी है।

स्मोकिंग करने वाले लोगों को किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?

Dr. Keshav Naithani के मुताबिक, “स्मोकिंग करने वाले लोगों को अगर दांतों की जड़े दिखाई देने लगे, मसूड़ों से मवाद आने लगे, मसूडे़ सिकुड़ने लगे और दांतों का ढीला महसूस होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। स्मोकिंग के कारण लोगों के दांत पीले, काले या भूरे होने लगते हैं। कई लोगों को ठंडा या गर्म भी लग सकता है। इससे कैविटी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को दांतों में ऐसे लक्षण दिखे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।”

  1. मुंह में सफेद या लाल धब्बे होना - अगर स्मोकर्स के मसूड़ों, जीभ या गाल पर सफेद या लाल धब्बे होने लगे, तो कई बार मुंह में ल्युकोप्लाकिया होे का खतरा बढ़ सकता है। अगर छाले कई हफ्तों तक ठीक न हो या मुंह खोलने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  2. लगातार मुंह से बदबू आना - स्मोकिंग करने वाले लोगों के मुंह में लार बनने के प्रोसेस पर असर डाल सकता है, जिससे मुंह सूखने लगता है, जिससे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और मुंह को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।
  3. जख्म ठीक न होना - स्मोकर्स की मसूड़ों की सर्जरी की रिकवरी धीमी हो जाती है और दांत निकलवाने पर जख्म देर से भरता है, तो इसका मतलब है कि मसूड़ों में दिक्कत हो सकती है।
  4. इम्यूनिटी कमजोर होना - स्मोकिंग शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर देता है और जब इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है, तो मसूड़ों में मौजूद बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं। इससे मसूड़ों का नुकसान लगातार बढ़ता रहता है और इसी वजह से स्मोकिंग करने वाले लोगों में दांत हिलना, मसूड़ों का सिकुड़ना और समय से पहले दांत गिरने की समस्या अधिक देखने को मिलती है।

स्मोकिंग करने वाले लोगों के लिए बचाव के उपाय

Dr…. कहते हैं कि मसूड़ों की बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका स्मोकिंग छोड़ना है। इसके साथ लोगों को रोजाना दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करना चाहिए। हर छह महीने में डेंटल चेकअप कराना चाहिए और किसी भी तरह के बदलावों को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष

स्मोकिंग या तंबाकू मसूड़ों और दांतों को तेजी से नुकसान तो पहुंचाने के साथ शुरुआती लक्षणों को भी छिपा देते हैं। इस वजह से मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते। इससे दांतों और मसूड़ों को कई गंभीर बीमारियां शुरू हो सकती है। इसलिए स्मोकर्स को रेगुलर दांतों की चेकअप कराना बहुत जरूरी है।

FAQ

  • जब बीमारी का पता चलता है, तब तक दांतों को क्या नुकसान हो चुका होता है?

    चूंकि शुरुआती लक्षण छिपे रहते हैं, इसलिए स्मोकर्स सीधे अंतिम स्टेज पर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। तब तक मसूड़े दांतों का साथ छोड़ चुके होते हैं और दांतों को पकड़ने वाली जबड़े की हड्डी पूरी तरह गल चुकी होती है। इस स्टेज पर दांत पूरी तरह हिलने लगते हैं और उन्हें उखाड़ना ही एकमात्र रास्ता बचता है।
  • क्या स्मोकिंग करने से मसूड़ों की सूजन भी छिप जाती है?

    आमतौर पर जब मसूड़ों में बैक्टीरिया जमा होते हैं, तो वे लाल होकर सूज जाते हैं। लेकिन स्मोकिंग के धुएं और निकोटीन के असर से मसूड़ों के टिश्यूज सख्त, कड़क और मटमैले रंग के हो जाते हैं। इससे मसूड़ों की स्वाभाविक सूजन और लालपन बाहर से दिखाई नहीं देते।

Read Next

मॉनसून अलर्ट: बार‍िश में मच्छरों से फैलने वाले डेंगू, मलेर‍िया, च‍िकनगुन‍िया से कैसे बचें? डॉक्‍टर से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 13, 2026 18:17 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jul 13, 2026 18:17 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Keshav Naithani

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content