Fri Sep 11, 2026 | 07:34 PM IST

Medically Reviewed by Rhitika Sharma , Nutrition and Dietetics

क्या आपके शरीर में प्रोटीन की कमी है? डायटिशियन ने बताए 7 शुरुआती संकेत

प्रोटीन की कमी से होने वाले कुछ लक्षण जैसे कि दिन भर बिना वजह थकान होना, बाल झड़ना या नाखून टूटना को इग्नोर कर देते हैं, क्योंकि कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें प्रोटीन की कमी है। इस लेख में डॉक्टर ने प्रोटीन की कमी से होने वाले शुरुआती लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया है। 

आमतौर पर लोग प्रोटीन को सिर्फ जिम जाने वालों और बॉडी बनाने वालों से जोड़कर ही देखा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि प्रोटीन शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण पोषक तत्व है, जिसकी हर टिश्यू को जरूरत होती है। इसलिए हर व्यक्ति को उम्र और जरूरत के अनुसार रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए। प्रोटीन की कमी से होने वाले लक्षणों के प्रति लोगों में ज्यादा जागरूकता नहीं है, इसलिए हमने प्रोटीन की कमी से होने वाले संकेतों को जानने के लिए हमने Ms. Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।

प्रोटीन से जुड़ी स्टडी क्या कहती है?

Lancet में प्रकाशित स्टडी में साल 2016 से लेकर 2021 तक भारत में खानापान के बदलावों का विशलेषण किया है। इसमें NFHS-4 से NFHS-5 के आंकड़ों की समीक्षा की गई है। इस स्टडी के अनुसार, भारत में वयस्कों में कुपोषण और माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की कमी एक गंभीर समस्या है।

हालांकि, अगर प्रोटीन की बात करें, तो भारतीय वयस्क जो 15 से 54 साल के बीच हैं, उनके प्रोटीन लेने में काफी बदलाव देखा गया है। इसमें बताया गया है कि शाकाहारी प्रोटीन लेने वाले भारतीयों में साल 2021 तक 92 फीसदी से ज्यादा वयस्क रेगुलर दालें ले रहे थे। हालांकि, इसमें कुछ जरूरी अमीनो एसिड्स की कमी होती है, जो सिर्फ दूध और अंडे में पाए जाते हैं।

वहीं, साल 2021 के आंकड़ों के अनुसार, पशु आधारित प्रोटीन जैसे कि अंडे, मांस और मछली भारत में आधे से ज्यादा महिलाएं यानी 54.9% और 55.4% गर्भवती महिलाएं नहीं ले रही थी। 42.6% से 42.9% पुरुष नॉन-वेज प्रोटीन नहीं ले रहे थे।

इस स्टडी में प्रोटीन से जुड़े दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। भारत में गरीब वर्ग की 40 फीसदी से ज्यादा महिलाएं और प्रेग्नेंट महिलाएं दूध या दही नहीं खा पाती और अमीर वर्ग में इसकी दर काफी कम है। इस स्टडी से यह भी सामने आया है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन न मिलने की वजह से जन्म के समय शिशुओं का वजन कम था और प्रेग्नेंसी में भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसलिए प्रोटीन की कमी से जुड़े संकेतों को समझना जरूरी है।

Early signs of protein deficiency

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प्रोटीन की कमी से होने वाले 7 लक्षण

Senior Dietitian Rhitika Sharma कहती हैं, “प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के निर्माण से लेकर हार्मोन, एंजाइम, एंटीबॉडी, स्किन, बाल, नाखून और शरीर के क्षतिग्रस्त टिश्यू की मरम्मत तक करता है। इसके बावजूद आज भी बहुत से लोग सिर्फ कैलोरी काउंट करते हैं, लेकिन अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल नहीं करते। इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई देने लगता है। शुरुआत में ये लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन समय रहते इन्हें पहचानना जरूरी है।”

बिना वजह हर समय थकान महसूस होना

Rhitika Sharma ने कहा, “अगर किसी व्यक्ति को पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान बनी रहती है या थोड़े-से काम में ही शरीर जवाब देने लगता है, तो यह प्रोटीन की कमी का संकेत हो सकता है। प्रोटीन शरीर को जरूरी अमीनो एसिड देता है, जो टिश्यू की मरम्मत करके एनर्जी देने में मदद करते हैं। अगर शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो व्यक्ति जल्दी थकने लगता है और उसकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।”

बार-बार भूख लगना

Rhitika Sharma कहती हैं, “अगर खाना खाने के कुछ समय बाद ही दोबारा भूख लगने लगे या बार-बार कुछ खाने का मन करे, तो इसकी एक वजह प्रोटीन की कमी भी हो सकती है। प्रोटीन प्रचुर मात्रा लेने से पेट काफी समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इस वजह से लोगों की बार-बार स्नैकिंग और मीठा खाने की इच्छा खत्म होने लगती है।”

कैलोरी की मात्रा ज्यादा लेना

European Journal of Clinical Nutrition में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, जिन लोगों के खाने में प्रोटीन की मात्रा कम होती है, तो वे अपने शरीर के प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए ज्यादा कैलोरी वाली डाइट लेने लगते हैं। इसे प्रोटीन लीवरेज कहा जाता है। इसमें फिनलैंड के 422 बच्चों पर स्टडी की गई। इसमें उनके चार दिन के फूड रिकॉर्ड को चेक किया गया, तो पाया कि डाइट में प्रोटीन का प्रतिशत जितना कम था, बच्चों ने कुल कैलोरी उतनी ही ज्यादा खाई। हालांकि, बच्चों ने इस अतिरिक्त कैलोरी की एनर्जी को फिजिकल एक्टिविटीज से खत्म कर दिया, लेकिन जो लोग खाने के बाद फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, उनमें मोटापा बढ़ने का रिस्क बढ़ सकता है।

बाल झड़ना और नाखून कमजोर होना

Senior Dietitian Rhitika Sharma के मुताबिक, अगर किसी के बाल पहले के मुकाबले ज्यादा झड़ रहे हैं या नाखून जल्दी टूट रहे हैं, तो इसका कारण मौसम में बदलाव नहीं, बल्कि प्रोटीन की कमी भी हो सकती है। बाल और नाखून केराटिन प्रोटीन से बने होते हैं। जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो सबसे पहले इसका असर बालों और नाखूनों की क्वालिटी पर दिखाई देने लगता है। बाल पतले होना, टूटना और नाखूनों का कमजोर होना इसी के संकेत हो सकते हैं।

मांसपेशियों में कमजोरी

Clinical Nutrition की इस स्टडी में 85 साल के 722 बुजुर्गों को शामिल किया गया है। इसमें पाया गया कि कम प्रोटीन लेने वाले बुजुर्गों की ग्रिप स्ट्रेंथ पर्याप्त प्रोटीन लेने वालों के मुकाबले में औसतन 1.62 किलो कम पाई गई। महिलाओं में यह अंतर काफी ज्यादा देखने को मिला। कम प्रोटीन लेने वाली महिलाओं की चलने-फिरने और संतुलन बनाने की शुरुआती क्षमता भी काफी खराब थी।

इस बारे Rhitika Sharma कहती हैं, “अगर लंबे समय तक शरीर को प्रोटीन नहीं मिलता, तो वह जरूरी अमीनो एसिड पाने के लिए मांसपेशियों के टिश्यू को तोड़ना शुरू कर देता है। इससे धीरे-धीरे मसल मास कम होने लगता है। इस कारण कमजोरी, शरीर दर्द और सामान्य काम करते समय भी थकावट महसूस हो सकती है। यह समस्या बुजुर्गों में और भी तेजी से बढ़ सकती है।”

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जख्म देर से भरना

Rhitika Sharma ने बताया कि अगर छोटी सी चोट या कट को सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दरअसल, घाव भरने की प्रक्रिया में नए सेल्स और टिश्यू बनते हैं, जिसके लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। अगर प्रोटीन की कमी होती है, तो रिकवरी धीमी हो सकती है।

बार-बार इंफेक्शन होना

Senior Dietitian Rhitika Sharma ने कहा, “अगर किसी को बार-बार सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन या अन्य छोटी-छोटी बीमारियां होने लगे, तो इसका कारण इम्यूनिटी का कमजोर होना हो सकता है। शरीर की एंटीबॉडी प्रोटीन से बनती हैं। जब पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए संतुलित प्रोटीन युक्त डाइट इम्यूनिटी की मजबूती के लिए जरूरी है।”

प्रोटीन की कमी का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है?

Rhitika Sharma के अनुसार, प्रोटीन की कमी बुजुर्गों, शाकाहारी या वीगन लोगों को, प्रेग्नेंट, ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाएं, लंबे समय से बीमार रहने वाले मरीज, लिवर या किडनी की कुछ बीमारियों से पीड़ित लोग और बहुत कम कैलोरी वाली डाइट फॉलो करने वाले लोगों को हो सकता है।

निष्कर्ष
Rhitika Sharma लोगों को सलाह देती हैं कि प्रोटीन की कमी को इग्नोर न करें, क्योंकि अगर लंबे समय तक शरीर में प्रोटीन की कमी रहती है, तो कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से शरीर सेहतमंद और एनर्जी से भरपूर रहता है।

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FAQ

  • क्या अधिक मात्रा में प्रोटीन खाने के भी नुकसान हो सकते हैं?

    बिल्कुल, किसी भी चीज को ज्यादा खाने के नुकसान हो सकते हैं। अगर जरूरत से ज्यादा प्रोटीन खाया जाए, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, पेट में गैस व कब्ज हो सकती है और यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है। संतुलित मात्रा में ही प्रोटीन का सेवन करें।
  • क्या बच्चों में प्रोटीन की कमी से विकास रुक सकता है?

    बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए प्रोटीन बिल्डिंग ब्लॉक की तरह काम करता है। बच्चों में इसकी भारी कमी से हाइट न बढ़ना, वजन न बढ़ना, हड्डियों का कमजोर होना और गंभीर मामलों में क्वाशिओरकोरया मरास्मस जैसी कुपोषण की बीमारियां हो सकती हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 21, 2026 19:01 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Rhitika Sharma

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