शरीर में प्रोटीन मांसपेशियां बनाने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम, त्वचा, बाल, हार्मोन, हड्डियों और शरीर की रिकवरी करने में भी मदद करता है। इसलिए प्रोटीन की प्रचुर मात्रा लेना बहुत जरूरी है और अगर शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाए, तो इससे कई गंभीर बीमारियां होने का रिस्क रहता है। प्रोटीन की कमी से होने वाली बीमारियों के बारे में हमने Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना हर उम्र के व्यक्ति के लिए जरूरी है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, खिलाड़ियों और बीमारी से उबर रहे लोगों में इसकी जरूरत सामान्य लोगों से ज्यादा हो सकती है।
लंबे समय तक प्रोटीन की कमी होने पर शरीर को नुकसान
Senior Dietitian Rhitika Sharma कहती हैं, “शरीर में प्रोटीन की कमी होने के कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में प्रोटीन न पचाने की कंडीशन में प्रोटीन कम होने लगता है। वहीं जो लोग कैंसर, लिवर या किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, उन्हें भूख नहीं लगती और इसका असर प्रोटीन की कमी पर पड़ता है। कुछ मामलों में देखा गया है कि बच्चे खासतौर से अंडा, पनीर, दाल या मांस-मछली खाने से कतराते हैं, उन्हें प्रोटीन की कमी हो सकती है। अगर लंबे समय तक शरीर में प्रोटीन की कमी बनी रहे, तो शरीर जरूरी अमीनो एसिड मांसपेशियों से लेना शुरू कर देता है। इससे मसल वेस्टिंग होने लगती है और बुजुर्गों में यह समस्या सार्कोपीनिया का रूप ले सकती है।”
शरीर में सूजन होना
Cleveland Clinic के अनुसार, प्रोटीन की गंभीर कमी से क्वाशिओरकोर बीमारी होने का रिस्क बढ़ सकता है। इस बीमारी में गंभीर कुपोषण हो सकता है और शरीर में सूजन आ सकती है। ब्लड में मौजूद एल्बयूमिन प्रोटीन शरीर के पानी का संतुलन बनाए रखात है और प्रोटीन की कमी होने पर हाथ-पैरों और पेट में पानी जमा होने लगती है। इससे शरीर में सूजन आने लगती है।
बच्चों की ग्रोथ पर असर
Senior Dietitian Rhitika Sharma ने कहा, “अगर बढ़ते बच्चों में प्रोटीन की कमी हो जाए, तो इसका असर सिर्फ फिजिकल ग्रोथ पर ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। लंबे समय तक प्रोटीन की कमी रहने पर बच्चों की लंबाई और वजन सही तरीके से नहीं बढ़ पाता। साथ ही सीखने की क्षमता, फोकस और इम्यून सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि बच्चों के खाने में दाल, दूध, दही, पनीर और अंडे जैसी चीजें शामिल करने की सलाह दी जाती है।”
एनीमिया
Cleveland Clinic के मुताबिक, एनीमिया होने का कारण रेड ब्लड सेल्स या हीमोग्लोबिन की कमी है। हीमोग्लोबिन को बनाने के लिए शरीर को प्रोटीन की जरूरत होती है और अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं मिलता, तो ब्लड टेस्ट में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा कम हो सकती है। हालांकि, एनीमिया होने का कारण सिर्फ प्रोटीन नहीं होता, लेकिन ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन कम आता है, तो डॉक्टर से प्रोटीन चेकअप की सलाह जरूर लें।

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कमजोर इम्यून सिस्टम
Rhitika Sharma के अनुसार, इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। खाने के जरिए प्रोटीन जब शरीर में पहुंचता है, तो यह अमीनो एसिड में बदल जाता है। ये अमीनो एसिड शरीर में एंटीबॉडीज बनाने का काम करते हैं। यही एंटीबॉडीज इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। अगर किसी को बार-बार इंफेक्शन या सर्दी-जुकाम होता है या रिकवरी धीमी होती है, तो इसका मतलब है कि इम्यून सिस्टम कमजोर हो रहा है और इसके लिए प्रोटीन का चेकअप कराना जरूरी है।
कुपोषण
Rhitika Sharma ने बताया कि अगर लगातार लंबे समय तक प्रोटीन की कमी रहती है, तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है। इसलिए लगातार प्रोटीन की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर शरीर में प्रोटीन की बहुत ज्यादा कमी हो जाए, तो एक्सपर्ट की सलाह पर सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
दिन में कितना प्रोटीन लेना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सामान्य वयस्कों को दिन में कुल कैलोरी का 10% से 15% प्रोटीन से आना बेहतर है। जो लोग रोजाना करीब 2000 कैलोरी लेने वाले सेहतमंद वजन के लोगों को यह मात्रा करीब 50 से 75 ग्राम प्रोटीन के बराबर होती है। प्रोटीन की मात्रा का ध्यान खासतौर पर टीनएजर्स, एथलीट और बॉडीबिल्डर को रखना चाहिए और वे लोग दिन की कुल एनर्जी का 15% से ज्यादा प्रोटीन ले सकते हैं।
रोजाना की डाइट में प्रोटीन कैसे बढ़ाया जा सकता है?
Rhitika Sharma कहती हैं, “प्रोटीन की मात्रा को पूरा करने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स लेने की जरूरत नहीं है। अगर डाइट संतुलित हो, तो ज्यादातर लोगों की प्रोटीन जरूरत पूरी हो सकती है। आमतौर पर लोग प्रोटीन के लिए इन चीजों को ले सकते हैं।”
- दालें और राजमा
- छोले
- सोया और टोफू
- पनीर
- दूध और दही
- अंडे
- चिकन और मछली
- अंकुरित अनाज
- मूंगफली और मेवे
- बीज जैसे चिया, अलसी और कद्दू के बीज
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निष्कर्ष
Rhitika Sharma लोगों को सलाह देती हैं कि अगर लंबे समय से थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, बार-बार इंफेक्शन, बाल झड़ना, जख्म भरने में देरी या बिना वजह वजन कम हो रहा हो, तो इसे थकान समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में एक्सपर्ट से सलाह लें, लेकिन बिना सलाह के हाई-प्रोटीन सप्लीमेंट शुरू करना भी सही नहीं है, खासकर अगर किडनी या लिवर से जुड़ी कोई बीमारी है। बेहतर होता है कि डॉक्टर की सलाह पर रोजाना डाइट में प्रोटीन जरूर शामिल करें।
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FAQ
क्या प्रोटीन की भारी कमी से लिवर फैटी हो सकता है?
प्रोटीन की कमी से लिवर में फैट को बाहर निकालने वाले प्रोटीन्स बनने का काम रुक जाता है। इस कारण लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है, जो आगे चलकर क्वाशिओरकोर और गंभीर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का कारण बनता है।लंबे समय तक कमी से हड्डियों पर क्या असर पड़ता है?
प्रोटीन हड्डियों के ढांचे और डेंसिटी को बनाए रखने के लिए उतना ही जरूरी है जितना कि कैल्शियम। इसकी लंबे समय तक कमी से हड्डियां खोखली और कमजोर हो जाती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और मामूली झटका लगने पर भी फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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Jul 22, 2026 15:29 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 22, 2026 15:29 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Rhitika Sharma