Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

क्या प्रोटीन की कमी से इम्यूनिटी पर भी असर पड़ता है? डायटिशियन से जानें

प्रोटीन की कमी से इम्यूनिटी पर बुरा असर पड़ता है। इससे रिकवरी धीमी हो जाती है और घाव भी भरने में अधिक समय लेता है। यहां तक कि प्रोटीन की कमी की वजह से संक्रमण के फैलने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

यह बात हम सभी जानते हैं कि हमारे शरीर के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी पोषक तत्व है। यह शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए, कोशिकाओं, मांसपेशियों, ऊतकों, और त्वचा का मुख्य निर्माण करने के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। यहां तक कि प्रोटीन हार्मोन और एंजाइम के प्रोडक्शन में भी मददगार है। चूंकि, प्रोटीन हमारी सेहत के लिए इतना आवश्यक है, तो यहां यह सवाल जरूर मन में उठता है कि क्या प्रोटीन की कमी से शरीर में इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है? आइए, जानते हैं Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी की राय।

कम प्रोटीन और इम्यूनिटी के बीच क्या कनेक्शन है?

⁠can low protein intake affect immunity and recovery from illness 01 (21)

एंटीबॉडीज के प्रोडक्शन में कमी

आपने अक्सर सुना होगा कि किसी भी तरह के बैक्टीरिया या वायरस से लड़ने के लिए हमारी इम्यूनिटी का स्वस्थ होना जरूरी है। दरअसल, किसी भी तरह के संक्रमण से लड़ने में इम्यून सिस्टम एंटीबॉडीज तैयार करता है। ये एंटीबॉडीज पूरी तरह से प्रोटीन से बनी होती हैं। अगर आपकी डाइट में प्रोटीन की कमी है, तो शरीर संक्रमण या किसी भी वायरल इंफेक्शन से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी नहीं बना पाता है, जिससे आपकी संक्रमण से लड़ने की क्षमता घट जाती है। भले ही यह इम्यूनिटी बढ़ाने वाले किसी इंजेक्शन की तरह यह तुरंत असर नहीं दिखाता है, लेकिन बॉडी की इम्यूनिटी को सही रखने के लिए रोजाना इसकी सही मात्रा लेना बहुत जरूरी है।

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इम्यून सेल्स में कमजोरी

विशेषज्ञ हमारे इम्यून सिस्टम को समझाने के लिए अक्सर कहते हैं कि हमारे शरीर में मौजूद सेल्स किसी सैनिक की तरह होते हैं, जैसे टी-सेल्स और बी-सेल्स। ये बीमारियों को पहचानने और उन्हें नष्ट करने का काम करती हैं। ये कोशिकाएं तभी सही तरह से काम करती हैं, जब शरीर में प्रोटीन की मात्रा पर्याप्त हो और उसमें मौजूद अमीनो एसिड उपलब्ध हों। प्रोटीन की कमी से इन कोशिकाओं की संख्या और ताकत दोनों कम हो जाती हैं।

घाव भरने में देरी

प्रोटीन की कमी के कारण हमारा कोई भी घाव तेजी से नहीं भरता है। दरअसल, प्रोटीन की कमी की वजह से टिश्यूज समय पर रिपेयर नहीं हो पाते हैं और नई कोशिकाओं का निर्माण भी प्रभावित होता है। यदि प्रोटीन का सेवन कम किया जाए, तो बीमारी से लड़ने की हमारी क्षमता भी कम हो जाती है। ऐसे में किसी भी बीमारी से रिकवर होने में औसत से अधिक समय लग सकता है। ऐसा ही कोई चोट या घाव होने पर होता है। ध्यान रखें कि जब घाव तेजी से नहीं भरता है, तो अक्सर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

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निष्कर्ष

प्रोटीन के बिना हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोध क्षमता कमजोर हो जाती है। यहां तक कि प्रोटीन की कमी की वजह से बार-बार सर्दी-जुकाम और संक्रमण होने लगता है, जिससे रिकवरी में भी समय लगता है। अगर आप नोटिस करें कि आपको किसी सामान्य बीमारी से लड़ने में भी अधिक समय लग रहा है, तो समझ जाएं कि आपकी डाइट में प्रोटीन की कमी है। प्रोटीन की रोजाना की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में दालें, डेयरी उत्पाद, अंडे या लीन मीट शामिल करें। 

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FAQ

  • एक वयस्क को रोजाना कितने प्रोटीन की जरूरत होती है?

    आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क को उसके शरीर के प्रति किलोग्राम वजन पर लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। हालांकि, आवश्यकता व्यक्ति के कद, जरूरत और वजन के अनुरूप बदल सकती है। इसलिए, इसकी सही मात्रा जानने के लिए अपने एक्सपर्ट से सलाह लें।
  • इम्यूनिटी कमजोर होने के अलावा प्रोटीन की कमी के अन्य लक्षण क्या हैं?

    मांसपेशियों में कमजोरी या दर्द, लगातार बाल झड़ना, नाखूनों का टूटना, चेहरे या पैरों में सूजन आदि इसके मुख्य लक्षण हैं।
  • शाकाहारी लोग प्रोटीन की कमी को कैसे पूरा कर सकते हैं?

    शाकाहारी लोग अपनी डाइट में पनीर, दूध, दही, सोयाबीन, दालें, छोले, राजमा, बादाम आदि की मदद से प्रोटीन की कमी को पूरा कर सकते हैं।

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Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jun 23, 2026 12:43 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 23, 2026 12:43 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dt Divya Gandhi

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