प्रोटीन शरीर के लिए एक जरूरी न्यूट्रिएंट है। प्रोटीन शरीर के विकास और सेल्स को रिपेयर के लिए जरूरी है। अगर आपकी डाइट में पर्याप्त प्रोटीन होता है, तो लंबे समय तक पेट भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती है। वजन कंट्रोल करने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने के लिए भी प्रोटीन जरूरी है। अक्सर लोगों को यह कंफ्यूजन होता है कि कौन सा प्रोटीन स्रोत चुनें? दो तरह से हम प्रोटीन का सेवन करते हैं- पहला है प्लांट बेस्ड प्रोटीन और दूसरा है पशु या एनिमल बेस्ड प्रोटीन। शाकाहारी लोग अक्सर प्लांट बेस्ड विकल्पों को चुनते हैं और मांसाहारी एनिमल बेस्ड प्रोटीन को, वहीं कुछ लोग दोनों का ही सेवन करते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर सेहत के लिए बेहतर विकल्प कौन सा है? इसका जवाब जानने के लिए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।
प्लांट vs पशु प्रोटीन: शरीर के लिए क्या है बेहतर?

Dietitian Smita Singh ने बताया कि प्लांट और पशु प्रोटीन में से कोई एक प्रोटीन स्रोत ज्यादा अच्छा नहीं हो सकता। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, फिटनेस लक्ष्य, फूड च्वॉइस और खानपान की आदतें यह तय करती हैं कि उसके लिए कौन सा प्रोटीन स्रोत बेहतर है? इसलिए हेल्दी डाइट के तौर पर दोनों ही प्रोटीन स्रोत शरीर के लिए जरूरी माने जाते हैं।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2022 में Trends In Food Science & Technology में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, एनिमल प्रोटीन में अमीनो एसिड की अधिक मात्रा पाई जाती है, वहीं प्लांट बेस्ड प्रोटीन में फाइबर और अन्य पोषक तत्व अधिक हो सकते हैं। स्टडी में यह भी बताया गया है कि प्रोटीन का स्रोत नहीं बल्कि उसमें मौजूद अमीनो एसिड्स, पोषक तत्व, पाचन क्षमता पर असर और शरीर की स्थिति के अनुसार यह तय होता है कि कौन सा प्रोटीन स्रोत शरीर के लिए ज्यादा अच्छा है।
यह भी पढ़ें- किस उम्र में शरीर को कितने प्रोटीन की जरूरत होती है? डॉक्टर से जानें
एनिमल प्रोटीन में अमीनो एसिड ज्यादा होते हैं
एनिमल प्रोटीन में सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं, वहीं प्लांट बेस्ड प्रोटीन में अमीनो एसिड कम हो सकते हैं। हालांकि, अलग-अलग प्लांट प्रोटीन स्रोत जैसे दालें, सोया, पनीर, नट्स, टोफू, सीड्स वगैरह का सेवन करके सभी जरूरी अमीनो एसिड्स की पूर्ति कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें- प्रोटीन सप्लीमेंट्स से होने वाली गैस और ब्लोटिंग को कैसे रोकें? एक्सपर्ट से जानें
मसल ग्रोथ के लिए कौन सा प्रोटीन स्रोत है बेहतर?
Dietitian Smita Singh ने बताया कि मसल ग्रोथ के लिए दोनों ही प्रोटीन जरूरी हैं। एनिमल प्रोटीन की बात करें, तो उसमें ल्यूसीन पाया जाता है जो मसल ग्रोथ में मदद करता है। हालांकि, पर्याप्त मात्रा में लिया गया प्लांट बेस्ड प्रोटीन भी मसल्स के लिए फायदेमंद हो सकता है। साल 2021 में Nutrients में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, प्लांट और एनिमल प्रोटीन दोनों ही मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। स्टडी में यह भी बताया गया कि प्रोटीन किस प्रकार का है? केवल यही नहीं, बल्कि प्रोटीन की मात्रा, क्वॉलिटी, एक्सरसाइज रूटीन भी मांसपेशियों के विकास के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।
यह भी पढ़ें- बिजी लोग खाने में प्रोटीन की कमी कैसे पूरी करें? डायटिशियन बता रही हैं 6 आसान तरीके
पाचन के लिए क्या है बेहतर?
इसका जवाब है प्लांट बेस्ड प्रोटीन। पाचन के लिए प्रोटीन स्रोत में फाइबर होना जरूरी है। एनिमल प्रोटीन में फाइबर नहीं होता। वहीं प्लांट बेस्ड प्रोटीन में फाइबर होता है इसलिए यह आसानी से पच जाता है। हालांकि, प्लांट प्रोटीन विकल्प जैसे बीन्स, दालें या सोयाबीन का सेवन करने से कुछ लोगों को अपच, गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
वेट लॉस और हार्ट हेल्थ के लिए क्या है बेहतर?
जवाब है प्लांट बेस्ड प्रोटीन। एनिमल प्रोटीन में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है। यह वेट मैनेजमेंट और हार्ट हेल्थ बरकरार रखने के लिए पहली च्वॉइस नहीं बन सकता। वहीं प्लांट बेस्ड प्रोटीन में फाइबर होता है और सैचुरेटेड फैट कम होता है जिससे पाचन बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद मिलती है, वजन कंट्रोल होता है और हार्ट हेल्थ भी अच्छी रहती है। साल 2024 में Harvard T.H. Chan School Of Public Health में प्रकाशित एक लेख में इस बात का जिक्र मिलता है कि प्लांट प्रोटीन ज्यादा लेने से हार्ट डिजीज और कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है। यह नतीजा 2.03 लाख वयस्कों के 30 वर्षों के डेटा के विश्लेषण के बाद निकाला गया।
व्हे प्रोटीन भी लेते हैं लोग
व्हे प्रोटीन (Whey Protein) दूध से तैयार होने वाला प्रोटीन है। पनीर या चीज बनाने के दौरान जो पतला तरल बचता है उसे व्हे कहते हैं। इसी से प्रोसेसिंग के जरिए व्हे प्रोटीन पाउडर तैयार किया जाता है।
क्या व्हे प्रोटीन सभी के लिए फायदेमंद है?
Dietitian Smita Singh ने बताया कि यह हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं है। एथलीट या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वाले लोग फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह पर इसका सेवन करते हैं। वहीं जिन्हें डाइट से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता है, वे भी इसका सेवन करते हैं। हालांकि, किडनी डिजीज, लैक्टोज इंटॉलरेंस या किसी अन्य बीमारी में डॉक्टर की सलाह के बगैर इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष:
प्लांट और एनिमल प्रोटीन दोनों ही अच्छी सेहत के लिए जरूरी हैं। आपका फिटनेस लक्ष्य, उम्र, रूटीन, डाइट यह तय करती है कि आपके लिए कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? प्लांट बेस्ड प्रोटीन में फाइबर भी होता है जो पाचन, मेटाबॉलिज्म, वेट लॉस और हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी है। वहीं एनिमल प्रोटीन में ज्यादा अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं जो कि शरीर के फंक्शन को बेहतर बनाते हैं। एथलीट या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वाले लोग व्हे प्रोटीन का भी सेवन करते हैं, लेकिन इसे हर कोई नहीं ले सकता। इसलिए सभी प्रोटीन स्रोत सेहत के लिए जरूरी हैं, इन्हें अन्य पोषक तत्वों के साथ सीमित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।
FAQ
प्लांट प्रोटीन कौन से हैं?
दाल, लोबिया, राजमा, चना, टोफू, सोयाबीन, ओट्स, मूंगफली, बादाम, चिया सीड्स वगैरह प्लांट बेस्ड प्रोटीन के उदाहरण हैं।एनिमल बेस्ड प्रोटीन कौन से हैं?
अंडा, चिकन, मछली, बीफ, दूध, दही, पनीर, चीज, व्हे प्रोटीन वगैरह एनिमल बेस्ड प्रोटीन कहलाते हैं।एनिमल बेस्ड प्रोटीन के नुकसान क्या हैं?
एनिमल बेस्ड प्रोटीन में फैट की मात्रा ज्यादा होती है जिससे हार्ट डिजीज, हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है। किडनी डिजीज के मरीजों के लिए एनिमल बेस्ड प्रोटीन नुकसानदायक हो सकता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 20, 2026 17:25 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Smita Singh