Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Keshav Naithani , Maxillofacial Surgery & Implantology | 21+ Years of Clinical Experience

प्रेग्नेंसी में मसूड़ों की सूजन और ब्लीडिंग हो सकती है जिंजिवाइटिस का संकेत, जानें क्यों न करें इसे नजरअंदाज

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में फिजिकल और मेंटल बदलाव होते हैं और इसमें मसूड़ों में सूजन और ब्लीडिंग होना भी शामिल है। प्रेग्नेंसी में दांतों की समस्या प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस कहा जाता है और इसे इग्नोर करने से क्या नुकसान हो सकते हैं, जानने के लिए पढ़े यह लेख।

प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव का असर सिर्फ स्किन, बाल या हड्डियों पर ही नहीं होता, बल्कि इसका असर दांतों और मसूड़ों पर भी हो सकता है। कई प्रेग्नेंट महिलाओं को ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आने लगता है या दांतों में सेंसिटिविटी महसूस हो सकती है। आमतौर पर महिलाएं इसे इग्नोर कर देती हैं कि कुछ समय बाद खुद ही ठीक हो जाएगा, लेकिन यह कंडीशन प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस का लक्षण हो सकती है। इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Keshav Naithani, Principal Director & HOD, Department of Dental & Maxillofacial Surgery, Max Multi-Speciality Hospital. Sector-19, Noida (UP) से बात की। उन्होंने बताया कि अगर प्रेग्नेंसी में महिलाओं को अपने मसूड़ों की खास देखभाल करनी चाहिए।

क्या प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस होना सामान्य है?

Dr. Keshav Naithani कहते हैं, “मेरे पास प्रेग्नेंसी के दौरान कई महिलाएं आती हैं, जिनका एक ही सवाल होता है कि क्या मसूड़ों से खून आना सामान्य है? तो मैं हमेशा कहता हूं कि मसूड़ों से खून आना आम बात है, लेकिन इसे सामान्य न समझा जाए। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है और इस वजह से मसूड़े दांतों पर जमी प्लाक के कारण ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं। अगर प्लाक को लंबे समय तक साफ न किया जाए, तो मसूड़ों में सूजन और इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। इसे ही प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस कहा जाता है।”

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प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस का समय पर इलाज न होने के नुकसान

Dr. Keshav Naithani के मुताबिक, “प्रेग्नेंसी में मसूड़ों की बीमारी का असर सिर्फ मुंह तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि समय पर इलाज न कराने पर महिला की समय से पहले डिलीवरी और कम वजन वाले शिशु का जन्म हो सकता है। इसलिए मसूड़ों के सूजन या दांतों के दर्द को इग्नोर नहीं करना चाहिए। प्रेग्नेंट महिलाएं दूसरी तिमाही में दांतों पर जमी प्लाक और कैल्कुलस को हटाने के लिए स्केलिंग और रूट प्लानिंग कर सकती है, लेकिन किसी भी तरह की दांतों के इलाज से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।”

प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस के लक्षण

Dr. Keshav Naithani ने बताया कि प्रेग्नेंसी में महिलाओं को मसूड़ों में सूजन, ब्रश करते समय खून निकलना, मसूड़ों या आसपास के हिस्से में हल्का दर्द होना, मसूड़ों का लाल और सेंसिटिव होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बार मसूड़ों में दर्द बहुत कम होता है, इसलिए महिलाएं इसे ज्यादा गंभीर नहीं मानती और इस वजह से मूसड़ों की समस्या गंभीर हो सकती है।

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निष्कर्ष
अगर प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस हो, तो डेटिंस्ट महिला की कंडीशन को देखते हुए इलाज करते हैं। इसके अलावा, महिलाओं को मुलायम ब्रिसल वाले टुथब्रश से हल्के हाथ से दांतों की सफाई करने की सलाह दी जाती है। रेगुलर मुंह की सफाई करनी चाहिए और प्रेग्नेंसी में समय-समय पर डेंटल चेकअप कराते रहना चाहिए। प्रेग्नेंसी जिंजिवाइटिस हार्मोनल बदलावों के कारण होता है, लेकिन सही देखभाल के जरिए इसकी संभावना को कम किया जा सकता है।

FAQ

  • प्रेग्नेंसी ट्यूमर क्या है और क्या यह कैंसर है?

    यह कैंसर बिल्कुल नहीं है। मसूड़ों में बहुत ज्यादा सूजन और इंफेक्शन के कारण कई बार दो दांतों के बीच लाल रंग का एक बड़ा मांस का टुकड़ा उभर आता है, जिसे 'पायोजेनिक ग्रेन्युलोमा' या प्रेग्नेंसी ट्यूमर कहते हैं। यह पूरी तरह सामान्य होता है और ब्लीडिंग करता है, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद यह अपने आप गायब हो जाता है।
  • क्या गर्भावस्था के दौरान डेंटिस्ट के पास जाना और दांतों का इलाज कराना सुरक्षित है?

    प्रेग्नेंसी में दांतों का इलाज कराना पूरी तरह सुरक्षित और जरूरी है। प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही को डेंटल क्लीनिंग के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। डॉक्टर को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में पहले ही बता दें, ताकि वे बिना किसी हानिकारक दवाओं या एक्स-रे के सुरक्षित तरीके से मसूड़ों की सफाई कर सकें।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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